Edited by: Pawan Singh | tajnews.in | Agra | 11 Mar 2026, 02:15 am IST
Taj News Satire Desk
राजनैतिक व्यंग्य-समागम
विष्णु नागर
साहित्यकार एवं स्वतंत्र पत्रकार
प्रसिद्ध साहित्यकार एवं जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विष्णु नागर ने अपने इस तीखे और मारक व्यंग्य में अमेरिका की ‘खतरे’ वाली मानसिकता पर गहरा प्रहार किया है। उन्होंने बताया है कि कैसे दुनिया का सबसे ताकतवर देश अपनी दादागिरी को सही ठहराने के लिए हमेशा खुद को खतरे में बताता है। पढ़िए उनका यह बेबाक आलेख:
मुख्य बिंदु
- अमेरिका को 18वीं सदी से लेकर आज तक दुनिया की हर छोटी-बड़ी चीज से सिर्फ खतरा ही नजर आता है।
- दूसरे देशों के तेल और संसाधनों को लूटने के लिए खुद को खतरे में बताने की अमेरिकी साम्राज्यवादी चाल।
- भारत की विदेश नीति और अमेरिका के सामने सत्ताधीशों के ‘सरेंडर’ पर तीखा और करारा व्यंग्य।
- चीन, रूस से लेकर भारत की ठेकुआ-मालपुआ और भिंडी तक से डरे हुए अमेरिका की दयनीय स्थिति का चित्रण।
भारत को हमेशा से केवल पाकिस्तान और चीन से खतरा रहा है। इधर देश में वर्तमान सरकार के प्रकट होने के बाद एक नया खतरा पैदा हो गया है। अब तथाकथित बांग्लादेशी प्रवासियों से भी भारी खतरा बताया जाता है। पिछले बारह साल से देश में हिंदू सरकार काम कर रही है। इसके बावजूद बहुसंख्यक हिंदू भी अचानक ‘खतरे’ में आ गए हैं। मगर हमारी सरकार का परम दोस्त अमेरिका एक अलग ही मामले में फंसा है। वह अट्ठारहवीं सदी से लेकर आज तक लगातार खतरे में चल रहा है! अमेरिका को किसी भी बात से कभी भी खतरा हो सकता है। उसे कहीं भी और किसी से भी खतरा महसूस होता है! दरअसल हमेशा खतरे में रहने का दूसरा नाम ही अमेरिका है!
आजकल अमेरिका को ईरान से बहुत भारी खतरा चल रहा है। आप मान लीजिए कि कल को ईरान से उसका यह खतरा खत्म हो जाता है। तो क्या वह पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा? बिल्कुल नहीं! वह तुरंत कोई नया खतरा अपने सिर पर उठा लेगा। जब तक इस ब्रह्मांड में पृथ्वी रहेगी और आकाश रहेगा। जब तक वायु और जल रहेंगे, तब तक अमेरिका खतरे में रहेगा। जब तक एशिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और यूरोप रहेंगे, वह खतरे में ही रहेगा! वास्तव में वह सिर्फ खतरे में रहने के लिए पैदा हुआ है। इसके अलावा वह पूरी दुनिया को हमेशा खतरे में डालने के लिए ही बना है!
अमेरिका का यह अजीब खतरा उसी दिन से शुरू हो गया था। जब 18वीं सदी में यूरोप के शासकों ने अपने अपराधियों को वहां भेजा था। ब्रिटेन, फ्रांस, स्वीडन और नीदरलैंड के खतरनाक अपराधी वहां निर्वासित कर दिए गए थे। वहां आते ही इन गोरे अपराधियों को एक नया खतरा पैदा हो गया। उन्हें अमेरिका के मूल निवासियों यानी रेड इंडियनों से खतरा महसूस होने लगा! जमीन रेड इंडियनों की थी और देश भी उनका अपना था। लेकिन खतरा इन बाहरी गोरे अपराधियों को उन्हीं स्थानीय लोगों से हो गया! यह दुनिया का सबसे बड़ा और अजीब मजाक था。
इसके बाद गोरों ने रेड इंडियनों का पूरी तरह सफाया कर दिया। फिर अमेरिका ने अफ्रीका से काले लोगों को पकड़कर अपना गुलाम बनाया। उन्होंने उन्हें वहां जीवन भर के लिए गुलाम बनाकर रखा। अब इन गोरों को अपने ही काले गुलामों से भारी खतरा पैदा हो गया! कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि उन्हें अपनी औरतों से भी बहुत खतरा है। इसलिए उन्होंने गोरी औरतों को भी लंबे समय तक मताधिकार बिल्कुल नहीं दिया। बहुत लंबे और कठिन संघर्ष के बाद 1920 में उन्हें यह अधिकार मिला। लेकिन वह भी केवल आधा-अधूरा अधिकार ही था। मगर काली औरतों को यह अधिकार तब भी बिल्कुल नहीं मिला। 45 साल और कड़ा संघर्ष करने के बाद उन्होंने यह मतदान का अधिकार प्राप्त किया! जबकि आजाद भारत में यह अधिकार 1950 में ही सबको एक साथ मिल गया था!
