हिंदुस्तानी बिरादरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगरा की छवि और पर्यटन पर असर को लेकर जताई चिंता; बोले—राजनीतिक विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन निजी आवास पर प्रदर्शन और अभद्र भाषा उचित नहीं
आगरा डेस्क | 🌐 tajnews.in | 29 सितंबर 2026 | 21:14 बजे

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित पैतृक आवास के बाहर हुए कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर हिंदुस्तानी बिरादरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कबीर पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सिराज कुरैशी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और प्रदर्शन करना राजनीतिक दलों और नागरिकों का अधिकार है, लेकिन विरोध की भी एक मर्यादा होनी चाहिए।
डॉ. सिराज कुरैशी ने अपने लिखित बयान में कहा कि किसी अधिकारी के खिलाफ राजनीतिक विरोध किया जा सकता है, लेकिन उसके पैतृक आवास पर पहुंचकर प्रदर्शन करना, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना और मकान की दीवार पर आपत्तिजनक शब्द लिखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोध के लिए ऐसे स्थान और तरीके अपनाए जाने चाहिए, जिनसे किसी परिवार की निजता और सुरक्षा प्रभावित न हो।
यह प्रतिक्रिया 28 सितंबर को आगरा के विजय नगर स्थित ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के बाहर हुए प्रदर्शन के बाद आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शन के दौरान मुख्य गेट और दीवार पर स्प्रे पेंट से आपत्तिजनक नारे लिखे गए। आगरा पुलिस ने बाद में मामले में कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेताओं अनिल यादव और मुकेश धनगर को गिरफ्तार किया है और घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है।
- डॉ. सिराज कुरैशी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास पर हुए प्रदर्शन पर आपत्ति जताई।
- उन्होंने कहा कि विरोध का अधिकार है, लेकिन उसके लिए मर्यादित और उचित तरीका भी जरूरी है।
- विजय नगर स्थित आवास के गेट और दीवार पर राजनीतिक नारे लिखे जाने की रिपोर्ट सामने आई।
- आगरा पुलिस ने अनिल यादव और मुकेश धनगर को गिरफ्तार किया है।
- पुलिस सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर रही है।
सीईसी के पैतृक आवास पर क्या हुआ?
28 सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आगरा के विजय नगर स्थित ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के बाहर प्रदर्शन किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और आवास के मुख्य गेट तथा दीवार पर स्प्रे पेंट से राजनीतिक नारे लिखे। यह प्रदर्शन निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस के विरोध का हिस्सा था।
प्रदर्शन के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दीवार तथा गेट पर लिखे गए नारों को हटाया गया। पुलिस ने घटना से जुड़े वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अनिल यादव और मुकेश धनगर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे।
दो कांग्रेस नेता गिरफ्तार, अन्य लोगों की तलाश
आगरा पुलिस ने मामले में अनिल यादव और मुकेश धनगर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दोनों घटना के बाद आगरा से दिल्ली की ओर जाने की कोशिश कर रहे थे और सीसीटीवी की मदद से उनका पता लगाया गया। मामले में हरिपर्वत थाने में केस दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था में बाधा डालने और ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड के साथ कथित मारपीट की भी जांच की जा रही है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य कथित आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। इन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना है।
आगरा पुलिस ने राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि लोकतांत्रिक विरोध के लिए निर्धारित स्थानों का इस्तेमाल किया जाए और आवासीय क्षेत्रों में आम नागरिकों को परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा जाए।
डॉ. सिराज कुरैशी ने जताई आपत्ति

अपने बयान में डॉ. सिराज कुरैशी ने कहा कि संविधान के तहत विरोध और प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार हैं, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल मर्यादा के साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ असहमति या विरोध दर्ज कराने के लिए उसके निजी या पारिवारिक आवास को प्रदर्शन का केंद्र बनाना उचित तरीका नहीं है।
डॉ. कुरैशी ने कहा कि यदि किसी अधिकारी के पैतृक आवास पर उसके माता-पिता या परिवार के सदस्य रहते हैं तो राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान उनकी निजता और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि विरोध के लिए सार्वजनिक और निर्धारित स्थानों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है। उनके अनुसार राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उसका तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आगरा की छवि और पर्यटन को लेकर चिंता
अपने बयान में डॉ. सिराज कुरैशी ने आगरा की अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पहचान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ताजमहल और शहर की ऐतिहासिक इमारतों को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। ऐसे में शहर में होने वाली सार्वजनिक घटनाओं का असर आगरा की छवि पर पड़ सकता है।
डॉ. कुरैशी ने कहा कि आगरा को एक प्रमुख पर्यटन शहर के रूप में अपनी पहचान बनाए रखने के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक प्रदर्शनों में भी व्यवस्था तथा अनुशासन का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक विरोध और शहर की सार्वजनिक व्यवस्था दोनों के बीच संतुलन आवश्यक है।
SIR को लेकर कांग्रेस का विरोध
विजय नगर में हुआ प्रदर्शन निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस के व्यापक विरोध के बीच हुआ। कांग्रेस ने निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर की अपनी बैठक के बाद SIR से जुड़े कई फैसलों की जानकारी दी। आयोग के अनुसार जिन मतदाताओं को अनमैप्ड या तार्किक विसंगतियों से संबंधित नोटिस जारी हुए हैं, उनके दस्तावेज जुटाने के लिए बूथ लेवल अधिकारी उनके घर जा सकते हैं और दस्तावेजों को ECINet पर अपलोड किया जाएगा। आयोग ने कहा है कि ये फैसले पूरी आयोग की मंजूरी से लिए गए हैं।
विरोध और मर्यादा पर बहस
आगरा की घटना ने राजनीतिक विरोध के तरीके और आवासीय क्षेत्रों में प्रदर्शन की सीमा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर राजनीतिक दलों के लिए विरोध और असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, वहीं दूसरी ओर निजी या पारिवारिक आवासों के आसपास कानून-व्यवस्था, निजता और सुरक्षा से जुड़े पहलू भी महत्वपूर्ण हैं।
डॉ. सिराज कुरैशी ने इसी संदर्भ में कहा है कि राजनीतिक विरोध होना चाहिए, लेकिन वह मर्यादित तरीके से हो और किसी परिवार या आम नागरिक को अनावश्यक परेशानी न हो। वहीं इस मामले में पुलिस की जांच जारी है और घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।





