पुलिस का दावा—सिलबट्टे से हमला कर सोनू रावत की हत्या के बाद शव बक्से में बंद किया गया; सामान शिफ्ट करने के बहाने किराये पर लिया लोडर हाईवे किनारे बक्सा छोड़ने में इस्तेमाल हुआ
उत्तर प्रदेश डेस्क, Taj News | 🌐 tajnews.in | गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026, 04:12:00 AM IST.

उन्नाव, 22 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में हाईवे किनारे लावारिस बक्से में युवक का शव मिलने के मामले में पुलिस ने उसकी पत्नी समेत तीन वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, मृतक की पहचान सोनू रावत के रूप में हुई है। जांच में आरोप है कि सोनू की हत्या के बाद शव को चादर और कंबल में लपेटकर बक्से में रखा गया और फिर लोडर से ले जाकर हाईवे किनारे छोड़ दिया गया। मामले में एक नाबालिग को भी संरक्षण में लिया गया है।
पुलिस के अनुसार, 20 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे उन्नाव-लालगंज हाईवे पर एक निजी अस्पताल के सामने बक्सा पड़ा होने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बक्सा खुलवाया तो उसके अंदर युवक का शव मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने जांच के लिए पांच टीमें गठित कीं।
CCTV फुटेज से लोडर तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान पुलिस ने गदनखेड़ा बाईपास और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। पुलिस का दावा है कि फुटेज में एक लोडर बक्सा लेकर जाता दिखाई दिया। वाहन के पंजीकरण नंबर के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई और लोडर के मालिक तक पहुंचा गया।
पुलिस के मुताबिक, कंचननगर में किराये पर रहने वाली नेहा रावत ने कमरा खाली करने और सामान शिफ्ट करने के बहाने 1,200 रुपये में लोडर किराये पर लिया था। पूछताछ के बाद जांच मृतक के घर और उसके परिचितों तक पहुंची। पुलिस ने नेहा के साथ जितेंद्र सिंह उर्फ राहुल और तौहीद की कथित भूमिका की जांच की।
पुलिस का आरोप है कि नेहा और जितेंद्र सोनू की हत्या में शामिल थे, जबकि तौहीद ने शव को ले जाने में मदद की। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होनी है।
विवाद के बाद हत्या करने का आरोप
पुलिस के अनुसार, 19 और 20 अक्टूबर की दरमियानी रात सोनू घर लौटा था। उसके और नेहा के बीच विवाद होने की बात सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि विवाद के दौरान सोनू के सिर में चोट लगी, जिसके बाद जितेंद्र को बुलाया गया। आरोप है कि सिलबट्टे से सिर पर कई वार किए गए, जिससे सोनू की मौत हो गई।
पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद शव को चादर और कंबल में लपेटकर बक्से में रखा गया। कमरे में फैले खून को साफ करने की कोशिश किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। हालांकि, घटनाक्रम और प्रत्येक आरोपी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही सामने आएगा।
श्रमिकों की मदद से बक्सा लोडर में रखने का दावा
पुलिस के अनुसार, बक्से को लोडर में रखने और ले जाने के लिए दो श्रमिकों की मदद ली गई। रिपोर्टों में इस काम के लिए 10 हजार रुपये दिए जाने का उल्लेख है। पुलिस का दावा है कि तौहीद अपने एक नाबालिग साथी के साथ मौके पर पहुंचा और बक्से को लोडर में रखकर हाईवे किनारे छोड़ दिया गया।
पुलिस ने नेहा रावत, जितेंद्र सिंह उर्फ राहुल और तौहीद को गिरफ्तार किया है, जबकि नाबालिग को संरक्षण में लिया गया है। मृतक के भाई आशु की शिकायत पर हत्या समेत संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सिलबट्टा, बक्सा और लोडर बरामद करने का दावा
पुलिस के मुताबिक, कथित वारदात में इस्तेमाल सिलबट्टा, शव रखने वाला बक्सा और लोडर बरामद किया गया है। पुलिस ने तौहीद के पास से चार हजार रुपये और नाबालिग के पास से 4,200 रुपये मिलने की बात भी कही है।
लोडर के मालिक की भूमिका की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, किसी वाहन को किराये पर देने या उसका मालिक होने भर से किसी व्यक्ति की अपराध में संलिप्तता साबित नहीं होती। इस संबंध में जांच से सामने आने वाले साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।
सोनू और नेहा के संबंधों को लेकर भी जांच
पुलिस पूछताछ के मुताबिक, नेहा की पहले शादी हुई थी और उससे चार बेटियां हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि बाद में उसकी सोनू से नजदीकियां बढ़ीं और दोनों करीब दो साल तक साथ रहने के बाद अप्रैल 2018 में कोर्ट मैरिज की थी। सोनू से उसका एक बेटा भी बताया गया है।
पुलिस ने घरेलू विवाद और सोनू की कथित नशे की आदत को घटना की पृष्ठभूमि से जोड़कर जांच की है। पड़ोसियों के बयान में भी दोनों के बीच पहले विवाद होने की बात सामने आने का दावा किया गया है। ये विवरण जांच का हिस्सा हैं; इनसे किसी आरोपी की भूमिका या हत्या का आरोप अपने-आप सिद्ध नहीं होता।
मेरठ के ड्रम हत्याकांड से तुलना
बक्से में शव मिलने की घटना के बाद मार्च 2025 में मेरठ में सामने आए उस मामले की भी चर्चा हो रही है, जिसमें एक व्यक्ति का शव नीले ड्रम में छिपाए जाने का आरोप लगा था। हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं और उनकी जांच स्वतंत्र रूप से उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए।
उन्नाव मामले में पुलिस ने CCTV फुटेज और वाहन की पहचान के आधार पर जांच आगे बढ़ाने का दावा किया है। अब जांच में घटनाक्रम, प्रत्येक आरोपी की कथित भूमिका और बरामद साक्ष्यों की पुष्टि अहम होगी। गिरफ्तार लोगों के खिलाफ आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
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