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आजकल यूरोप से भगाए गए उन अपराधियों के वंशजों को एक नया डर सता रहा है। उन्हें अब दूसरे देशों से आए मेहनती प्रवासियों से भारी खतरा है! अमेरिका ने हमारे देशवासियों को वहां से हथकड़ी और बेड़ियों में जकड़कर वापस भेजा! पर यह हमारे लिए कोई खास बात नहीं है। आज का अमेरिका भारत का और सत्ताधीशों का सबसे अच्छा दोस्त माना जाता है! दरअसल एक दोस्त का मुख्य काम ही अपने दोस्त का सरेआम अपमान करना होता है। इसलिए हम लोग उनके इस अपमान का बिल्कुल बुरा नहीं मानते हैं! अमेरिका और उसका पक्के से भी पक्का दोस्त इस्राइल हमेशा खतरे में रहते हैं। इन दोनों देशों को हमेशा खतरे में रहने की एक बुरी आदत-सी पड़ चुकी है। इसके साथ ही इन्हें दुनिया को खतरे में डालने की लत लग गई है। चैन से बैठने से इन दोनों को सख़्त परहेज़ है! अगर ये शांति से बैठ जाएं, तो इनकी तबियत बहुत खराब हो जाती है। इन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती करना पड़ता है!
अगर दुनिया में कोई खतरा नहीं है, तो इन दोनों का वजूद भी नहीं है। अभी कल तक अमेरिका को छोटे से देश वेनेजुएला से बहुत खतरा था। इसलिए अमेरिका वहां के निर्वाचित राष्ट्रपति को जबरन उठाकर अपने यहां ले आया। अमेरिका अक्सर दूसरे देशों का तख्ता आसानी से पलट देता है। वह राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों का तत्काल प्रभाव से निबटारा कर देता है। या फिर वह उन्हें अपने देश ले जाकर रेत-रेत कर ऊपर भेजने का पक्का इंतजाम करता है। अभी उसे फिलहाल वेनेजुएला से कोई सीधा खतरा नहीं है। मगर आप मान लीजिए कि कल वहां के लोग तेल की खुली लूट के खिलाफ उठ खड़े हुए। तो अमेरिका तुरंत फिर से एक बहुत बड़े खतरे में पड़ जाएगा! दरअसल जहां भी उसकी लूट का ‘अधिकार’ खतरे में पड़ता है। वहां वह खुद को तुरंत खतरे में बता देता है। जो भी देश अपने लिए स्वतंत्र निर्णय लेता है। जो देश अपने प्राकृतिक संसाधनों का राष्ट्रीयकरण करता है। जो अमेरिकी लूट के सारे रास्ते पूरी तरह बंद कर देता है। जो देश अमेरिका के विरोधी देशों से अच्छे संबंध रखता है। जो देश अपने को खुलकर कम्युनिस्ट घोषित करता है। जो अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता का पुरजोर दावा करता है। अमेरिका और उसके दोस्त तुरंत उस देश से खतरे में पड़ जाते हैं。
जब भारत ने रूस से बहुत सस्ता तेल खरीदा। जब उद्योगपतियों ने इस तेल से अपनी जबरदस्त कमाई की। तब भी अमेरिका को भारत से एक बड़ा खतरा पैदा हो गया। लेकिन हमारे देश ने उस बड़े खतरे को फिलहाल दूर भगा दिया है। हमने डरकर रूस से वह सस्ता तेल लेना पूरी तरह बंद कर दिया है! हाल ही में अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर एक बड़ा संयुक्त हमला किया। भारत ने तुरंत उनकी हां में अपनी हां मिला दी। वरना हम खुद अमेरिका की नजरों में खतरे में पड़ जाते। अगर देश किसी खतरे में पड़ जाए तो कोई समस्या नहीं है। लेकिन हमारे नेतृत्व पर कोई भी खतरा बिल्कुल नहीं आना चाहिए। क्योंकि वे देश के सबसे बड़े और महान राष्ट्रवादी हैं। वे उन लोगों से भी बड़े राष्ट्रवादी हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान दे दी! साल 1959 में छोटे से देश क्यूबा में एक महान क्रांति हुई थी। इससे शक्तिशाली अमेरिका तुरंत बहुत बड़े खतरे में पड़ गया। उसने क्यूबा के नेता फिदेल कास्त्रो को मारने की अनगिनत कोशिशें कीं। मगर वह बहादुर बंदा हर बार बाल-बाल बच गया。
