Uttar Pradesh Desk, Taj News | Monday, April 27, 2026, 08:15:30 PM IST

मैनपुरी: भारतीय शादियां अपनी भव्यता, रस्मों-रिवाजों और हंसी-मजाक के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती हैं। शादी समारोह में दोनों पक्षों के बीच ‘नेगचार’ (शगुन) को लेकर होने वाली मीठी नोकझोंक एक बहुत ही आम और पुरानी परंपरा है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में यही मीठी नोकझोंक अचानक एक भयानक खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, मैनपुरी के घिरोर कस्बे में रविवार रात एक शादी समारोह के दौरान दूल्हे को रथ से उतारने के एवज में महज 100 रुपये का नेग (शगुन) दिए जाने की बात पर दोनों पक्षों का ईगो (अहंकार) इस कदर टकराया कि विवाह स्थल कुछ ही पलों में जंग के मैदान में बदल गया। घरातियों और बरातियों के बीच जमकर लाठी-डंडे चले और भारी पथराव हुआ। इस हिंसक झड़प में लड़की के चाचा सहित लड़के पक्ष के कई लोग गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए। बरात में भगदड़ मच गई और जो मेहमान कुछ देर पहले डीजे पर नाच रहे थे, वे अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को तत्काल मौके पर बुलाना पड़ा। आइए, महज 100 रुपये के लिए हुए इस भयानक बवाल, पुलिस की कार्रवाई और अंततः हुए समझौते का बहुत ही गहराई से विश्लेषण करते हैं।
हंस रथ पर सवार दूल्हा और नेग की मीठी तकरार
इस पूरी अप्रत्याशित और हिंसक घटना की शुरुआत रविवार की शाम को बहुत ही उल्लास भरे माहौल में हुई थी। मैनपुरी जिले के थाना दन्नाहार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव नगला गुलाल की रहने वाली एक युवती की शादी घिरोर कस्बे में स्थित एक भव्य मैरिज होम (Marriage Home) में तय हुई थी। शाम के समय बरनाहल थाना क्षेत्र के गांव मढ़ामई से बरात पूरे गाजे-बाजे और शानौ-शौकत के साथ विवाह स्थल पर पहुंची। दूल्हा एक बेहद ही आकर्षक ‘हंस रथ’ (Hans Rath) पर सवार था। बरातियों का उत्साह चरम पर था और वे गोल चक्कर से लेकर मैरिज होम तक बैंड-बाजे की धुनों पर जमकर नाच रहे थे।
घराती भी दरवाजे पर बरात का स्वागत करने के लिए पूरी तरह से तैयार खड़े थे। हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार, जब दूल्हा विवाह स्थल के दरवाजे पर पहुंचता है, तो दुल्हन पक्ष की महिलाएं या रिश्तेदार उसे रथ या घोड़ी से नीचे उतारने के लिए एक पारंपरिक ‘नेग’ (Neg) या शगुन की मांग करते हैं। यह रस्म पूरी तरह से हंसी-मजाक और दोनों परिवारों के बीच प्यार बढ़ाने के लिए बनाई गई है। जब दूल्हे को रथ से नीचे उतारने की बारी आई, तो दरवाजे पर मौजूद दुल्हन पक्ष के लोगों ने अपना नेग मांगा। इसी दौरान लड़के पक्ष की ओर से किसी व्यक्ति ने यह कह दिया कि नेग के रूप में केवल 100 रुपये ही दिए जाएंगे।
अहंकार का टकराव और लाठी-डंडों से खूनी संघर्ष
लड़के पक्ष द्वारा केवल 100 रुपये का नेग दिए जाने की बात लड़की पक्ष के कुछ लोगों को नागवार गुजरी। उन्हें लगा कि यह उनके सम्मान और प्रतिष्ठा के खिलाफ है। उन्होंने इस बात पर अपनी आपत्ति जताई। वहीं लड़के पक्ष के लोगों ने भी अपने अहंकार (Ego) को आगे रखते हुए बात को वापस लेने से इनकार कर दिया। देखते ही देखते हंसी-मजाक का वह खुशनुमा माहौल तीखी नोकझोंक और गाली-गलौज में तब्दील हो गया। बात इतनी बिगड़ गई कि दोनों तरफ के युवा और गर्म खून वाले मेहमान आमने-सामने आ गए।
कुछ ही पलों में विवाद ने एक बेहद हिंसक और खौफनाक रूप धारण कर लिया। मैरिज होम के बाहर खड़े दोनों पक्षों के लोगों ने एक-दूसरे पर हमला बोल दिया। जो लोग कुछ देर पहले एक-दूसरे को गले लगाकर स्वागत कर रहे थे, वे अब एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन बैठे। आसपास पड़े लाठी और डंडों से जमकर मारपीट शुरू हो गई। बात सिर्फ लाठी-डंडों तक ही नहीं रुकी, बल्कि किसी ने मैरिज होम के बाहर से ईंट और पत्थर फेंकने भी शुरू कर दिए। अचानक हुए इस भारी पथराव से विवाह समारोह में भयंकर भगदड़ मच गई। महिलाएं, बच्चे और अन्य शांतिप्रिय मेहमान अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर सुरक्षित ठिकाने तलाशने लगे। पूरा मैरिज होम चीख-पुकार और दहशत के साये में डूब गया।
