हर पाँचवाँ भारतीय होगा बुजुर्ग: क्या भारत तैयार है इस नई चुनौती के लिए?

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Article Desk, 🌐 tajnews.in | Sunday, 26 July, 2026, 11:15:22 AM IST.

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Brij Khandelwal
बृज खंडेलवाल
वरिष्ठ पत्रकार व विश्लेषक
आगरा के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ पत्रकार और प्रतिष्ठित पर्यावरणविद् बृज खंडेलवाल ने वर्ष 1972 में ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC, नई दिल्ली) से पत्रकारिता की शुरुआत की। वे ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘INDIA TODAY’, ‘इंडिया एब्रॉड’, और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी ‘IANS’ सहित देश-विदेश के कई शीर्ष मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। ‘ब्रज मंडल हेरिटेज कंवर्जेशन सोसाइटी’ के संस्थापक खंडेलवाल ने यमुना और ताजमहल संरक्षण पर दो ऐतिहासिक पुस्तकें लिखी हैं।

हर पाँचवाँ भारतीय होगा बुजुर्ग: क्या भारत तैयार है इस नई चुनौती के लिए?

— बृज खंडेलवाल

एक शांत सुबह घर के कमरों में एक अजीब-सी बोझिल ख़ामोशी उतर आती है। बच्चे अपनी पढ़ाई, नौकरी और करियर की अंधी दौड़ में महानगरों और विदेशी शहरों की चकाचौंध में खो चुके हैं। कभी दिन-रात बजने वाली घर के टेलीफोन की घंटी अब बहुत कम ही बजती है। ढलती उम्र के साथ घुटनों का दर्द लगातार बढ़ता जाता है, स्मृतियां और पुरानी यादें धीरे-धीरे धुंधली पड़ने लगती हैं और मानसिक तन्हाई बिना किसी औपचारिक दस्तक के घर की एक स्थाई मेहमान बन जाती है। यह किसी एक या दो बेबस वृद्धों की निजी व्यथा मात्र नहीं है, बल्कि यह उस तेजी से बदलते भारत की मर्मस्पर्शी तस्वीर है, जहाँ बहुत जल्द हर पाँचवाँ नागरिक आधिकारिक रूप से वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में शुमार होने जा रहा है।

हमारा देश भारत अब एक ऐसे निर्णायक ऐतिहासिक और जनसांख्यिकीय मोड़ पर आ खड़ा हुआ है, जहाँ उसकी आज तक की सबसे बड़ी ताक़त—उसकी विशाल युवा आबादी—आने वाले कुछ ही दशकों में सबसे बड़ी सामाजिक और नीतिगत चुनौती बनने जा रही है। समूची दुनिया लंबे समय से भारत को ‘यंग इंडिया’ या युवाओं के देश के नाम से कूटनीतिक रूप से जानती और मानती आई है। परंतु आने वाले वर्षों में यह जनसांख्यिकीय तस्वीर पूरी तरह से पलटने वाली है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की प्रामाणिक रिपोर्ट के विधिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2050 तक भारत में 60 वर्ष से अधिक आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों की कुल आबादी बढ़कर लगभग 34.7 करोड़ तक पहुँच जाएगी। इसका सीधा और स्पष्ट तात्पर्य यह है कि देश का हर पांचवां निवासी वरिष्ठ नागरिक होगा। वर्तमान में यह संख्या लगभग 15 करोड़ के आसपास दर्ज की जाती है। यह केवल एक साधारण आबादी का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत के सामाजिक ताने-बाने, हमारी अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं, आवास नीति और पारंपरिक पारिवारिक संरचना में आने वाले बहुत बड़े उथल-पुथल का पूर्व-संकेत है।

चिकित्सा विज्ञान में हुए क्रांतिकारी सुधारों के कारण लोग पहले की तुलना में कहीं अधिक लंबा जीवन जी रहे हैं, लेकिन यहाँ सबसे यक्ष सवाल यह है कि क्या वे यह लंबा जीवन पूरी तरह से स्वस्थ, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक तरीके से जी पाएंगे? इसी गंभीर मानवीय चुनौती के वैज्ञानिक और नीतिगत समाधान ढूँढ़ने की दिशा में सुप्रसिद्ध संस्था हेल्पएज इंडिया ने नई दिल्ली में ‘इंस्टीट्यूट फॉर लॉन्गेविटी एंड एजिंग रिसर्च’ (ILAR) की स्थापना की है। गत 22 जुलाई 2026 को इस राष्ट्रीय संस्थान का औपचारिक उद्घाटन नीति आयोग के पूर्व सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. विनोद कुमार पॉल द्वारा किया गया। उद्घाटन अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत को अपनी बढ़ती वृद्धावस्था की आबादी के लिए अपना एक विशिष्ट और संप्रभु मॉडल विकसित करना होगा, जिसमें हमारी प्राचीन भारतीय पारिवारिक परंपराओं, सामुदायिक सहयोग की ताक़त और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का एक संतुलित और पारदर्शी समावेश हो।

