बरेली: विश्वास का कत्ल! करोड़ों की जायदाद के लिए ‘कलयुगी बेटे’ ने घोंटा बुजुर्ग मां का गला, कार में ही वारदात को दिया अंजाम

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Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Wednesday, May 6, 2026, 04:45:10 PM IST

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Uttar Pradesh Desk | Bareilly Crime Investigation

बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में रिश्तों को तार-तार कर देने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक मुंहबोले बेटे ने ममता और विश्वास की मर्यादाओं को लांघते हुए जायदाद के लालच में अपनी ‘मां’ समान वृद्धा की कार के भीतर ही निर्मम हत्या कर दी। मामला सुभाषनगर इलाके का है, जहाँ एक फर्जी ‘पीसीएस अधिकारी’ बनकर परिवार का भरोसा जीतने वाले संविदा कर्मी ने 80 बीघा जमीन के लिए इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, लेकिन इस घटना ने समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

📍 वारदात का सार: लालच और फरेब की खौफनाक दास्तान

सेवानिवृत्त दरोगा गजराज सिंह की पत्नी शारदा यादव की हत्या ने पूरे जिले को स्तब्ध कर दिया है। आरोपी वरुण पाराशरी, जो खुद को नगर निगम का कर निरीक्षक बताता था, ने महज एक शब्द ‘लालची’ कहे जाने पर अपना आपा खो दिया और कार के भीतर ही वृद्धा का गला घोंट दिया। हत्या से पहले आरोपी ने धोखे से मृतका के अंगूठे के निशान भी लिए, जो इस बात का प्रमाण है कि पूरी वारदात केवल और केवल करोड़ों की संपत्ति हड़पने के लिए की गई थी।

क्राइम डायरी: मुख्य बिंदु
  • भरोसे का कत्ल: संविदा कर्मी वरुण पाराशरी ने फर्जी पीसीएस अधिकारी बनकर परिवार में पैठ बनाई थी।
  • मंदिर के बहाने मौत का सफर: 2 मई को दर्शन के बहाने वृद्धा को कार में बैठाया और रास्ते में वारदात की।
  • 80 बीघा जमीन का लालच: वृद्धा के नाम करोड़ों की खेती की जमीन और स्कूल हड़पने की थी साजिश।
  • स्याही का रहस्य: पोस्टमॉर्टम के दौरान मृतका के अंगूठे पर लगी स्याही ने साजिश की पोल खोल दी।
  • पीलीभीत में बरामदगी: रात भर कार में शव लेकर घूमने के बाद पड़ोसी जिले की झाड़ियों में लाश फेंकी।

फर्जी रौब और ममता का आंचल: कैसे रचा गया फरेब का जाल?

बरेली के सुभाषनगर निवासी सेवानिवृत्त दरोगा गजराज सिंह का परिवार एक प्रतिष्ठित जीवन जी रहा था। करीब एक साल पहले हाउस टैक्स कम कराने के सिलसिले में उनकी मुलाकात वरुण पाराशरी से हुई। शातिर वरुण ने खुद को नगर निगम का पीसीएस अधिकारी और भविष्य का आईएएस बताकर परिवार को अपने प्रभाव में ले लिया। शारदा यादव ने उसे अपना चौथा बेटा माना और उस पर अटूट विश्वास करने लगीं। वरुण अक्सर उनके घर आता-जाता और ‘मां’ कहकर उनकी सेवा का नाटक करता, जबकि उसकी नजर परिवार की 80 बीघा जमीन और स्कूल पर टिकी थी।

2 मई की वह काली दोपहर: कार बनी ‘डेथ चैंबर’

पुलिस तफ्तीश में सामने आया कि 2 मई को वरुण ने एक सोची-समझी योजना के तहत शारदा यादव को फोन किया और उन्हें मंदिर चलने के लिए तैयार किया। बुजुर्ग महिला पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ उसके साथ कार में बैठ गईं। मंदिर के रास्ते में वरुण ने अपनी असली नीयत दिखाई और जमीन अपने नाम करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जब शारदा यादव ने उसे लालची कहते हुए साफ इनकार कर दिया, तो वरुण के भीतर छिपा दरिंदा जाग गया। उसने कार में रखे औजार (पाने) से उनके सिर पर प्रहार किया और फिर उनका मुंह व नाक बंद कर गला घोंट दिया। ममता की चीख कार के शीशों के बाहर नहीं जा सकी।

शव लेकर रात भर भटकता रहा आरोपी

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी वरुण घबराया नहीं, बल्कि शातिर अपराधी की तरह साक्ष्य मिटाने में जुट गया। वह रात भर मृतका के शव को कार की पिछली सीट पर रखकर सड़कों पर घूमता रहा। अगले दिन यानी 3 मई की सुबह उसने मौका पाकर पीलीभीत जिले के जहानाबाद इलाके में कुकरी गांव के पास झाड़ियों में शव को फेंक दिया। उसने सोचा था कि वह बच निकलेगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

पोस्टमॉर्टम हाउस पर खुला ‘स्याही’ का राज

इस हत्याकांड का सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पोस्टमॉर्टम के दौरान परिजनों ने शव के दाहिने हाथ के अंगूठे पर नीली स्याही के निशान देखे। परिजनों को पहले से ही शक था कि वरुण ने हत्या से पहले किसी कागज़ पर वृद्धा के अंगूठे के निशान लिए हैं। पुलिस की गहन पूछताछ में आरोपी ने यह स्वीकार किया कि उसने हत्या से पहले जायदाद से जुड़े दस्तावेजों पर अंगूठा लगवाया था। पुलिस ने वरुण के घर से वारदात के समय पहने खून से सने कपड़े और मृतका की सोने की चेन भी बरामद कर ली है।

कानून का शिकंजा और पुलिस का दावा

बरेली के एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस अब इस मामले में वरुण के पिता संजय पाराशरी की भूमिका की भी जांच कर रही है, क्योंकि तफ्तीश में सामने आया है कि पिता और पुत्र दोनों ही इस जायदाद को हड़पने की योजना में शामिल थे। सुभाषनगर थाना पुलिस ने सभी साक्ष्यों को मजबूती से संकलित किया है ताकि आरोपी को न्यायालय से सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।

बरेली की यह घटना समाज में बढ़ते भौतिकवाद और गिरते नैतिक मूल्यों का परिणाम है। किसी अजनबी पर अति-विश्वास और संपत्ति का लालच किस कदर जानलेवा हो सकता है, यह वारदात उसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। ‘ताज न्यूज़’ परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करता है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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