इस बात का भारी अफसोस आज तक अमेरिका को सालता रहता है। क्योंकि क्यूबा से उसे आज भी एक बहुत बड़ा खतरा है। उसे अपने सभी पड़ोसी देशों से लगातार खतरा बना रहता है। और जो देश उससे हजारों किलोमीटर दूर स्थित हैं, उनसे भी उसे खतरा है। उसे अपने शांत पड़ोसी कनाडा तक से भारी खतरा है। इसलिए डोनाल्ड ट्रंप कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की इच्छा प्रकट कर चुके हैं। उसे मैक्सिको से हमेशा बहुत बड़ा खतरा रहता है। उसे कोलंबिया और ब्राजील जैसे देशों से भी खतरा है। उसे दुनिया में सिर्फ खतरा ही खतरा नजर आता है। उसे पहले शक्तिशाली सोवियत संघ से बहुत खतरा था। अब उसे चीन, रूस और उत्तरी कोरिया से एक स्थायी खतरा है। इसका कोई पक्का इलाज वह अभी तक नहीं ढूंढ पाया है। खतरा तो है, मगर वह इन तीनों देशों से अभी डरा-डरा सा रहता है। उसे सुदूर अफ्रीका में स्थित नाइजीरिया से भी खतरा है। क्योंकि वहां के ईसाई बिल्कुल उसी तरह खतरे में हैं। जिस तरह हिंदू पाकिस्तान और बांग्लादेश में हमेशा खतरे में रहते हैं。
उसे अफ्रीका के साहेल क्षेत्र के अमेरिका-विरोधी मजबूत समूहों से खतरा है। उसे पूरे अफ्रीका में चीन और रूस का प्रभाव बढ़ने से बहुत बड़ा खतरा है। उसने जिन खूंखार आतंकी संगठनों को खुद बनाया और बढ़ाया। आज उसे उन्हीं आतंकी संगठनों से सबसे बड़ा खतरा है। उसे आज बाहर वालों से ज्यादा अपने आपसे भी बहुत खतरा है। उसे पूरे अमेरिकी महाद्वीप के हर छोटे-बड़े देश से ख़तरा है। उसे अपने देश के उन राज्यों से भी भारी खतरा है। जहां विरोधी डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकारें चुनी गई हैं। वहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राज्यों की इच्छा के विरुद्ध अपनी सेना और नेशनल गार्ड लगा दिए हैं। अमेरिका को अब दुनिया भर में प्रतिष्ठित अपने ही विश्वविद्यालयों से भी खतरा है। उसे रिपब्लिकन पार्टी को वोट न देने वाले आम वोटरों से भी खतरा है। यानी अमेरिका को आज बाहर से ही नहीं, बल्कि अंदर से भी बहुत खतरा है। जब तक दुनिया में अमेरिका मौजूद है, तब तक उसे खतरा है। उसे छोटी सी चींटी से खतरा है। उसे विशाल हाथी से खतरा है। उसे घर के चूहे से खतरा है。
उसे बाग में खिले कनेर के फूलों से खतरा है। उसे बिहार के स्वादिष्ट ठेकुआ और मालपुआ से खतरा है। उसे मध्य प्रदेश के मशहूर कलाकंद से खतरा है। उसे महाराष्ट्र के श्रीखंड और पावभाजी से भी भारी खतरा है। उसे भारत की हिंदी भाषा से बहुत खतरा है। उसे सब्जी मंडी की भिंडी से खतरा है। उसे गरीब आदमी के पहने हुए चिथड़ों से भी खतरा है। उसे आपसे, हमसे और उन सभी से खतरा है! विष्णु नागर के इस तीखे व्यंग्य लेख से भी उसे बहुत खतरा है। इसे ध्यान से पढ़ने वाले सभी पाठकों से उसे भारी खतरा है। इतना बेचारा और दयनीय है आज का अमेरिका। उसे बस हर किसी से खतरा ही खतरा है!
Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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