भारत में औसत जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) लगातार बढ़ रही है, परंतु चिंताजनक बात यह है कि वास्तव में ‘स्वस्थ जीवन’ (Healthy Life Span) की अवधि अब भी बेहद सीमित बनी हुई है। देश के करोड़ों बुजुर्ग मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप (Hypertension), हृदय रोग, जोड़ों के दर्द, गठिया, डिमेंशिया और मानसिक अवसाद जैसी गंभीर स्वास्थ्य संबंधी विसंगतियों से लगातार जूझ रहे हैं। दूसरी ओर, भारत की पारम्परिक संयुक्त परिवार प्रणाली का तेजी से विघटन हो रहा है। रोज़गार और बेहतर अवसरों की तलाश में युवाओं का बड़े महानगरों की ओर अनियंत्रित पलायन हो रहा है, जिससे गांवों और छोटे शहरों में पीछे छूटे बुजुर्गों का जीवन अत्यधिक कष्टकारी और असुरक्षित होता जा रहा है। इसमें भी वृद्ध महिलाओं की स्थिति और अधिक संवेदनशील व दयनीय है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की अधिक जीवन प्रत्याशा के कारण उनके विधवा होने की संभावना कहीं अधिक रहती है, और आर्थिक निर्भरता उन्हें समाज में अतिरिक्त असुरक्षा और उपेक्षा की ओर धकेल देती है।

हालाँकि, इस बदलती सामाजिक तस्वीर का एक अत्यंत संभावनाशील और सकारात्मक आर्थिक पहलू भी मौजूद है। देश में तेज़ी से बढ़ रही वरिष्ठ नागरिकों की यह बड़ी आबादी ‘सिल्वर इकोनॉमी’ (Silver Economy) के रूप में भारत के लिए एक नया और विशाल आर्थिक अवसर लेकर आ रही है। वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं, विशिष्ट दवाइयां, सहायक तकनीकें, उनके लिए सुगम व सुरक्षित रेजिडेंशियल एस्टेट, बीमा उत्पाद और पेंशन-वित्तीय सेवाओं जैसे विशाल क्षेत्रों में अभूतपूर्व व्यावसायिक और रोजगार की संभावनाएं उभर रही हैं। लेकिन इस ‘सिल्वर इकोनॉमी’ का वास्तविक लाभ देश को तभी मिल पाएगा, जब हमारी सरकारें और नीति-निर्माता समय रहते इसके अनुकूल कड़े कानूनी और ढांचागत नियम तैयार करेंगे।

इसी व्यापक और दूरदर्शी सोच के साथ ILAR को केवल एक शोध संस्थान तक सीमित न रखकर नीति निर्माण, वैज्ञानिक अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और व्यावहारिक समाधान प्रदान करने वाला एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र बनाया गया है। संस्थान के निदेशक प्रो. अनिल कुमार इंदिरा कृष्णन का इस पर बहुत ही स्पष्ट रूप से कहना है कि केवल जीवन के वर्षों में संख्या बढ़ा देना लंबी उम्र का असली मकसद नहीं है, बल्कि उन बढ़ते वर्षों में बेहतर स्वास्थ्य, सामाजिक सम्मान, सुरक्षा और आत्मीय खुशहाली जोड़ना असली प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका मानना है कि हमारे देश की भावी नीतियां और कानून तभी पूरी तरह से प्रभावी हो सकेंगे, जब उनके निर्माण के केंद्र में स्वयं वरिष्ठ नागरिकों के जीवन के वास्तविक अनुभव और उनकी बुनियादी ज़रूरतें रखी जाएँगी।

यह नया शोध संस्थान भारत में स्वस्थ वृद्धावस्था, सिल्वर इकोनॉमी के विस्तार, वरिष्ठ नागरिकों के विधिक अधिकारों की रक्षा, उम्र-अनुकूल आधुनिक तकनीकों के विकास और वृद्धावस्था से जुड़ी जटिल सामाजिक-आर्थिक विषमताओं पर व्यापक स्तर पर शोध करेगा। इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), टेलीमेडिसिन, रिमोट मॉनिटरिंग और स्मार्ट डिजिटल उपकरणों के बेहतर इस्तेमाल से लेकर बुजुर्गों के अकेलेपन को दूर करने, उनकी सामुदायिक देखभाल और अंतर-पीढ़ीगत सहयोग जैसे विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष ‘स्टेट ऑफ एजिंग इन इंडिया’ की प्रामाणिक रिपोर्ट प्रकाशित करने, एक समर्पित ‘सिल्वर टेक इनोवेशन लैब’ स्थापित करने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य वेधशाला विकसित करने और युवाओं को इस क्षेत्र में प्रेरित करने के लिए विशेष फेलोशिप कार्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई गई है।

