प्राचीन युगल किशोर मंदिर की उपेक्षा पर सेवायतों में आक्रोश: एएसआई के खिलाफ लामबंद हुई देवालय समिति, आगरा मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् को सौंपेंगे ज्ञापन

खबर शेयर कीजिए

Vrindavan Desk, 🌐 tajnews.in | Wednesday, 15 July, 2026, 01:25:10 PM IST.

Taj News Logo
Taj News
Vrindavan Desk

tajnews.in | वृंदावन: ब्रज वृन्दावन देवालय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक पण्डा वाला कुंज में आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न प्रमुख मंदिरों और देवालयों के सेवायतों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बैठक में केशीघाट स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित प्राचीन एवं ऐतिहासिक श्री युगल किशोर मंदिर के खराब रख-रखाव और उपेक्षा को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। सेवायतों ने मंदिर के समुचित संरक्षण, नियमित साफ-सफाई और श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है। इस दौरान निर्णय लिया गया कि इन सभी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, आगरा मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा।

HIGHLIGHTS
  1. धरोहर बचाने की मुहिम: ब्रज वृन्दावन देवालय समिति की बैठक में ऐतिहासिक युगल किशोर मंदिर के संरक्षण का मुद्दा गरमाया।
  2. ताले में बंद भगवान: अधिकांश समय मुख्य द्वार बंद रहने से देश-विदेश के श्रद्धालु, शोधार्थी और पर्यटक दर्शन से रह जाते हैं वंचित।
  3. चटक रहे पत्थर: मंदिर के शिखर पर उग रहे पौधे और परिसर में पसरी गंदगी पर सेवायतों ने पुरातत्व विभाग को घेरा।
  4. बायलॉज लागू करने की मांग: अनियोजित निर्माण और अतिक्रमण रोकने के लिए स्मारक के चारों तरफ हेरिटेज बायलॉज बनाने की उठी मांग।

बैठक को संबोधित करते हुए बड़े दाऊजी मंदिर के सेवायत दीपक गोस्वामी ने कहा कि एएसआई द्वारा संरक्षित होने के बावजूद यह ऐतिहासिक मंदिर पर्याप्त देखरेख के अभाव में बदहाली के आंसू रो रहा है। वहीं, बांके बिहारी मंदिर के सेवायत गोपेश गोस्वामी ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि मंदिर का मुख्य द्वार ज्यादातर समय बंद ही रहता है, जिसकी वजह से दूर-दराज से आने वाले पर्यटक और शोधार्थी इस अमूल्य धरोहर का अवलोकन नहीं कर पाते हैं। इस समस्या पर बरसाने के ऊंचा गाँव के ललितापीठाधीश्वर गोस्वामी कृष्णानंद भट्ट ने सुझाव दिया कि पुरातत्व विभाग को मंदिर को रोजाना कम से कम चार घंटे के लिए आम जनता के लिए खोलना चाहिए और इसकी देखरेख के लिए एक स्थायी कर्मचारी की नियुक्ति तुरंत करनी चाहिए।

धरोहर की गरिमा पर बात करते हुए बिहारी जी मंदिर के देव गोस्वामी ने कहा कि मंदिर परिसर और उसके आसपास नियमित सफाई न होने से चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा रहता है, जो बेहद चिंताजनक है। यमुना मंदिर के सेवायत ब्रजेश शुक्ला ने तकनीकी खामियों को उजागर करते हुए बताया कि देखरेख न होने से प्राचीन पत्थर चटक रहे हैं और मंदिर के शिखर पर जंगली पौधे उग आए हैं, जिससे ढांचे को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। विभाग को इसका तुरंत संज्ञान लेना होगा। इसी क्रम में खादिर वन स्थित गोपीनाथ मंदिर के हरिश्चंद्र गोस्वामी ने मांग की कि इस ऐतिहासिक स्मारक के चारों ओर शीघ्र हेरिटेज बायलॉज लागू किया जाए, ताकि अनियोजित निर्माण और अवैध अतिक्रमण पर पूरी तरह से प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

संगठन के अध्यक्ष आलोक कृष्ण गोस्वामी ने बैठक के अंत में स्पष्ट किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को इस सांस्कृतिक धरोहर के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखने हेतु कदम उठाने होंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक को पिसावा वन बिहारी मंदिर के सेवायत भगवत जोशी, काम्यवन के गोपीनाथ मंदिर के सेवायत मनीष गोस्वामी, गदाधर दंत समाधि के सेवायत अनुज शर्मा और राधा रमण मंदिर के सेवायत बलराम गोस्वामी ने भी संबोधित कर अपना समर्थन दिया। बैठक का सफल संचालन जगन्नाथ पोद्दार ने किया और सभी का धन्यवाद जयदेव दास ने ज्ञापित किया।

यह भी पढ़ें

इतिहास का वो अद्भुत स्वाद: कैसे चाट, गोल गप्पे बने भारत की सबसे लोकतांत्रिक डिश | बृज खंडेलवाल पासपोर्ट है, नागरिकता नहीं! भारतीय पहचान का नया गणित | वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल का प्रहार काफी हुआ है, बहुत बाकी है! चमकते एक्सप्रेसवे, जर्जर इंसाफ़: क्या सिर्फ़ सड़कें विकसित होने से देश विकसित होता है? | बृज खंडेलवाल सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने को मौलिक अधिकार बनाया, अब परीक्षा आगरा की है | बृज खंडेलवाल का विशेष विश्लेषण “जनता मालिक, प्रतिनिधि सेवक: लोकतंत्र में वास्तविक VIP कौन?” | डॉ प्रमोद कुमार का विशेष विश्लेषण
Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Chief Editor, Taj News


खबर शेयर कीजिए

Leave a Comment