Uttar Pradesh Desk, 🌐 tajnews.in | Saturday, 18 July, 2026, 01:35:00 PM IST.

tajnews.in | लखनऊ: देश की आंतरिक सुरक्षा को चोट पहुँचाने वाले एक बहुत बड़े नेटवर्क के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा अवैध घुसपैठ सिंडिकेट के ठिकानों पर की गई ताबड़तोड़ छापेमारी में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराने और उनके नागरिकता के फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाला यह गिरोह पूरी तरह से विदेशी फंडिंग के सहारे संचालित हो रहा था। जांच एजेंसी को छानबीन के दौरान बिना किसी वैध केवाईसी (KYC) के बैंक खाते खोलने, फर्जी पहचान पत्र बनाने और संदिग्ध संस्थाओं के माध्यम से करोड़ों रुपये के अवैध वित्तीय लेनदेन के पुख्ता विधिक प्रमाण मिले हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब संबंधित संस्थाओं, एनजीओ और दोषी बैंकों के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी मुस्तैदी से शुरू कर दी गई है।
पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में फल-फूल रहा अवैध सिंडिकेट, एनजीओ के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग
प्रवर्तन निदेशालय की आधिकारिक विधिक पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (एटीएस) द्वारा इस खतरनाक सिंडिकेट के खिलाफ पूर्व में की गई दंडात्मक कार्रवाई के बावजूद, पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों और अन्य राज्यों में यह अवैध कारोबार लगातार फल-फूल रहा था। जांच के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि जिन गैर सरकारी संगठनों (NGO) को विदेशों से भारी फंडिंग प्राप्त हो रही थी, उन्होंने जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए करोड़ों रुपये की वित्तीय राशि को बहुत ही शातिर तरीके से अन्य डमी खातों में ट्रांसफर कर दिया था। ईडी ने बृहस्पतिवार को एक साथ व्यापक कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के 17 से अधिक ठिकानों पर दबिश दी, जिसमें कई एनजीओ के परिसर भी शामिल थे। इन स्थानों से डिजिटल साक्ष्य और तमाम वित्तीय विन्यास से जुड़े आपत्तिजनक विधिक दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कड़े सरकारी नियमों के बावजूद ये संस्थाएं विदेशी स्रोतों से लगातार धन अर्जित कर रही थीं।
इस पूरे अवैध धन का मुख्य उद्देश्य भारत में अवैध रूप से आए रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को स्थायी रूप से बसाना, उनके लिए फर्जी भारतीय नागरिकता से जुड़े कूट रचित दस्तावेज तैयार करना और विभिन्न क्षेत्रों में मदरसों व मस्जिदों के अवैध निर्माण को वित्तीय सहायता प्रदान करना था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ईडी बहुत जल्द उन सभी बैंकों को विधिक नोटिस जारी कर जवाब-तलब करने जा रही है, जिनके यहां इन संदिग्ध एनजीओ के एफसीआरए (FCRA) खाते खोले गए थे और जहां विदेशों से सीधे मोटी रकमें मंगाई जा रही थीं। इसके साथ ही, उन छोटे और क्षेत्रीय बैंकिंग विन्यासों के प्रबंधकों पर भी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जिन्होंने विधिक प्रक्रियाओं की घोर अनदेखी करते हुए बिना किसी प्रामाणिक पहचान पत्र और बिना केवाईसी के घुसपैठियों के नाम पर धड़ाधड़ बैंक खाते खोल दिए।
सहारनपुर का देवबंद बना मुख्य पनाहगाह, एटीएस की कड़ी कार्रवाई से सजा का रास्ता साफ
प्रशासनिक और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के भीतर इन बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों ने बेहद गहरी जड़ें जमा रखी हैं। विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के अंतर्गत आने वाला देवबंद कस्बा लंबे समय से इन अवैध नागरिकों की सबसे सुरक्षित पनाहगाह के रूप में उभर कर सामने आया है। बीते पांच वर्षों के दौरान यूपी एटीएस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इन घुसपैठियों के तीन बड़े और सक्रिय मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की है। इसी मुस्तैदी का परिणाम है कि हाल ही में एटीएस द्वारा पकड़े गए एक मॉड्यूल के 15 सक्रिय सदस्यों को देश की राजधानी लखनऊ की एक विशेष अदालत ने विधिक सुनवाई के पश्चात कठोर कारावास की सजा भी सुनाई है।
राज्य सरकार ने भी इस गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा संकट को देखते हुए प्रदेश भर में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों को चिन्हित करने की विधिक प्रक्रिया तेज कर दी है। इन चिन्हित विदेशी नागरिकों को उनके मूल देश वापस भेजने से पहले विधिक हिरासत में रखने के लिए राज्य में आधुनिक डिटेंशन सेंटर बनाने की योजना पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज मुकदमे में बहुत जल्द कई बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं, जिससे इस पूरे देश विरोधी नेटवर्क के वित्तीय विन्यास को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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