काबुल एयरस्ट्राइक: अस्पताल की तबाही का मंजर और मलबे में बचाव कार्य।

अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव: पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में काबुल का अस्पताल तबाह, 400 की मौत; तालिबान और पाक के बीच युद्ध जैसे हालात

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International Desk, Taj News | Tuesday, March 17, 2026, 02:27:24 PM IST

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काबुल: दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में सोमवार की रात एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने भीषण गोलाबारी की, जिसने पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस हवाई हमले में काबुल स्थित ‘ओमिद’ अस्पताल को निशाना बनाया गया है, जो मुख्य रूप से नशा मुक्ति केंद्र के रूप में संचालित था। तालिबान सरकार ने इस सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए दावा किया है कि इस मलबे के नीचे दबने से अब तक 400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि घायलों की संख्या 250 के पार पहुँच गई है। यह हमला तब हुआ है जब दोनों देशों के बीच डूरंड लाइन को लेकर तनाव अपने चरम पर है। पाकिस्तान ने हालांकि इस अस्पताल पर हमले की बात को खारिज करते हुए इसे आतंकी ठिकानों पर की गई ‘सटीक स्ट्राइक’ बताया है।

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HIGHLIGHTS
  • भीषण तबाही: काबुल के 2,000 बेड वाले ड्रग रिहैबिलिटेशन अस्पताल पर पाकिस्तानी जेट्स ने गिराए बम।
  • हताहतों की संख्या: तालिबान का दावा- 400 निर्दोष नागरिकों की मौत, मलबे से अभी भी निकल रही हैं लाशें।
  • पाक का दावा: पाकिस्तान ने कहा- हमने काबुल और नंगरहार में केवल टीटीपी (TTP) के आतंकी अड्डों को ध्वस्त किया।
  • युद्ध का खतरा: सीमा पर दोनों देशों के बीच भारी गोलाबारी शुरू, सेनाएं हाई अलर्ट पर तैनात।

आधी रात को बरसी आसमान से मौत: काबुल में मचा हाहाकार

ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, सोमवार की रात करीब 9 बजे काबुल का आसमान अचानक पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों की गड़गड़ाहट से कांप उठा। बिना किसी पूर्व चेतावनी के किए गए इस हमले ने काबुल के रिहायशी इलाकों को हिला कर रख दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धमाके इतने शक्तिशाली थे कि उनकी गूँज शहर के हर कोने में सुनाई दी और आग की लपटें कई किलोमीटर दूर तक आसमान को लाल कर रही थीं। सबसे भीषण तबाही ‘ओमिद’ अस्पताल परिसर में देखी गई। यह अस्पताल न केवल काबुल बल्कि आसपास के प्रांतों के लिए एक महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र था, जहाँ नशे की लत से जूझ रहे मरीजों का इलाज होता था।

तालिबान के उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने मीडिया को बताया कि अस्पताल की इमारत का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह जमींदोज हो गया है। उन्होंने कहा, “यह एक अस्पताल नहीं, बल्कि एक मानवीय केंद्र था जहाँ निहत्थे मरीजों का इलाज हो रहा था। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए नागरिकों को निशाना बनाया है।” बचाव दल के अनुसार, धमाके के समय अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की भारी भीड़ थी, जिससे हताहतों की संख्या इतनी अधिक हो गई।

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पाकिस्तान का इनकार और कड़ा रुख: ‘आतंकी ठिकानों पर की कार्रवाई’

इस्लामाबाद में पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि उनकी वायुसेना ने केवल उन ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की है, जहाँ तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकी शरण लिए हुए थे। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसे खुफिया सूत्रों से पक्की जानकारी मिली थी कि काबुल और नंगरहार प्रांतों में आतंकियों ने अपने तकनीकी केंद्र और गोला-बारूद के बड़े भंडार जमा कर रखे हैं।

पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में आतंकी हमलों में भारी इजाफा हुआ है। पाकिस्तान का आरोप है कि काबुल प्रशासन इन आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करा रहा है। पाकिस्तान ने दोटूक शब्दों में कहा कि कोई भी नागरिक इस हमले में हताहत नहीं हुआ है और तालिबान द्वारा फैलाई जा रही खबरें केवल ‘दुष्प्रचार’ हैं ताकि क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म पर से ध्यान हटाया जा सके।

भू-राजनीतिक संकट: डूरंड लाइन पर मंडराते युद्ध के बादल

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच यह तनाव नया नहीं है, लेकिन सोमवार की रात की घटना ने इसे एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँचा दिया है। डूरंड लाइन को लेकर चल रहा पुराना विवाद अब एक बड़े युद्ध की आहट दे रहा है। तालिबान सरकार ने कसम खाई है कि वे अपनी संप्रभुता पर हुए इस हमले का कड़ा जवाब देंगे। काबुल की सड़कों पर लोग पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे तालिबान पर भी सैन्य कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना की गूँज सुनाई दे रही है। चीन, जो इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था, उसके प्रयास भी अब विफल होते नजर आ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन जिस तरह से सीमा पर टैंकों और तोपखानों की तैनाती बढ़ाई गई है, उससे शांति की उम्मीदें धूमिल होती दिख रही हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो पूरे दक्षिण एशिया में स्थिरता को खतरा पैदा हो सकता है।

बढ़ता मानवीय संकट: मलबे में दबी उम्मीदें

अस्पताल पर हुए हमले ने अफगानिस्तान में पहले से मौजूद स्वास्थ्य संकट को और गहरा कर दिया है। ओमिद अस्पताल के नष्ट होने से हजारों मरीजों के लिए इलाज के रास्ते बंद हो गए हैं। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि काबुल के अन्य अस्पतालों में संसाधनों की भारी कमी है और वे घायलों के इस विशाल दबाव को झेलने में सक्षम नहीं हैं। दवाओं, बिस्तरों और ऑक्सीजन की तत्काल आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस हमले को ‘इंसानी अधिकारों का जघन्य उल्लंघन’ करार दिया है और इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

आने वाले दिन अफगानिस्तान और पाकिस्तान के संबंधों के लिए निर्णायक होंगे। क्या यह मामला कूटनीतिक बातचीत से सुलझेगा या सीमा पर हथियारों की गूँज जारी रहेगी, यह काबुल और इस्लामाबाद के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा। ताज न्यूज़ इस पूरी घटनाक्रम पर पल-पल की नजर बनाए हुए है और आपको सबसे सटीक रपट उपलब्ध कराता रहेगा।

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Pawan Singh

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Chief Editor, Taj News

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