यमुना की कराह: ब्रज में ‘आस्था’ पर गंदगी का साया! NGT के सख्त कदम पर बृज खंडेलवाल का प्रखर आलेख

आर्टिकल Desk, Taj News | Friday, April 24, 2026, 03:00:00 PM IST

Taj News Logo
Taj News
Article Desk
Brij Khandelwal Writer
बृज खंडेलवाल
वरिष्ठ पत्रकार
एवं पर्यावरण विश्लेषक
वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरण विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने अपने इस बेहद मारक और ज़मीनी आलेख में ‘माँ यमुना’ (Yamuna River) की बदहाली और दम तोड़ते ब्रज की तहज़ीब का कड़ा विश्लेषण किया है। दरअसल, उन्होंने बताया है कि कैसे दिल्ली का कच्चा सीवेज और मथुरा-वृंदावन में हुए हज़ारों अवैध निर्माण यमुना को एक ज़हरीले नाले में तब्दील कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के हालिया सख्त नोटिस और आगरा में ‘रिवर कनेक्ट अभियान’ (River Connect Campaign) के संघर्ष की पूरी हकीकत बयां की है। इसलिए, बिना किसी देरी के पढ़िए यह आईना दिखाने वाला आलेख:
HIGHLIGHTS
  1. यमुना की बिगड़ती हालत और 2021 के आदेशों की अवहेलना पर NGT ने जल शक्ति मंत्रालय, यूपी सरकार और मथुरा-वृंदावन नगर निगम को कड़ा नोटिस थमाया है।
  2. दरअसल, दिल्ली यमुना की कुल लंबाई का सिर्फ 22 किमी हिस्सा कवर करती है, लेकिन नदी का 80% प्रदूषण (ज़हरीला सीवेज और इंडस्ट्रियल वेस्ट) यहीं से आता है।
  3. इसके अलावा, ब्रज क्षेत्र (वृंदावन) के डूब क्षेत्र (Floodplains) में 1,266 से अधिक अवैध निर्माण और कच्चे नालों ने नदी के प्राकृतिक बहाव को पूरी तरह रोक दिया है।
  4. हकीकत में, आगरा में यमुना का यह सड़ा हुआ पानी न केवल जलीय जीवों की जान ले रहा है, बल्कि विश्व धरोहर ताजमहल की नींव और उसकी चमक के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है।

संपादकीय संदर्भ: आस्था का चीरहरण, दिल्ली का ज़हर और यमुना बैराज का अधूरा संघर्ष

भारतवर्ष की नदियां केवल जल के स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे इस देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और धार्मिक चेतना की जीवनरेखा हैं। जब हम ‘यमुना’ (Yamuna) का नाम लेते हैं, तो हमारी आंखों के सामने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, ब्रज की पवित्र रज और ताज की ऐतिहासिक परछाइयों का चित्र उभर आता है। लेकिन आज, 2026 में, जब हम इस पवित्र ‘माँ यमुना’ के घाटों पर खड़े होते हैं, तो हमें आचमन करने लायक जल नहीं, बल्कि एक काला, बदबूदार और ज़हरीला नाला दिखाई देता है। यमुनोत्री के पवित्र ग्लेशियर से निकलकर प्रयागराज में गंगा से मिलने वाली यह 1376 किलोमीटर लंबी नदी, जैसे ही देश की राजधानी दिल्ली के वज़ीराबाद बैराज में प्रवेश करती है, इसका ‘नदी’ होने का अस्तित्व ही जैसे समाप्त हो जाता है।

दिल्ली (Delhi) यमुना की कुल लंबाई का मात्र 2 प्रतिशत हिस्सा (लगभग 22 किलोमीटर) कवर करती है, लेकिन यह नदी का लगभग 80 प्रतिशत प्रदूषण यहीं से अपने सीने में समेटती है। हज़ारों अवैध औद्योगिक इकाइयों का बिना ट्रीट किया हुआ रासायनिक कचरा और करोड़ों घरों का कच्चा सीवेज सीधे यमुना में बहा दिया जाता है। जब यही ज़हरीला पानी दिल्ली की सीमाओं से निकलकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश (मथुरा, वृंदावन और आगरा) में प्रवेश करता है, तो यह वहां के निवासियों, जलीय जीवों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए एक मूक मौत का फरमान बन जाता है।

