Sanjay Parate political article on Chhattisgarh anti conversion law, love jihad myth and minority rights

नागरिक परिक्रमा: छत्तीसगढ़ का नया धर्मांतरण कानून ‘लव जिहाद’ की आड़ में अल्पसंख्यकों पर सीधा प्रहार

आर्टिकल

Taj News Opinion Desk, Taj News | Tuesday, March 24, 2026, 07:11:41 PM IST

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Taj News Opinion Desk

नागरिक परिक्रमा: राजनैतिक टिप्पणियां
Sanjay Parate Writer
संजय पराते
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक
वरिष्ठ विश्लेषक संजय पराते ने अपनी ‘नागरिक परिक्रमा’ श्रृंखला में छत्तीसगढ़ के नए ‘धर्मांतरण-विरोधी कानून’ का कड़ा विश्लेषण किया है। उन्होंने बताया है कि कैसे यह कानून ‘लव जिहाद’ के झूठे प्रचार की आड़ में नागरिकों की स्वतंत्रता, निजता और अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला करता है। पढ़िए यह खास आलेख:

मुख्य बिंदु

  • छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस के वॉकआउट के बीच भाजपा सरकार ने धर्मांतरण-विरोधी कानून पारित करा लिया है।
  • इस कानून का असली मकसद ‘लव जिहाद’ की आड़ में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का दमन और ध्रुवीकरण करना है।
  • जब देश में 18 वर्ष के युवाओं को सरकार चुनने का अधिकार है, तो जीवनसाथी चुनने से रोकना एक ‘पोंगापंथी’ सोच है।
  • संसद में खुद गृह मंत्री अमित शाह का मंत्रालय मान चुका है कि देश में ‘लव जिहाद’ नाम की कोई चीज़ नहीं है।

छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार ने विधानसभा से एक नया धर्मांतरण विरोधी कानून पारित करा लिया है। दरअसल, कांग्रेस विधायकों के वॉकआउट के बाद सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है। इसलिए, अब यह विवादित बिल राज्यपाल की अंतिम मंजूरी के लिए उनके ऑफिस में है। राज्य सरकार का दावा है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर जबरन और अवैध धर्मांतरण हो रहा है। इसलिए, सरकार ने इस पर कड़ा रोक लगाने के उद्देश्य से यह कानून बनाया है। हालांकि, अगर सरकार का मकसद सिर्फ इतना ही होता, तो बात कुछ और थी। क्योंकि, वर्तमान कानूनों में भी इस अपराध की पूरी और पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। लेकिन, हाथी के दांत दिखाने के और खाने के हमेशा अलग-अलग होते हैं। दरअसल, इसके पीछे की असली बात कुछ और ही है。

सरकार हमारे भारतीय संविधान में निहित धार्मिक स्वतंत्रता के सभी मूल्यों को पूरी तरह निष्प्रभावी करना चाहती है। इसके अलावा, वह अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सीधा और निर्मम दमन करना चाहती है। नतीजतन, सरकार हमारे समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बहुत तेज़ करना चाहती है। यह कड़वी बात एक घटना से भी पूरी तरह साबित होती है। क्योंकि, विधानसभा में इस विधेयक को पारित करते हुए सभी भाजपा विधायक ‘जय श्रीराम’ का ज़ोरदार नारा लगाना बिल्कुल नहीं भूले। दरअसल, ‘राम-राम’ भारत का एक बहुत ही सौम्य और प्यारा अभिवादन होता था। लेकिन, संघ परिवार ने इसे कट्टर सांप्रदायिक, असहिष्णु और आक्रामक छवि वाले ‘जय श्रीराम’ में पूरी तरह बदल दिया है। इसलिए, इस बदलाव का पूरा श्रेय आखिर संघी गिरोह को ही जाता है。

नतीजतन, यदि सदन में भाजपा विधायक इस विधेयक को कानून बनाते हुए यह आक्रामक नारा लगाते हैं। तो उसके राजनीतिक निहितार्थ और उसके असली संदेश बहुत ही स्पष्ट हैं। छत्तीसगढ़ में भाजपा राज के दौरान अल्पसंख्यकों और उनके अधिकारों पर बहुत तेजी से हमले बढ़े हैं। खासकर, असामाजिक तत्व ईसाई समुदाय के खिलाफ लगातार हिंसक हमले कर रहे हैं। दरअसल, वे धर्मांतरण के इस छद्म और झूठे मुद्दे को केंद्र में रखकर ही ये सब कर रहे हैं। आज हर दिन छत्तीसगढ़ के किसी-न-किसी हिस्से से ऐसी बुरी खबरें लगातार आ रही हैं। संघी गिरोह धर्मांतरण किए जाने के भारी शक और अपुष्ट आरोपों पर जमकर बवाल काट रहा है। इसलिए, वे ईसाई समुदाय की शांतिपूर्ण प्रार्थनाओं पर सीधे हमले कर रहे हैं। वे चर्चों में घुसकर भारी उत्पात मचा रहे हैं。

