Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Monday, 03 August, 2026, 08:38:04 PM IST.

tajnews.in | आगरा: फतेहाबाद रोड स्थित कलाल खेरिया क्षेत्र की एक भूमि की रजिस्ट्री में कथित रूप से स्टांप शुल्क कम जमा कराने के मामले में जिला प्रशासन ने वसूली के आदेश जारी किए हैं। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, जिलाधिकारी मनीष बंसल की अदालत ने उप निबंधक की जांच रिपोर्ट के आधार पर बुलंद हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्ध बकाया स्टांप शुल्क, अधिभार और ब्याज की वसूली का आदेश दिया है। संबंधित भूमि की रजिस्ट्री डॉ. सुनील चोपड़ा और उनकी पत्नी रंजू चोपड़ा के नाम हुई थी।
आदेश के अनुसार, प्रकरण में करीब 5.55 लाख रुपये के बकाया स्टांप शुल्क, 27,800 रुपये अधिभार तथा भुगतान होने तक 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज वसूला जाएगा। आदेश में कहा गया है कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उप निबंधक की जांच में सामने आया मामला
मामला सदर तहसील के अंतर्गत मौजा कलाल खेरिया की खसरा संख्या 161, 162, 163 और 164 की लगभग 0.1818 हेक्टेयर (1818 वर्गमीटर) भूमि से जुड़ा है। उप निबंधक तृतीय सदर की जांच रिपोर्ट के अनुसार, रजिस्ट्री के समय भूमि को कृषि श्रेणी में दर्शाया गया था, जबकि मौके के निरीक्षण में उसका वास्तविक स्वरूप आवासीय पाया गया।
जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि संबंधित भूखंड चारों ओर से विकसित कॉलोनियों और आबादी से घिरा हुआ है। स्थल पर बाउंड्रीवाल, मुख्य प्रवेश द्वार और अन्य निर्माण मौजूद हैं। आसपास शैक्षणिक, आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी स्थित हैं। इन तथ्यों के आधार पर जांच अधिकारी ने भूमि को आवासीय प्रकृति का माना।
डॉ. सुनील चोपड़ा और रंजू चोपड़ा के नाम हुई थी रजिस्ट्री
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित भूमि बुलंद हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड की ओर से डॉ. सुनील चोपड़ा और रंजू चोपड़ा के नाम हस्तांतरित की गई थी। प्रशासन का कहना है कि भूमि के वास्तविक स्वरूप के अनुरूप स्टांप शुल्क जमा नहीं कराया गया, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ।
आवासीय सर्किल रेट के आधार पर पुनर्मूल्यांकन
जिलाधिकारी की अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों और जांच रिपोर्ट के आधार पर भूमि का मूल्यांकन 7,500 रुपये प्रति वर्गमीटर की आवासीय सर्किल दर से करने का निर्देश दिया। इसी आधार पर स्टांप शुल्क की पुनर्गणना कर बकाया राशि निर्धारित की गई।
संबंधित पक्ष की दलील नहीं हुई स्वीकार
सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष ने भारतीय स्टांप अधिनियम की धारा-29 का हवाला देते हुए राहत की मांग की। जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) ने तर्क दिया कि भूमि का वास्तविक स्वरूप और उपयोग स्पष्ट रूप से आवासीय है। उपलब्ध दस्तावेजों और निरीक्षण रिपोर्ट पर विचार करने के बाद जिलाधिकारी ने सरकारी पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए वसूली के आदेश पारित किए।
ब्याज के साथ होगी वसूली
आदेश के अनुसार बकाया स्टांप शुल्क के साथ 27,800 रुपये अधिभार और भुगतान की तिथि तक 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज भी देय होगा। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर राजस्व वसूली प्रमाणपत्र जारी कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विकसित क्षेत्रों में आवासीय अथवा व्यावसायिक भूमि को कृषि भूमि दर्शाकर कम स्टांप शुल्क पर रजिस्ट्री कराने के मामलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इस कार्रवाई को भी ऐसे मामलों में प्रशासन की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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