सुप्रीम कोर्ट से अंतिम मामले में बरी होने के बाद नवंबर 2025 में जेल से निकला था कोली; सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने मिला शव
क्राइम डेस्क, 🌐 tajnews.in | शुक्रवार, 18 सितंबर 2026, 01:56:26 PM IST

tajnews.in | हरिद्वार, 18 सितंबर 2026। बहुचर्चित निठारी कांड में आरोपी रहे और बाद में अदालतों से बरी हुए सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई। शुक्रवार को उसका शव उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने स्थित चाय की दुकान के भीतर फंदे से लटका मिला।
पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का माना जा रहा है। सूचना मिलने के बाद सप्तऋषि पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस ने उसके परिजनों को सूचना दे दी है। मौत की परिस्थितियों और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार कोली कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और चाय की दुकान चला रहा था। उसी दुकान के भीतर उसका शव मिला। पुलिस घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के साथ यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मौत से पहले की परिस्थितियां क्या थीं। फिलहाल उसकी मौत के पीछे किसी विशेष कारण को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
2006 में सामने आया था निठारी कांड
निठारी कांड दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी इलाके में सामने आया था। नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 मकान के पीछे नाले के आसपास मानव अवशेष मिलने के बाद मामला देशभर में चर्चा में आया था।
सुरेंद्र कोली इसी मकान में घरेलू सहायक के रूप में काम करता था। मकान के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर के साथ उसके खिलाफ भी कई आपराधिक मामले दर्ज हुए और अलग-अलग मामलों में मुकदमे चले।
12 मामलों में हाईकोर्ट ने किया था बरी
सुरेंद्र कोली से जुड़े 12 मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2023 को उसे बरी कर दिया था। इन मामलों में मोनिंदर सिंह पंढेर को भी बरी किया गया था।
इन फैसलों के खिलाफ राज्य और अन्य पक्षों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपीलें की गईं। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार 30 जुलाई 2025 को इन अपीलों को खारिज कर हाईकोर्ट के बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा गया।
अंतिम मामले में भी सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत
इन 12 मामलों से अलग सुरेंद्र कोली के खिलाफ एक मामला रिंपा हलदर की हत्या से संबंधित था। सुप्रीम कोर्ट के 11 नवंबर 2025 के फैसले के अनुसार इस मामले में 2011 में उसकी दोषसिद्धि और मृत्युदंड की पुष्टि हुई थी, जिसे बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनवरी 2015 में उम्रकैद में बदल दिया था।
इसके बाद कोली ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल की। 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने क्यूरेटिव पिटीशन स्वीकार कर उसकी दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में इस्तेमाल साक्ष्य और उन 12 मामलों में इस्तेमाल साक्ष्य के आधार पर सामने आए परस्पर विरोधी नतीजों को देखते हुए मामले में न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक था। अदालत ने पहले का फैसला वापस लेते हुए कोली को बरी कर दिया।
अदालत के फैसले के बाद यदि किसी अन्य मामले में उसकी आवश्यकता नहीं थी तो उसकी तत्काल रिहाई का रास्ता साफ हो गया। नवंबर 2025 में वह जेल से बाहर आया था।
सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्य की विश्वसनीयता पर भी की थी चर्चा
11 नवंबर 2025 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मामले में इस्तेमाल किए गए कबूलनामे और बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों सहित पूरे साक्ष्य ढांचे पर विचार किया। अदालत ने कहा कि जब समान साक्ष्य के आधार पर जुड़े मामलों में अलग-अलग न्यायिक निष्कर्ष सामने आए हों, तो पहले के फैसले की समीक्षा आवश्यक हो सकती है।
कोली की दोषसिद्धि रद्द होने के बाद निठारी कांड से जुड़े उसके खिलाफ लंबित अंतिम मामले में भी उसकी दोषसिद्धि समाप्त हो गई थी।
अब हरिद्वार में उसकी मौत के बाद पुलिस घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस की जांच पूरी होने तक मौत के कारण या उसके पीछे किसी व्यक्ति, घटना अथवा परिस्थिति को निश्चित रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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