जंतर-मंतर पर हाई-वोल्टेज ड्रामा: अनशन पर बैठे अभिजीत दीपके पर महिला ने फेंकी स्याही, वांगचुक के बाद आंदोलन की कमान संभालते ही भारी बवाल

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National Desk, 🌐 [tajnews.in] | Saturday, 18 July, 2026, 02:04:00 PM IST.

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tajnews.in | नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर शनिवार को उस समय भारी अराजकता और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया, जब भूख हड़ताल पर बैठे युवा नेता अभिजीत दीपके पर एक अज्ञात महिला ने सरेआम स्याही फेंक दी। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन अस्पताल में भर्ती कराए जाने के तुरंत बाद, अभिजीत दीपके ने मोर्चे पर ही आमरण अनशन शुरू करने का विधिक एलान किया था। इस स्याही कांड के बाद मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने भारी हंगामा शुरू कर दिया, जिसके बाद मुस्तैद दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला को विधिक रूप से हिरासत में ले लिया है। जंतर-मंतर पर तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है।

HIGHLIGHTS
  1. जंतर-मंतर पर अराजकता: सोनम वांगचुक के बाद अनशन पर बैठे कॉकरोच जनता पार्टी के अध्यक्ष अभिजीत दीपके पर सरेआम फेंकी गई स्याही।
  2. आरोपी महिला दबोची गई: सुरक्षा घेरा तोड़कर स्याही फेंकने वाली महिला को दिल्ली पुलिस ने मौके से हिरासत में लिया।
  3. संसद मार्च पर अड़े आंदोलनकारी: दीपके का दावा— पुलिस कस्टडी से भागकर जंतर-मंतर पहुंचा, 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ अभियान हर हाल में होगा।
  4. वांगचुक की सेहत पर अपडेट: लंबे उपवास और डिहाइड्रेशन से कमजोर हुए सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में स्थिर।

पुलिस की गिरफ्त से भागकर अनशन स्थल पहुंचे दीपके, लगाए गंभीर आरोप

स्याही कांड के शिकार हुए युवा नेता अभिजीत दीपके ने पुलिसिया तंत्र पर गंभीर चोट करते हुए दावा किया है कि शनिवार सुबह जब वे कुछ देर के लिए धरना स्थल से हटे थे, तभी पुलिस बल ने वहां धावा बोल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने 20 दिनों से भूखे 60 वर्षीय बुजुर्ग एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के साथ अभद्रता की और उन्हें जबरन घसीटते हुए एम्बुलेंस में डाल दिया। दीपके का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विधिक विरोध किया, तो पुलिस ने उनके साथ भी बर्बरतापूर्वक मारपीट की। वे किसी तरह पुलिस की गिरफ्त से भागकर दोबारा जंतर-मंतर पहुंचे और वांगचुक के आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए खुद आमरण अनशन पर बैठ गए। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि वे विदेश से उच्च शिक्षा पाकर देश की सेवा के लिए लौटे हैं, कोई अपराधी नहीं हैं कि उन्हें सड़कों पर इस तरह पीटा जाए।

आंदोलन के विन्यास को और कड़ा करते हुए अभिजीत दीपके ने एलान किया कि अब तक उनकी मांग केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक सीमित थी, परंतु इस दमनकारी कृत्य के बाद अब वे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग पर अड़ गए हैं। उन्होंने साफ किया कि सरकार चाहे जितना बल प्रयोग कर ले, आगामी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक का मार्च ऐतिहासिक होकर रहेगा। उन्होंने देश भर के युवाओं और नागरिकों से हर राज्य में शांतिपूर्ण ढंग से इस दमन के खिलाफ प्रदर्शन करने की विधिक अपील की है।

सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष निगरानी, पत्नी की सख्त विधिक चेतावनी

इस बीच, सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य विन्यास को लेकर एक आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी किया है। अस्पताल के अनुसार, लगातार 20 दिनों तक कड़े उपवास और शरीर में पानी की अत्यधिक कमी (डिहाइड्रेशन) के कारण वांगचुक का शरीर बेहद कमजोर हो चुका है। हालांकि उनके महत्वपूर्ण पैरामीटर (वाइटल्स) अभी नियंत्रण में हैं, लेकिन किसी भी आंतरिक खतरे से बचने के लिए उन्हें डॉक्टरों की विशेष निगरानी, सघन जांच और निरंतर उपचार के विन्यास में रखा गया है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि इससे पहले आरएमएल (RML) अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने जंतर-मंतर पर वांगचुक का हेल्थ चेकअप किया था और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की विधिक सलाह दी थी, जिससे वांगचुक ने इनकार कर दिया था। इसके बाद ही हाई कोर्ट के निर्देशों के तहत पुलिस ने उन्हें सुरक्षित एम्बुलेंस से सफदरजंग शिफ्ट किया।

दूसरी ओर, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बातचीत में केंद्र सरकार और मेडिकल बोर्ड को बेहद कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कल तक उनके पति पूरी तरह से स्वस्थ थे और उन्हें जबरन अस्पताल लाने की कोई विधिक आवश्यकता नहीं थी। आंग्मो ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह उनका मौलिक अधिकार है कि उनकी और उनके निजी डॉक्टरों की लिखित सहमति के बिना सोनम वांगचुक को कोई भी दवा या अनजाना मेडिकल ट्रीटमेंट न दिया जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि अस्पताल की निगरानी के दौरान वांगचुक के स्वास्थ्य को तनिक भी क्षति पहुंचती है, तो वे इसके लिए सीधे प्रशासन और दिल्ली पुलिस को विधिक रूप से उत्तरदायी ठहराएंगी। नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने पुनः दोहराया है कि पुलिस ने केवल न्यायालय के आदेश और डॉक्टरों की सलाह पर ही यह कदम उठाया है।

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