uttar pradesh desk, 🌐 tajnews.in | Saturday, 04 July, 2026, 05:21:40 PM IST.

tajnews.in | अयोध्या: राम जन्मभूमि परिसर में श्रद्धालुओं के आस्था रूपी चढ़ावे (रामधन) की चोरी के मामले में एक ऐसा अत्यंत संवेदनशील और सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों से लेकर वैश्विक स्तर पर फैले करोड़ों रामभक्तों को गहरे अचंभे में डाल दिया है। उच्च पदस्थ सूत्रों और आंतरिक रिपोर्टों के हवाले से यह बात सामने आ रही है कि राम मंदिर में असली और इतिहास की सबसे बड़ी डकैती महाकुंभ की अवधि के दौरान डाली गई थी। उस समय संपूर्ण अयोध्या नगरी में करोड़ों श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ा हुआ था और रामलला के दरबार में बेहिसाब मात्रा में सोना, चांदी और नगदी का चढ़ावा आ रहा था। सुरक्षा और प्रबंधन की इसी भारी भीड़ तथा तात्कालिक अव्यवस्था का नाजायज फायदा उठाकर शातिर ताकतों ने इस महाघोटाले को अंजाम दिया, जिसकी आंच अब मंदिर के शीर्ष प्रबंधन तक पहुँचने लगी है।
धार्मिक नगरी में सामने आए इस अभूतपूर्व घटनाक्रम ने प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। दावों के अनुसार, महाकुंभ के पावन अवसर पर जब रामलला के मुख्य गर्भगृह और दानपात्रों में चढ़ावे की मात्रा अचानक कई गुना बढ़ गई, तो मंदिर की नियमित व्यवस्था चरमराने लगी थी। इस भारी भरकम कैश को समय पर गिनने और प्रबंधित करने के उद्देश्य से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की विशेष सिफारिश पर आनंद-फानन में एक अतिरिक्त (एक्स्ट्रा) स्टाफ की तैनाती की गई थी। परंतु, यही आपातकालीन कदम सबसे बड़ा सुरक्षा लूपहोल साबित हुआ। चौंकाने वाली आंतरिक रिपोर्ट बताती है कि करोड़ों रुपये की रोजाना गिनती के लिए लगाए गए इस नए अमले में शामिल कई लोग बैंकिंग, फाइनेंस या कैश काउंटिंग जैसी विधाओं से दूर-दूर तक वास्ता नहीं रखते थे।
जांच के दायरे में आई सूचनाओं के अनुसार, इस संवेदनशील कार्य में शामिल किए गए कुछ कर्मचारी पूर्व में हाउसकीपिंग, साफ-सफाई और अन्य चतुर्थ श्रेणी के दैनिक कार्यों में संलिप्त थे। जिन्हें वित्तीय लेन-देन या बड़ी नकदी के मिलान का कोई व्यावहारिक और व्यावसायिक अनुभव नहीं था। इस बेहद लचर प्रबंधन के सामने आने के बाद, मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और स्टाफ के पुलिस वेरिफिकेशन का जिम्मा संभालने वाली अधिकृत एजेंसी ने भी अपना पल्ला झाड़ते हुए एक बड़ा और चौंकाने वाला पक्ष सामने रखा है। एजेंसी के आला अधिकारियों का दबी जुबान में कहना है कि उन्हें पारदर्शी नियमों के तहत और अपनी मर्जी से योग्य उम्मीदवारों को चुनने की प्रशासनिक आजादी नहीं दी गई थी।
संबंधित सुरक्षा एजेंसी का स्पष्ट दावा है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों और प्रबंधन की ओर से जो नाम सीधे तौर पर भेजे गए थे, एजेंसी ने केवल उनके पहचान पत्रों का एक बुनियादी (बेसिक) वेरिफिकेशन किया। इसके तुरंत बाद उन्हें बिना किसी गहन पृष्ठभूमि जांच या वित्तीय प्रशिक्षण के सीधे करोड़ों रुपये के संवेदनशील कैश को गिनने के काम पर लगा दिया गया। इस प्रकार के गैर-पेशेवर दृष्टिकोण का परिणाम यह हुआ कि महाकुंभ की गहमागहमी, भीड़ के कारण उत्पन्न हुई आंतरिक अव्यवस्था और अप्रशिक्षित स्टाफ की कमजोरियों का फायदा उठाकर शातिर ताकतों ने राम मंदिर के इतिहास की सबसे बड़ी वित्तीय सेंधमारी को अंजाम दे दिया।
इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर रही विभिन्न वित्तीय और खुफिया एजेंसियों को यह प्रबल अंदेशा है कि देश-विदेश से आने वाले सनातन धर्मावलंबियों द्वारा अपनी गाढ़ी कमाई से पूरी श्रद्धा के साथ चढ़ाया गया करोड़ों रुपये का रामधन कभी मुख्य बैंक खातों तक पहुँचा ही नहीं। इस अकूत धनराशि को काउंटिंग रूम से लेकर बैंक के चेस्ट तक पहुँचने के बीच के रास्ते में ही बड़ी चतुराई से गायब कर दिया गया। महाकुंभ के दौरान गायब हुए इस चढ़ावे की मात्रा इतनी बड़ी है कि इसके आकलन के लिए ऑडिट टीमों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस महाखुलासे के बाद से जहां एक ओर श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं, वहीं दूसरी ओर राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन, आंतरिक ऑडिट सिस्टम और पारदर्शिता के दावों पर चौतरफा तीखे हमले तेज हो गए हैं।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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