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पुलिस की एंट्री और लहूलुहान घायलों का इलाज
इस भयानक मारपीट और पथराव के कारण मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। लाठियां और ईंटें लगने से लड़की पक्ष की ओर से उनके चाचा गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों से खून बहने लगा। वहीं दूसरी ओर, लड़के पक्ष के भी कई बरातियों को इस खूनी संघर्ष में गहरी चोटें आईं। किसी ने तत्काल इस भारी बवाल की सूचना स्थानीय घिरोर थाना पुलिस को दे दी। सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल सायरन बजाते हुए मैरिज होम पहुंच गया।
पुलिस के पहुंचते ही उपद्रवी तत्व वहां से खिसकने लगे। पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए स्थिति को तुरंत अपने नियंत्रण में लिया और भीड़ को तितर-बितर किया। सबसे पहले पुलिस ने प्राथमिकता दिखाते हुए दोनों पक्षों के सभी लहूलुहान घायलों को इलाज के लिए एंबुलेंस के जरिए सीधे सैफई स्थित पीजीआई (PGI) अस्पताल भेज दिया। इसके बाद पुलिस ने विवाह स्थल पर सुरक्षा घेरा बना लिया ताकि फिर से कोई अप्रिय घटना न घट सके। तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया। शुरुआत में लड़की पक्ष की ओर से थाने में मारपीट और बवाल की एक लिखित तहरीर (FIR Application) भी दे दी गई थी।
बुजुर्गों की मध्यस्थता और फिर से शुरू हुई शादी
अस्पताल में घायलों का प्राथमिक उपचार होने और थाने में मामला पहुंचने के बाद दोनों पक्षों का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ। इसके बाद दोनों परिवारों के समझदार और बुजुर्ग लोगों ने आपस में बातचीत करने का फैसला किया। उन्हें यह एहसास हुआ कि محض 100 रुपये के छोटे से नेग और झूठे अहंकार के चक्कर में वे अपनी आने वाली पीढ़ी की जिंदगी और शादी को बर्बाद कर रहे हैं। पुलिस की मौजूदगी में ही दोनों पक्षों के संभ्रांत लोगों ने बैठकर एक लंबी मध्यस्थता (Mediation) की।
काफी मान-मनौव्वल और अपनी-अपनी गलतियां स्वीकार करने के बाद अंततः दोनों परिवारों के बीच लिखित रूप से एक आपसी समझौता (Compromise) हो गया। लड़की पक्ष ने थाने में दी गई अपनी तहरीर वापस ले ली। इस समझौते के बाद आधी रात को पुलिस सुरक्षा के बीच फिर से शादी की रुकी हुई रस्में शुरू कराई गईं। भय और तनाव के माहौल के बीच दूल्हा-दुल्हन ने सात फेरे लिए और विवाह संपन्न हुआ। घिरोर के थानाध्यक्ष ने इस पूरी घटना पर आधिकारिक बयान देते हुए बताया कि चूँकि किसी भी पक्ष की ओर से अब कोई कानूनी कार्रवाई की मांग नहीं की गई है और दोनों ने आपसी रजामंदी से समझौता कर लिया है, इसलिए पुलिस ने कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
शादियों में दिखावा और अहंकार: एक गहरी सामाजिक चिंता
मैनपुरी की यह घटना केवल एक अकेली वारदात नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की वर्तमान मानसिकता पर एक बहुत बड़ा तमाचा है। शादियां दो दिलों और दो परिवारों का पवित्र मिलन होती हैं। लेकिन आज के दौर में शादियां अक्सर झूठी शान, दिखावे (Show-off) और अहंकार के टकराव का अखाड़ा बनती जा रही हैं। नेगचार और शगुन की परंपराएं जो कभी आपसी प्रेम और सद्भाव बढ़ाने के लिए बनाई गई थीं, वे अब व्यापारिक लेन-देन और प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई हैं।
समाजशास्त्रियों और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि जब तक हम अपनी इन पवित्र रस्मों को अहंकार से दूर नहीं रखेंगे, तब तक ऐसे खूनी संघर्ष होते रहेंगे। एक छोटी सी बात को लेकर लाठी-डंडे निकाल लेना समाज में बढ़ती हुई असहिष्णुता (Intolerance) को भी दर्शाता है। 100 रुपये की कीमत किसी की जान या किसी बेटी के भविष्य से बढ़कर कभी नहीं हो सकती। यह घटना उन सभी परिवारों के लिए एक बहुत बड़ा सबक है, जो शादी-समारोहों में छोटी-छोटी बातों को अपनी नाक का सवाल बना लेते हैं। समाज को अब यह गंभीरता से सोचना होगा कि हमें अपनी परंपराओं को प्यार से निभाना है या उन्हें विवाद और कोर्ट-कचहरी का कारण बनाना है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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