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हैरानी की बात यह है कि इन हुड़दंगियों को राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन का पूरा संरक्षण मिल रहा है। पुलिस महज़ शक और झूठे आरोपों में निर्दोष लोगों को तुरंत गिरफ्तार कर रही है। इसके अलावा, उपद्रवी उनकी शांतिपूर्ण प्रार्थना को भी जबरन रोक रहे हैं। जबकि, हमारा भारतीय संविधान सभी धर्मों के लोगों को पूरी स्वतंत्रता देता है। वे लोग अपनी आस्था और विश्वास के अनुसार पूजा-पाठ, प्रार्थना और नमाज आसानी से कर सकते हैं। इसी प्रकार, असामाजिक तत्व मुस्लिम लड़के और हिंदू लड़की के प्रेम-प्रसंगों को ‘लव जिहाद’ का झूठा नाम दे रहे हैं। और, वे मुस्लिम समुदाय को अपना सीधा निशाना बना रहे हैं। हालांकि, हमारा संविधान दो वयस्क लोगों को प्रेम करने और स्वेच्छा से विवाह करने की पूरी छूट देता है। हम यदि सार रूप में गहराई से देखें, तो यह नया कानून वास्तव में महिलाओं और युवाओं के सख्त खिलाफ है。

क्योंकि, यह कानून एक वयस्क व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता पर सीधा हमला करता है। वह अपनी पसंद से अपना जीवन साथी चुनने के लिए पूरी तरह आज़ाद है। आज देश में 18 वर्ष के युवाओं को सरकार चुनने का मताधिकार मिलता है। इसलिए, यह मानना बिल्कुल गलत है कि युवाओं में अपने जीवन साथी के बारे में सही फैसला लेने की कोई समझ नहीं होती है। दरअसल, यह पूरी तरह से एक पोंगापंथी और सड़ी हुई सोच ही है। और, संघी गिरोह इसी सड़ी सोच को इस देश पर जबरन लादना चाहता है। वास्तव में, यह कानून इस देश के नागरिकों की स्वतंत्रता और निजता के अधिकार का सीधा-सीधा उल्लंघन करता है। क्योंकि, यह कानून दो अलग-अलग धर्मों के व्यक्तियों के बीच स्वेच्छिक विवाह को बाधित करता है। इसके अलावा, यह इस तरह के विवाहों को पूरी तरह रोकने की कोशिश भी करता है। यह बात बहुत ही ज्यादा हास्यास्पद है。

सरकार इस नए कानून को कथित “लव जिहाद” की आड़ में ही ला रही है। जिसके बारे में पिछले कुछ वर्षों से देश में केवल भ्रामक और झूठा प्रचार चल रहा है। हालांकि, उसके बारे में राज्य सरकार के पास कोई भी ठोस तथ्य या आंकड़ा बिल्कुल नहीं है। खुद संसद में ही मोदी सरकार के गृह मंत्रालय ने यह कड़वा सच खुलेआम माना है। अमित शाह के नेतृत्व वाले मंत्रालय ने साफ कहा है कि ‘लव जिहाद’ नाम की कोई भी चीज देश में नहीं है। और न ही इसे पुष्ट करने के लिए उनके पास कोई भी आधिकारिक आंकड़े मौजूद हैं। इसलिए, इसका सीधा अर्थ यही है कि यह सिर्फ एक भ्रामक अफ़वाह है। मुस्लिम और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के खिलाफ संघी गिरोह का यह एक खतरनाक और नफरती प्रचार है। छत्तीसगढ़ के इस नए कानून में भी अन्य भाजपा शासित राज्यों की तरह ही कई कड़े नियम हैं。

सरकार ने धर्मांतरण करने और अंतर्धार्मिक विवाह के संबंध में कई विशेष प्रावधान जोड़े हैं। जिसकी सबसे प्रमुख बात यह है कि इन कामों के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेनी होगी। दरअसल, धर्म किसी भी व्यक्ति का अपना व्यक्तिगत मामला और उसका अपना गहरा विश्वास है। इसी प्रकार, किसी व्यक्ति को किससे विवाह करना है, यह भी उसकी अपनी निजी मर्ज़ी है। यह संबंधित व्यक्तियों की निजी पसंद का सवाल है और यह शुद्ध रूप से उनका निजी मामला है। तो फिर इसमें राज्य सरकार के अनुचित हस्तक्षेप की कोई भी अनुमति कैसे दी जा सकती है? यदि इस मामले में किसी भी नागरिक कानून का कोई उल्लंघन होता है या कोई अपराध होता है। तो प्रशासन उससे आसानी से निपट सकता है। क्योंकि, इससे निपटने के लिए भी देश के वर्तमान कानूनों में पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है。

इसलिए, इस नए और विवादित कानून को सुप्रीम कोर्ट में जल्द ही चुनौती मिलने की पूरी संभावना है। क्योंकि, अन्य भाजपा शासित राज्यों ने भी पहले इसी तरह के कई अलोकतांत्रिक कानून पारित किए थे। उन कानूनों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर अभी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल ही रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार को ऐसा कोई भी नया कानून बनाने से पहले थोड़ा रुकना चाहिए था। उसे इस गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय का ज़रूर इंतजार करना चाहिए था। लेकिन, छत्तीसगढ़ सरकार में कोई भी धैर्य बिल्कुल नहीं है। क्योंकि, इस कानून का वास्तविक उद्देश्य तो सिर्फ समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना ही है। इसके अलावा, सरकार इसके ज़रिए राज्य के अल्पसंख्यकों को पूरी तरह प्रताड़ित करना चाहती है। और यह हमारे लोकतंत्र के लिए एक बहुत ही खतरनाक संकेत है。

Pawan Singh

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News
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