Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Friday, 24 July, 2026, 07:38:49 PM IST.

tajnews.in | आगरा: हज़रत सैय्यदना शाह अमीर अबुल उला (रह.) के 387वें उर्स मुबारक के अवसर पर शुक्रवार को मज़ार शरीफ पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गुस्ल, संदलमाली और चादरपोशी की रस्में अदा की गईं। इस अवसर पर देश में अमन, भाईचारे, एकता और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई।

मज़ार शरीफ का गुस्ल सज्जादानशीन एवं मुतवल्ली हज़रत सैय्यद मोहतशिम अली अबुल उलाई ने परंपरा के अनुसार कराया। इस दौरान नायब सज्जादगान सैय्यद विरासत अली अबुल उलाई, सैय्यद इशाअत अली अबुल उलाई और सैय्यद कैफ अली अबुल उलाई भी उपस्थित रहे।

उर्स में हैदराबाद से ज़ाकिर अली दानिश, सूफी ज़ुबेर मियां, मौलाना निज़ाम उद्दीन हारूनी चिश्ती तथा अजमेर से मौलाना सैय्यद अमीन मियां सहित सैय्यद इकबाल अली, सैय्यद अरीब अली, सैय्यद आसिम अली, सैय्यद शहाब अली, सैय्यद अज़हर अली और हाजी नौशाद शफीक इरशाद ने भी मज़ार शरीफ पर संदल और चादर पेश की। सभी ने देश में शांति, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे के लिए दुआ की।

सज्जादानशीन सैय्यद मोहतशिम अली अबुल उलाई ने बताया कि हज़रत सैय्यदना शाह अमीर अबुल उला (रह.) के दादा हज़रत ख्वाजा अमीर अब्दुल सलाम (रह.) मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में अपने परिवार के साथ समरकंद से हिंदुस्तान आए थे। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान ईश्वरीय आदेश के अनुसार उन्होंने दिल्ली के निकट स्थित कस्बा नरेला में कुछ समय विश्राम किया था।

उन्होंने बताया कि इसी कस्बे में इस्लामी हिजरी 990 में हज़रत सैय्यदना शाह अमीर अबुल उला (रह.) का जन्म हुआ। उनके जीवन, शिक्षाओं और आध्यात्मिक परंपरा को आज भी बड़ी संख्या में अनुयायी श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण करते हैं।



उर्स के अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने मज़ार शरीफ पहुंचकर हाज़िरी दी और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। कार्यक्रम का समापन देश और समाज में सुख-शांति, सद्भाव तथा भाईचारे की दुआ के साथ हुआ।


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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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