दशकों से ‘यमुना एक्शन प्लान’ (Yamuna Action Plan – YAP) और ‘नमामि गंगे’ जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के नाम पर हज़ारों-अरबों रुपये पानी की तरह बहाए जा चुके हैं। कई सरकारें आईं और गईं, चुनाव दर चुनाव बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन ज़मीनी हकीकत आज भी वही ‘ढाक के तीन पात’ है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने समय-समय पर सरकारों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और नगर निगमों को कड़ी फटकार लगाई है। लेकिन हमारा प्रशासनिक तंत्र इतना संवेदनहीन और भ्रष्टाचार में लिप्त हो चुका है कि उसे अब अदालती आदेशों और जुर्माने का भी कोई खौफ नहीं रहा है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) या तो कागज़ों पर चल रहे हैं, या उनकी क्षमता इतनी कम है कि वे इस अथाह प्रदूषण को साफ करने में पूरी तरह से अक्षम साबित हो रहे हैं।

ब्रज क्षेत्र (मथुरा-वृंदावन) में स्थिति और भी ज्यादा भयावह और हृदयविदारक है। जिन घाटों पर कभी श्रद्धालु श्रद्धा से डुबकी लगाते थे, आज वहां पानी में अमोनिया और ‘फीकल कॉलिफॉर्म’ (Faecal Coliform) की मात्रा इतनी अधिक है कि यह चर्म रोगों और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन रहा है। अतिक्रमणकारियों और भू-माफियाओं ने नदी के डूब क्षेत्र (Floodplains) पर कंक्रीट के जंगल खड़े कर दिए हैं, जिससे नदी का प्राकृतिक बहाव लगभग शून्य हो गया है। आगरा में दुनिया के सात अजूबों में शुमार ‘ताजमहल’ (Taj Mahal) के ठीक पीछे बहने वाली यमुना में उठने वाला सफेद ज़हरीला झाग न केवल इस विश्व धरोहर की खूबसूरती को निगल रहा है, बल्कि वहां पलने वाले जलीय जीवों (मछलियों और कछुओं) की सामूहिक मौत का कारण भी बन रहा है। इसके बावजूद आगरा में वर्षों से लंबित ‘यमुना बैराज’ (Yamuna Barrage) का निर्माण आज तक खटाई में पड़ा है।

हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक बार फिर जल शक्ति मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, और मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण को कड़ा नोटिस थमाया है। यह नोटिस ‘ब्रज वृंदावन देवालय समिति’ की उस याचिका पर दिया गया है, जिसमें 2021 के एनजीटी आदेशों की खुली अवहेलना की बात कही गई है। लेकिन क्या महज़ नोटिस थमाने से इस ‘सिस्टम’ की नींद टूटेगी? क्या कागज़ी घोड़ों को दौड़ाने से यमुना का पानी फिर से आचमन और स्नान योग्य हो पाएगा? इन्हीं तमाम सुलगते और चुभते हुए सवालों पर आगरा के वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरण विश्लेषक बृज खंडेलवाल जी ने अपना एक बेहद प्रखर, शोधपरक और ज़मीनी आलेख लिखा है। ‘रिवर कनेक्ट अभियान’ (River Connect Campaign) जैसे निरंतर चल रहे नागरिक आंदोलनों और पर्यावरणविदों की आवाज़ को एक शक्तिशाली मंच देते हुए, इस आलेख में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि यदि अब भी हमने ‘माँ यमुना’ को बचाने के लिए ठोस और निर्णायक कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियां और इतिहास हमें कभी माफ़ नहीं करेगा। पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल जी का यह 100% मूल और प्रामाणिक आलेख:

