गढ़वार में बारिश से कटी सड़क के गड्ढे में दो घंटे फंसी रही एंबुलेंस, ग्रामीणों ने ट्रैक्टर से खींचकर निकाला; पीडब्ल्यूडी ने माना- बारिश में कट गया था लिंक मार्ग
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | रविवार, 6 सितंबर 2026, 06:05:12 PM IST

tajnews.in | आगरा। गांव की सड़क सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं होती, आपात स्थिति में वही सड़क जिंदगी और मौत के बीच का रास्ता भी बन जाती है। बाह तहसील के गढ़वार गांव में सड़क की बदहाली से जुड़ी ऐसी ही घटना सामने आई है। प्रसव पीड़ा से जूझ रही निधि को अस्पताल ले जाने के लिए रात करीब एक बजे बुलाई गई एंबुलेंस रास्ते में बने गहरे गड्ढे में फंस गई। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने ट्रैक्टर की मदद से एंबुलेंस को बाहर निकाला। इसके बाद परिजन प्रसूता को लेकर निजी अस्पताल पहुंचे, जहां पहुंचने का समय करीब साढ़े तीन बजे बताया गया। प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई। डॉक्टरों ने मौत को प्रसव में हुई देरी से जोड़ा, हालांकि इसका अंतिम चिकित्सकीय कारण आधिकारिक मेडिकल रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।
रात एक बजे आई एंबुलेंस, रास्ते में ही फंस गई
घटना दो सितंबर की रात की है। गढ़वार गांव निवासी प्रवेंद्र की पत्नी निधि को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो परिजनों ने रात करीब एक बजे एंबुलेंस बुलाई। एंबुलेंस गांव की ओर पहुंची, लेकिन लिंक मार्ग पर बने गहरे गड्ढे में उसका पहिया फंस गया।
चालक ने वाहन निकालने की कोशिश की, लेकिन सड़क की स्थिति ऐसी थी कि एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ सकी। एक तरफ प्रसूता को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत थी और दूसरी तरफ उसे ले जाने वाला सरकारी वाहन ही सड़क पर फंस गया।
दो घंटे तक ट्रैक्टर से एंबुलेंस निकालने की कोशिश
एंबुलेंस फंसने की जानकारी मिलने पर ग्रामीण ट्रैक्टर लेकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने एंबुलेंस को गड्ढे से निकालने की कोशिश शुरू की। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद वाहन को बाहर निकाला जा सका।
इसके बाद प्रसूता को लेकर परिजन दूसरे रास्ते से निजी अस्पताल के लिए रवाना हुए। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार वे करीब साढ़े तीन बजे अस्पताल पहुंचे।
एक बजे से साढ़े तीन बजे तक… ढाई घंटे का सफर
इस घटना का सबसे गंभीर पहलू समय का यह अंतर है। परिजनों ने करीब रात एक बजे एंबुलेंस बुलाई और करीब साढ़े तीन बजे निजी अस्पताल पहुंचने की बात सामने आई है। यानी आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए शुरू हुआ सफर लगभग ढाई घंटे बाद अस्पताल पहुंचा।
इन ढाई घंटों में करीब दो घंटे एंबुलेंस को सड़क के गड्ढे से निकालने में ही लग गए। यही समय अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
अगर एंबुलेंस रास्ते में नहीं फंसती तो क्या प्रसूता को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था और क्या इससे नवजात की स्थिति अलग हो सकती थी? इसका जवाब चिकित्सकीय जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड से ही मिल सकेगा। लेकिन घटना ने ग्रामीण सड़क और आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच की कमजोर कड़ी जरूर उजागर कर दी है।
अस्पताल में नवजात की मौत
निजी अस्पताल पहुंचने के बाद प्रसूता का उपचार शुरू किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई। डॉक्टरों ने प्रसव में हुई देरी को इसके लिए जिम्मेदार बताया है। चिकित्सकीय प्रयासों से प्रसूता को बचा लिया गया।
परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि यदि एंबुलेंस खराब सड़क पर नहीं फंसती तो प्रसूता को पहले अस्पताल पहुंचाया जा सकता था। हालांकि सड़क की देरी और नवजात की मौत के बीच सीधा चिकित्सकीय कारण-परिणाम आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही तय किया जा सकता है।
छह महीने पहले मरम्मत, एक महीने से फिर खराब
ग्रामीण भानु प्रताप सिंह के अनुसार लोक निर्माण विभाग ने इस लिंक मार्ग का निर्माण कराया था और करीब छह महीने पहले इसकी मरम्मत भी कराई गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि करीब एक महीने पहले बारिश में सड़क का हिस्सा बह गया और वहां बड़ा गड्ढा बन गया।
ग्रामीणों के मुताबिक इसकी जानकारी विभाग के अवर अभियंता को कई बार दी गई, लेकिन सड़क की स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई। अब इस दावे की भी जांच जरूरी है कि विभाग को सड़क की खराब स्थिति की जानकारी कब मिली और शिकायत के बाद क्या कार्रवाई की गई।
पीडब्ल्यूडी ने माना- बारिश में कट गया था मार्ग
मामले में लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड, आगरा के अवर अभियंता नागेंद्र वर्मा ने सड़क के बारिश के कारण कटने की बात स्वीकार की है। उन्होंने जल्द मार्ग पर मिट्टी डलवाकर उसे दुरुस्त कराने की बात कही है।
हालांकि ग्रामीणों की मांग सिर्फ मिट्टी डालकर रास्ता चलने लायक बनाने तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि बारिश में बार-बार सड़क खराब होने की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी मरीज या गर्भवती को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
समाधान दिवस में भी पहुंची शिकायत
घटना के बाद शनिवार को बाह तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में ग्रामीणों ने सड़क की समस्या को लेकर लिखित शिकायत दी।
भानु प्रताप सिंह के साथ विभूत नरायन सिंह, रिक्की सिंह, अमित कुमार और हरेंद्र सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने क्षतिग्रस्त रास्ते की समस्या रखी। ग्रामीणों ने सड़क की जांच कराने, स्थायी सीसी मार्ग बनाने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
बाह एसडीएम विनोद कुमार ने मामले की जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
अब सड़क की मरम्मत के साथ जवाबदेही की भी जरूरत
गढ़वार की घटना को केवल एक सड़क के गड्ढे की शिकायत मानकर छोड़ देना आसान होगा, लेकिन इससे मूल सवाल खत्म नहीं होगा। यदि ग्रामीणों के दावे के मुताबिक सड़क करीब एक महीने से खराब थी और विभाग को इसकी जानकारी दी गई थी, तो यह पता लगाना जरूरी है कि आपातकालीन आवागमन के लिए रास्ता दुरुस्त क्यों नहीं किया गया।
पीडब्ल्यूडी ने बारिश से सड़क कटने की बात स्वीकार की है और अब रास्ते को दुरुस्त कराने की बात कही है। ऐसे में जांच का अगला सवाल यही होना चाहिए कि सड़क कब खराब हुई, विभाग को इसकी सूचना कब मिली, मौके पर क्या कार्रवाई हुई और स्थायी समाधान में देरी क्यों हुई।
नवजात की मौत ने सड़क के गड्ढे को बना दिया बड़ा सवाल
गढ़वार में एक एंबुलेंस करीब दो घंटे तक सड़क के गड्ढे में फंसी रही। प्रसूता को रात करीब एक बजे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाने की कोशिश शुरू हुई और करीब साढ़े तीन बजे निजी अस्पताल पहुंचने की बात सामने आई। इस दौरान नवजात की मौत हो गई।
नवजात की मौत का अंतिम चिकित्सकीय कारण जांच से स्पष्ट होगा, लेकिन इस घटना ने यह गंभीर सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में खराब सड़कें आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को किस हद तक प्रभावित कर रही हैं।
अब जरूरत सिर्फ गड्ढा भरने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि अगली बार किसी एंबुलेंस का रास्ता सड़क की बदहाली के कारण न रुके।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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