SPIC MACAY के ‘विरासत 2026’ कार्यक्रम में राग परमेश्वरी की प्रस्तुति; पं. हिमांशु महंत की तबला संगत ने विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत से जोड़ा
आगरा डेस्क 🌐 tajnews.in | शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026, 08:30 PM IST

आगरा। भारतीय शास्त्रीय संगीत की मधुर स्वर लहरियों और तबले की लयकारी से दिल्ली पब्लिक स्कूल, शास्त्रीपुरम परिसर का वातावरण सुरमय हो उठा। सांस्कृतिक संस्था SPIC MACAY के ‘विरासत 2026’ कार्यक्रम के अंतर्गत प्रख्यात वीणा वादक पं. सलिल विश्व मोहन भट्ट ने अपनी सात्विक वीणा पर राग परमेश्वरी की प्रस्तुति दी। उनके साथ बनारस घराने के तबला वादक पं. हिमांशु महंत ने संगत की। वीणा और तबले के सुरों के इस संगम ने विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया।

आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर की स्मृति को समर्पित था। नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में निधन हुआ। आयोजकों ने बताया कि नाना पाटेकर और पं. सलिल भट्ट के पिता, पद्मश्री एवं ग्रैमी पुरस्कार विजेता पं. विश्व मोहन भट्ट के बीच घनिष्ठ मित्रता थी। इसी आत्मीय संबंध के सम्मान में प्रस्तुति को नाना पाटेकर की स्मृति से जोड़ा गया।
राग परमेश्वरी की तानों ने मोहा मन
कार्यक्रम के दौरान पं. सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा पर राग परमेश्वरी की विभिन्न स्वर रचनाओं और तानों के माध्यम से शास्त्रीय संगीत की बारीकियां प्रस्तुत कीं। वीणा के गूंजते स्वरों और राग के विस्तार ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। वहीं, पं. हिमांशु महंत ने तबले पर तीनताल में लयकारी प्रस्तुत की। दोनों कलाकारों के बीच सुर और ताल का तालमेल कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।

इस प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय वाद्य संगीत को करीब से सुनने और कलाकारों की साधना को समझने का अवसर मिला। शास्त्रीय संगीत में राग, लय और भाव के समन्वय की झलक ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक अनुभव के साथ-साथ सीखने का अवसर भी बनाया।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई। पं. सलिल भट्ट और विद्यालय के प्रधानाचार्य रवींद्र पांडे ने मां वीणापाणि के चित्र पर माल्यार्पण किया और दीप प्रज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संगीत और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना रहा।

प्रस्तुति के बाद विद्यार्थियों ने पं. सलिल भट्ट से संगीत, साधना और गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़े सवाल पूछे। विद्यार्थियों से संवाद के दौरान उन्होंने कहा, “सुर ही संस्कार का आधार है और शिष्य को सदैव गुरु के बताए मार्ग पर चलना चाहिए।” उनके इस संदेश ने संगीत शिक्षा के साथ अनुशासन और गुरु के प्रति सम्मान के महत्व को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम के समापन पर प्रधानाचार्य रवींद्र पांडे ने अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट किए।

सात्विक वीणा के माध्यम से भारतीय संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रहे सलिल भट्ट
पं. सलिल विश्व मोहन भट्ट भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठित कलाकार हैं। वह प्रसिद्ध संगीतकार पं. विश्व मोहन भट्ट के पुत्र हैं और सात्विक वीणा के माध्यम से अपनी विशिष्ट संगीत शैली के लिए पहचाने जाते हैं। उनके पिता ने मोहन वीणा के जरिए भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाई। सलिल भट्ट इसी संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
उनकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, सलिल भट्ट को ‘ग्लोबल इंडियन’ और ‘प्रिंस ऑफ रागा’ जैसी उपाधियों से सम्मानित किया गया है। उनके अंतरराष्ट्रीय संगीत सहयोग वाले एल्बम ‘Slide to Freedom 2’ को कनाडा के JUNO अवॉर्ड के लिए नामांकन मिला था। उनकी प्रस्तुतियों में भारतीय रागों की पारंपरिक संरचना और वाद्य संगीत की विविध संभावनाओं का मेल दिखाई देता है।

विद्यार्थियों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की पहल
SPIC MACAY भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और पारंपरिक कलाओं से विद्यार्थियों को परिचित कराने के लिए कार्यक्रम आयोजित करता है। ‘विरासत 2026’ के तहत दिल्ली पब्लिक स्कूल, शास्त्रीपुरम में आयोजित यह कार्यक्रम भी कलाकारों और विद्यार्थियों के बीच सीधे संवाद का माध्यम बना।
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वीणा की मधुर तानों, तबले की लयकारी और विद्यार्थियों के साथ संवाद ने आयोजन को यादगार बनाया। नाना पाटेकर की स्मृति को समर्पित इस प्रस्तुति ने संगीत, मित्रता और सांस्कृतिक विरासत के भावों को एक मंच पर जोड़ा।

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