uttar pradesh desk, 🌐 tajnews.in | Saturday, 04 July, 2026, 05:58:14 PM IST.

tajnews.in | अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि परिसर में श्रद्धालुओं के रामधन की चोरी और प्रशासनिक लूपहोल्स के विवादों के बीच अब एक ऐसा सनसनीखेज और झकझोर देने वाला नया मामला प्रकाश में आया है, जिसने देश के शीर्ष प्रशासनिक हलकों से लेकर करोड़ों रामभक्तों को स्तब्ध कर दिया है। भारत सरकार के एक पूर्व गृह सचिव द्वारा पूर्ण श्रद्धा भाव से रामलला के चरणों में समर्पित की गई एक किलोग्राम शुद्ध सोने की प्राचीन व बहुमूल्य रामचरितमानस (रामायण) के गायब होने का गंभीर आरोप सामने आया है। वर्तमान में इस ऐतिहासिक और अत्यंत कीमती धार्मिक धरोहर का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इस मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला तथ्य यह है कि देश के इतने बड़े रसूखदार और पूर्व शीर्ष नौकरशाह द्वारा सौंपी गई इस दिव्य भेंट की उन्हें कोई आधिकारिक रसीद तक जारी नहीं की गई, बल्कि रिकॉर्ड मांगने पर उनके साथ अमर्यादित व्यवहार किए जाने का सनसनीखेज दावा किया गया है।
धार्मिक नगरी अयोध्या में रामधन की गिनती और सुरक्षा को लेकर चल रही गहन जांच के बीच इस नए खुलासे ने आग में घी डालने का काम किया है। पूर्व गृह सचिव द्वारा मीडिया के समक्ष किए गए दावों के अनुसार, उन्होंने रामलला के भव्य मंदिर निर्माण और उनकी अलौकिक छवि से प्रभावित होकर अपने परिवार की ओर से एक किलोग्राम शुद्ध सोने की निर्मित अति प्राचीन रामचरितमानस ट्रस्ट के पदाधिकारियों को सौंपी थी। आरोप है कि इतनी बड़ी और मूल्यवान धार्मिक संपत्ति को हस्तगत करने के बावजूद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय द्वारा उन्हें नियमानुसार कोई आधिकारिक रसीद या पावती पत्र निर्गत नहीं किया गया। जब उन्होंने इस ऐतिहासिक भेंट को सरकारी और धार्मिक रिकॉर्ड में दर्ज कराने हेतु कानूनी रसीद की मांग की, तो उन्हें कथित तौर पर गंभीर उपेक्षा, अपमान और तिरस्कार का सामना करना पड़ा।
पूर्व शीर्ष अधिकारी ने सीधे तौर पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के कार्य व्यवहार पर तीखे सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि जब वे अपनी भेंट की आधिकारिक रसीद और उसके सुरक्षित होने का विवरण मांगने पहुंचे, तो उन्हें पहली बार करीब 9 घंटे और दूसरी बार लगभग 4 घंटे तक बिना किसी ठोस कारण के इंतजार करवाया गया। इतने लंबे इंतजार के बाद जब मुलाकात हुई, तो उनके साथ अत्यंत अमर्यादित और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया गया। एक पूर्व गृह सचिव, जिसने देश की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को संभाला हो, उसके साथ राम मंदिर परिसर के भीतर इस प्रकार का बर्ताव किए जाने की खबर ने देश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। आम जनमानस में यह सवाल पूरी तीव्रता से गूंज रहा है कि जब देश के इतने बड़े रसूखदार व्यक्ति के 1 किलो सोने के चढ़ावे का कोई आधिकारिक हिसाब सुरक्षित नहीं रखा गया, तो देश-दुनिया के उन करोड़ों आम रामभक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक भेजे गए गुप्त दान और नगदी का रिकॉर्ड कितना सुरक्षित होगा जो प्रतिदिन कतारों में खड़े होकर दानपात्रों में अपनी गाढ़ी कमाई अर्पित करते हैं।
इस पूरे सनसनीखेज खुलासे के बाद राम मंदिर के चढ़ावे, स्वर्ण आभूषणों के भंडारण और संपूर्ण दान प्रबंधन की सुरक्षा व पारदर्शिता पर बहुत बड़े विधिक और नैतिक सवाल खड़े हो गए हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों, विपक्षी दलों और आम श्रद्धालुओं ने सोशल मीडिया सहित विभिन्न मंचों पर इस घटना को आस्था के साथ घोर खिलवाड़ और आंतरिक कुप्रबंधन का सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त करना शुरू कर दिया है। विपक्ष ने इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच या केंद्रीय जांच एजेंसियों से निष्पक्ष तफ्तीश कराने की मांग तेज कर दी है। यद्यपि इस अत्यंत गंभीर मामले में अभी तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अथवा महासचिव चंपत राय की ओर से कोई भी आधिकारिक वक्तव्य या सफाई सामने नहीं आई है, परंतु इस नए और अभूतपूर्व दावे ने अयोध्या से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है और जांच एजेंसियों पर भी सोने की इस रामायण की खोजबीन करने का भारी दबाव बन गया है।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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