आगरा को प्रदेश के तीन प्रमुख जोनल केंद्रों में किया गया चयन; मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी के लिए सर्विलांस, रिपोर्टिंग और प्रभावी रेफरल व्यवस्था पर जोर
आगरा डेस्क | 🌐 tajnews.in | 3 अक्टूबर 2026 | 20:05 बजे

स्टिलबर्थ एंड मैटरनल डेथ सर्विलांस एंड रिस्पांस (S-MDSR) के अंतर्गत आयोजित तीसरी स्टेट ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) जोनल कार्यशाला में सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रदेश को व्यापक रूप से कवर करने के उद्देश्य से इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण के लिए आगरा को तीन प्रमुख जोनल केंद्रों में से एक के रूप में चुना गया। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला में एस.एन. मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह, डॉ. आशा निगम एवं डॉ. संगीता साहू ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने मातृ मृत्यु एवं मृतजन्म (Stillbirth) के मुख्य कारणों की पहचान, निगरानी, रिपोर्टिंग और समीक्षा के साथ समयबद्ध उपचार तथा प्रभावी रेफरल व्यवस्था के संबंध में व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया।

इस अवसर पर एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा, “मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। चिकित्सकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का यह प्रशिक्षण प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।”
- आगरा को S-MDSR राज्य स्तरीय ToT कार्यशाला के तीन प्रमुख जोनल केंद्रों में शामिल किया गया।
- डॉ. शिखा सिंह, डॉ. आशा निगम और डॉ. संगीता साहू ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण दिया।
- मातृ मृत्यु और मृतजन्म के कारणों की पहचान, निगरानी, रिपोर्टिंग एवं समीक्षा पर प्रशिक्षण दिया गया।
- समयबद्ध उपचार और प्रभावी रेफरल व्यवस्था को लेकर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया।
- मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी के लिए सर्विलांस और रिस्पांस प्रणाली को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया। प्रतिभागियों को सर्विलांस एवं रिस्पांस प्रणाली को प्रभावी बनाने, स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं की निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई के महत्व के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई।
कार्यशाला में मातृ मृत्यु एवं मृतजन्म से जुड़े मामलों की पहचान और उनकी समीक्षा की प्रक्रिया पर भी प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही प्रसूति संबंधी जटिल परिस्थितियों में समय पर उपचार उपलब्ध कराने और प्रभावी रेफरल व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पहुंचे प्रतिभागी
राज्य स्तरीय जोनल प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य से जुड़े सर्विलांस और रिस्पांस तंत्र को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान की गई।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, समय पर रिपोर्टिंग और आवश्यक उपचार एवं रेफरल व्यवस्था को प्रभावी बनाए जाने से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और मजबूत किया जा सकता है।





