मोतीगंज पुरानी चुंगी मैदान को ‘क्रांति स्थल’ घोषित करने की मांग पर सीएम कार्यालय सख्त: नेताजी सुभाष चंद्र बोस और शहीद परशुराम की प्रतिमा लगाने पर डीएम से मांगी रिपोर्ट

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Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Thursday, 2 July 2026, 11:54:10 PM IST

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आगरा: शहर के हृदय स्थल मोतीगंज-दरेसी नंबर-दो स्थित ऐतिहासिक पुरानी चुंगी मैदान को आधिकारिक रूप से ‘क्रांति स्थल’ घोषित करने तथा वहां आजाद हिंद फौज के नायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अमर सेनानी शहीद परशुराम की भव्य प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की गूंज अब देश के सर्वोच्च राजनीतिक गलियारों से लेकर राज्य शासन के गलियारों तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने इस अत्यंत संवेदनशील और देशप्रेम से जुड़े ऐतिहासिक मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों के बाद आगरा के जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है और जिलाधिकारी से इस पूरे प्रकरण पर एक विस्तृत तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट तलब की गई है। शासन की कड़ाई को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने त्वरित विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसके अंतर्गत शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

HIGHLIGHTS
  1. ऐतिहासिक मांग: मोतीगंज दरेसी के पुरानी चुंगी मैदान को ‘क्रांति स्थल’ घोषित करने और प्रतिमाएं लगाने की कवायद हुई तेज।
  2. सीएम का हंटर: मुख्यमंत्री कार्यालय ने आगरा जिलाधिकारी को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण पर 3 जुलाई 2026 तक मांगी विस्तृत आख्या।
  3. बयान दर्ज: उप जिलाधिकारी के निर्देश पर तहसील कर्मियों ने दीवानी पहुंचकर वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा के बयान किए अंकित।
  4. गर्वशाली इतिहास: वर्ष 1940 में इसी मैदान से नेताजी ने किया था हुंकार और 1942 के आंदोलन में 17 वर्षीय क्रांतिकारी परशुराम हुए थे शहीद।

ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, इस पूरे मामले की नींव राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं प्रख्यात अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा द्वारा रखी गई थी। उन्होंने बीते 11 मई 2026 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आगरा की महापौर हेमलता दिवाकर को एक विस्तृत व साक्ष्यों से युक्त प्रार्थनापत्र भेजा था। इस पत्र में उन्होंने आगरा के मोतीगंज स्थित पुरानी चुंगी मैदान को उसके अद्वितीय और उपेक्षित स्वतंत्रता संग्राम कालीन महत्व के आधार पर एक राष्ट्रीय स्मारक यानी ‘क्रांति स्थल’ के रूप में पहचान देने की पुरजोर वकालत की थी।

प्रार्थनापत्र में ऐतिहासिक दस्तावेजों का प्रमाण देते हुए यह बड़ा दावा किया गया कि मोतीगंज का यह मैदान ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र और वैचारिक स्वतंत्रता आंदोलन का एक बहुत बड़ा केंद्र रहा है। दस्तावेजों के मुताबिक, वर्ष 1940 में आगरा के जांबाज क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के संकल्प को दोहराते हुए अपने खून से एक पत्र लिखकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ताजनगरी आमंत्रित किया था। इस आमंत्रण को स्वीकार कर नेताजी आगरा आए थे और इसी ऐतिहासिक पुरानी चुंगी मैदान में एक विशाल और अभूतपूर्व जनसभा को संबोधित किया था। इसी मैदान की पावन मिट्टी से नेताजी ने देशवासियों को “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का अमर और ऐतिहासिक नारा दिया था, जिसने आगरा और समूचे ब्रज क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र क्रांति की एक नई ज्वाला भड़का दी थी।

इतना ही नहीं, इतिहास के पन्नों को पलटते हुए अधिवक्ता ने यह भी साक्ष्य प्रस्तुत किया कि 10 अगस्त 1942 को जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने “अंग्रेजों भारत छोड़ो” और “करो या मरो” का देशव्यापी आह्वान किया था, तब आगरा के सभी प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों और नौजवानों ने इसी मैदान में एकत्रित होकर अंतिम सांस तक देश की आजादी के लिए लड़ने की शपथ ली थी। इसी दौरान देशभक्तों की बढ़ती भीड़ को तितर-बितर करने और आंदोलन को कुचलने के लिए क्रूर अंग्रेजी सेना द्वारा बर्बरतापूर्वक अंधाधुंध गोलीबारी की गई थी। इस ब्रिटिश दमन चक्र के दौरान देश की स्वतंत्रता की वेदी पर महज 17 वर्ष के एक अत्यंत प्रतिभावान नौजवान क्रांतिकारी परशुराम अपनी छाती पर गोली खाकर शहीद हो गए थे।

इस महत्वपूर्ण और गौरवशाली इतिहास से जुड़े प्रार्थनापत्र पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय (लखनऊ) ने बीते 12 जून 2026 को जिलाधिकारी आगरा को एक कड़ा शासकीय पत्र प्रेषित किया था। शासन द्वारा आगरा प्रशासन को निर्देश दिए गए थे कि इस पूरे मामले के सभी ऐतिहासिक पहलुओं और राजस्व अभिलेखों की गहन जांच कर 3 जुलाई 2026 तक हर हाल में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय से समय-सीमा तय होने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो उठा है।

जिलाधिकारी के सख्त आदेशों के अनुपालन में उप जिलाधिकारी (राजस्व एवं आपदा) के माध्यम से स्थानीय तहसील प्रशासन ने इस ऐतिहासिक दावे की विधिक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी क्रम में तहसील कार्यालय के अधिकृत प्रशासनिक कर्मचारी अंशुल कुमार ने आगरा दीवानी न्यायालय परिसर पहुंचकर वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा से मुलाकात की और उनका आधिकारिक बयान कलमबद्ध किया। इस दौरान अधिवक्ता ने मामले से जुड़े कई पुराने दस्तावेज और ऐतिहासिक साक्ष्य भी टीम के सुपुर्द किए। अब तहसील प्रशासन की इस आख्या के आधार पर जिलाधिकारी अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजेंगे, जिसके बाद ही यह तय होगा कि दशकों से उपेक्षित पड़े इस पुरानी चुंगी मैदान को राष्ट्रीय पटल पर उसका वास्तविक सम्मान और नेताजी सुभाष चंद्र बोस व शहीद परशुराम की प्रतिमाएं स्थापित करने की विधिक मंजूरी कब तक मिल पाती है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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