यमुना की कराह: ब्रज में आस्था पर गंदगी का साया
NGT का सख्त कदम
_________
बृज खंडेलवाल द्वारा
24 अप्रैल 2026
___________
हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आखिरकार नींद तोड़ी। उसने जल शक्ति मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, मथुरा-वृंदावन नगर निगम, विकास प्राधिकरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को नोटिस थमाया। वजह साफ है: यमुना की बिगड़ती हालत। यह कदम देर से आया, मगर जरूरी था。
यह मामला विजय किशोर गोस्वामी की याचिका से उठा। वे ब्रज वृंदावन देवालय समिति के संयुक्त सचिव हैं और श्री राधा मदन मोहन मंदिर के मुख्य सेवायत भी। उन्होंने साफ कहा; 17 दिसंबर 2021 के आदेशों की खुलेआम अवहेलना हुई है। तब ट्रिब्यूनल ने सीवेज ट्रीटमेंट सुधारने, अतिक्रमण हटाने और किनारों पर हरियाली बढ़ाने का हुक्म दिया था। लेकिन हकीकत वही ढाक के तीन पात। गंदा पानी आज भी बेखौफ बह रहा है। यमुना का दम घुट रहा है。
यह सिर्फ पर्यावरण का मसला नहीं है। यह तहज़ीब का सवाल है। करोड़ों लोगों के लिए यमुना सिर्फ नदी नहीं, “माँ यमुना” है। यही ब्रज की रगों में बहती है। यहीं श्रीकृष्ण की लीलाएं हुईं। भक्त आज भी आचमन करते हैं, आरती उतारते हैं। मगर आज का पानी नहाने लायक भी नहीं रहा। पवित्रता तो दूर की बात है。
विशेषज्ञों ने भी खतरे की घंटी बजाई है। यमुना का पानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ‘क्लास D’ श्रेणी में है। यानी यह पानी केवल जलीय जीवों के लिए ठीक है, इंसानों के लिए नहीं। इसमें घुलित ऑक्सीजन कम है। बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड ज्यादा है। और सबसे खतरनाक—फीकल कॉलिफॉर्म की मात्रा हजारों गुना ऊपर。
दिल्ली का हाल तो और भी बदतर है। यमुना की कुल लंबाई 1376 किलोमीटर है, लेकिन सिर्फ 22 किलोमीटर का दिल्ली हिस्सा 80 फीसदी प्रदूषण ढोता है। यहां फीकल कॉलिफॉर्म 92,000 MPN/100ml तक पहुंच चुका है, जबकि नहाने के लिए सीमा 2,500 है। कई जगहों पर ऑक्सीजन लगभग शून्य है। पानी जिंदा नहीं, सड़ा हुआ लगता है。
दिल्ली रोजाना करोड़ों लीटर गंदा पानी यमुना में उड़ेलती है। 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट होने के बावजूद हालात जस के तस हैं। कहीं पाइपलाइन अधूरी है, कहीं मशीनें बंद हैं। नतीजा: अधपका या कच्चा सीवेज सीधे नदी में गिरता है। यही जहर मथुरा-वृंदावन तक पहुंचता है。
ब्रज में भी हालत कुछ कम नहीं। दर्जनों नाले यमुना में गिरते हैं। कई बिना ट्रीटमेंट के। ऊपर से अतिक्रमण की मार। 2025 के ड्रोन सर्वे में वृंदावन के बाढ़ क्षेत्र में 1,266 अवैध निर्माण मिले। ये न सिर्फ नदी के बहाव को रोकते हैं, बल्कि प्रदूषण को भी बढ़ाते हैं। रेत खनन, गाद जमाव और बंद हो चुकी सहायक नदियां: सब मिलकर यमुना को बीमार बना रहे हैं。