हेल्पएज इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहित प्रसाद का मानना है कि आने वाले दो दशकों के भीतर वृद्धावस्था का यह प्रबंधन भारत के सामने सबसे बड़ी सामाजिक और प्रशासनिक परीक्षा बनने जा रहा है। उनका साफ कहना है कि इस विकराल चुनौती से निपटने के लिए केवल सरकारी नीतियां या बजट पर्याप्त नहीं होंगे। देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, निजी उद्योग जगत, कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कोष और नागरिक समाज को एक साथ मिलकर एक मंच पर काम करना होगा। बिना प्रामाणिक साक्ष्यों के आधार पर बनी नीतियों और स्वास्थ्य क्षेत्र में पर्याप्त पूंजीगत निवेश के बिना इस भविष्यी संकट का सामना करना लगभग नामुमकिन होगा।

हेल्पएज इंडिया स्वयं इस क्षेत्र में कोई नई संस्था नहीं है। वर्ष 1978 से यह संगठन देश भर में वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य, आजीविका, कानूनी अधिकारों के संरक्षण, मोतियाबिंद ऑपरेशनों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों में निरन्तर संलग्न रहा है। अपने पिछले लगभग पाँच दशकों के बेदाग और समर्पित काम के लिए इस संस्था को संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार और भारत सरकार के प्रतिष्ठित ‘वयोश्रेष्ठ सम्मान’ सहित कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। ILAR की स्थापना उसी लंबे अनुभव और विषय विशेषज्ञता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक अगला पड़ाव है।

अब वह समय आ गया है जब भारतीय समाज और हमारी प्रशासनिक व्यवस्था बुजुर्गों को केवल एक ‘सामाजिक और आर्थिक बोझ’ के रूप में देखने की अपनी पुरानी मानसिकता को पूरी तरह से बदले। हमारे वरिष्ठ नागरिक समाज के लिए बोझ नहीं, बल्कि अमूल्य जीवन अनुभव, अपार ज्ञान और सामाजिक पूंजी के सबसे बड़े स्रोत हैं। उनके लिए देश भर में उम्र-अनुकूल सुगम शहर (Age-Friendly Cities), बेहतर सार्वजनिक परिवहन, स्थानीय स्तर पर सामुदायिक देखभाल केंद्र, मजबूत और सार्वभौमिक पेंशन व्यवस्था, व्यापक स्वास्थ्य बीमा कवरेज, डिजिटल साक्षरता अभियान और ऐसी बहु-पीढ़ीगत पहलें विकसित करनी होंगी, जिससे युवा और बुजुर्ग एक-दूसरे के ज्ञान व ऊर्जा का आदान-प्रदान कर सकें।

वर्ष 2050 का भारत कैसा होगा, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि हम आज वर्ष 2026 में क्या और कैसे फैसले लेते हैं। यदि समय रहते दूरदर्शी नीतियां बनाई गईं और प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे में पर्याप्त निवेश किया गया, तो भारत केवल अधिक उम्र वाले लोगों का बेबस देश नहीं बनेगा, बल्कि एक ऐसा सशक्त और समावेशी समाज बनेगा जहाँ हमारे बुजुर्ग पूरी तरह से स्वस्थ, सक्रिय, आत्मनिर्भर और गरिमापूर्ण जीवन जी सकेंगे। दुनिया के किसी भी सभ्य और विकसित समाज की असली पहचान इस बात से तय होती है कि वह अपने वरिष्ठ नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है। ILAR ने इस दिशा में एक बेहतरीन और क्रांतिकारी शुरुआत कर दी है। अब आवश्यकता इस बात की है कि केंद्र व राज्य सरकारें, निजी क्षेत्र और आम नागरिक समाज मिलकर इसे एक राष्ट्रीय जनआंदोलन का रूप दें, ताकि बढ़ती उम्र भारत के लिए कोई लाचार चुनौती नहीं, बल्कि हमारी नई राष्ट्रीय ताक़त बन सके। सच से आंखें चुराना अब पूरी तरह बंद होना चाहिए।

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Pawan Singh

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News

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