यह भी पढ़ें

बरसात के अलावा महीनों में यमुना का प्रवाह बेहद कम हो जाता है। पानी ठहर जाता है। सड़ांध बढ़ती है। नदी नाला बन जाती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि न्यूनतम जल प्रवाह तय होना चाहिए, ताकि नदी जिंदा रहे। मगर इस पर अमल ढीला है。
अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ पूछते हैं, “सवाल उठता है; इतनी योजनाओं का क्या हुआ? 1990 के दशक से यमुना एक्शन प्लान चल रहा है। फिर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन आया। अरबों रुपये खर्च हुए। घाट बने, पाइप बिछे, प्लांट लगे। लेकिन जमीन पर नतीजा नदारद। यह सब कागजी घोड़े लगते हैं।”
आगरा में इसका असर साफ दिखता है। यमुना का गंदा पानी ताजमहल तक पहुंचता है। झाग, बदरंग पानी और मछलियों की मौत आम बात है। शाम की आरती में दीये तो जलते हैं, मगर पानी मुस्कुराता नहीं। उसकी चमक कहीं खो गई है。
रिवर कनेक्ट से जुड़े एक्टिविस्ट्स कहते हैं, असल बीमारी सिस्टम में है। विभाग अलग-अलग दिशा में भाग रहे हैं। तालमेल गायब है। कानून का डर नहीं। विकास के नाम पर कंक्रीट जंगल उग रहे हैं। नदी का सीना सिकुड़ रहा है。
ब्रज वृंदावन देवालय समिति ने भी साफ कहा; “निर्मल यमुना जल” मंदिर परंपराओं के लिए जरूरी है। मगर हुकूमत के कानों पर जूं नहीं रेंगती। आदेश आते हैं, फाइलों में दब जाते हैं। अतिक्रमण हटाने की बातें होती हैं, मगर बुलडोजर नहीं चलता。
अब रास्ता क्या है? जवाब आसान नहीं, मगर जरूरी है。
पहला कदम; मथुरा-वृंदावन के सभी नालों को तुरंत ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा जाए। प्लांट की क्षमता बढ़े और निगरानी सख्त हो。
दूसरा: बाढ़ क्षेत्र से अवैध निर्माण हटाने की समयबद्ध मुहिम चले। 1,266 निर्माण सिर्फ आंकड़ा नहीं, खतरे की घंटी हैं。
तीसरा: साल भर न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित हो। ऊपर के बैराज से पानी छोड़ा जाए। सहायक नदियों को जिंदा किया जाए。
चौथा: नदी को “जीवित इकाई” मानकर सख्त कानून बने। उल्लंघन पर भारी जुर्माना हो。
साथ ही, समाज को भी आगे आना होगा। आगरा में हालात पर रिवर कनेक्ट अभियान के कार्यकर्ताओं का दर्द छलकता है। डॉ देवाशीष भट्टाचार्य ने तल्ख़ लहजे में कहा, “आगरा में यमुना अब नदी नहीं, ज़हरीली नाली बन चुकी है। यह गंदा पानी इंसानों की सेहत के लिए ख़तरा है और ताजमहल जैसे ऐतिहासिक स्मारकों पर भी असर डाल रहा है।”
यमुना भक्त डॉ ज्योति खंडेलवाल और विशाल झा कहते हैं, “हमने बरसों से यमुना बैराज की मांग उठाई है, ताकि पानी का स्तर सुधरे और प्रवाह बना रहे, मगर सरकार की रफ़्तार कछुए से भी धीमी है। हर साल वादे होते हैं, हर साल फाइलें घूमती हैं, मगर ज़मीन पर कुछ नहीं बदलता। अगर अब भी हुकूमत ने होश नहीं लिया, तो आने वाली नस्लें हमें माफ़ नहीं करेंगी।”
रिवर एक्टिविस्ट पद्मिनी अय्यर कहती हैं, “NGT का नोटिस एक चेतावनी है। आखिरी नहीं, मगर अहम। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भी कागज बनकर रह जाएगा।”
यमुना ब्रज की धड़कन है। अगर यह धड़कन थम गई, तो ब्रज की रूह सूख जाएगी। बात साफ है; यमुना को बचाइए, वरना इतिहास हमें माफ नहीं करेगा。
अब वक्त है। फैसले का। इरादे का। और असली कार्रवाई का。

Pawan Singh

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News
#YamunaPollution, #यमुना_प्रदूषण, #NationalGreenTribunal, #NGTNotice, #BrijKhandelwal, #बृज_खंडेलवाल_आलेख, #TajNewsOpinion, #AgraNews, #MathuraVrindavan, #RiverConnectCampaign, #SaveYamuna, #TajNewsViral

Leave a Comment