Astro Desk, Taj News | Friday, 20 March 2026, 05:22:11 AM IST

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विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक कवरेजचैत्र नवरात्रि दूसरा दिन (Chaitra Navratri Day 2): सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। आज 20 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है। आज के पावन दिन पर मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। ‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या होता है। इसके अलावा, ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली होता है। इसलिए, मां ब्रह्मचारिणी का शाब्दिक अर्थ तप का आचरण करने वाली देवी है। माता का यह स्वरूप अत्यंत ज्योतिर्मय, भव्य और अद्भुत है। मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करने से मनुष्य के जीवन में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की भारी वृद्धि होती है। इसके साथ ही, जीवन के कठिन से कठिन संघर्षों में भी व्यक्ति का मन विचलित नहीं होता है। साधक को हर कार्य में निश्चित रूप से सफलता प्राप्त होती है। आइए, आज हम मां ब्रह्मचारिणी की कथा, पूजा विधि, प्रिय भोग और चमत्कारी मंत्रों को विस्तार से जानते हैं।
- मां का दिव्य स्वरूप: माता हमेशा श्वेत वस्त्र धारण करती हैं। उनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है।
- माता का प्रिय भोग: मां ब्रह्मचारिणी को चीनी (शक्कर) और पंचामृत का भोग अत्यंत प्रिय है। इससे आयु में वृद्धि होती है।
- प्रिय रंग और पुष्प: पूजा में माता को सफेद या पीले रंग के वस्त्र और वटवृक्ष के फूल या लाल कमल अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है।
- आध्यात्मिक चक्र: माता की आराधना से साधक का ‘स्वाधिष्ठान चक्र’ जाग्रत होता है। फलस्वरूप, सभी मानसिक विकार दूर हो जाते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी का अलौकिक स्वरूप
मां दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप पूर्ण रूप से तपस्विनी का है। मां ब्रह्मचारिणी हमेशा नंगे पैर पैदल ही विचरण करती हैं। माता ने अत्यंत सादे और श्वेत रंग के वस्त्र धारण किए हुए हैं। उनके दाहिने हाथ में एक रुद्राक्ष की जप माला है। इसके अलावा, बाएं हाथ में एक पवित्र कमंडल है। माता का यह शांत और सौम्य रूप भक्तों को असीम शांति प्रदान करता है। वे क्रोध, अहंकार और स्वार्थ से पूरी तरह मुक्त हैं। इसलिए, जो भी भक्त सच्चे मन से इनकी आराधना करता है, उसका मन भी पवित्र हो जाता है। माता अपने भक्तों को असीमित ज्ञान और विवेक प्रदान करती हैं। नतीजतन, व्यक्ति अपने जीवन के हर फैसले को सही ढंग से ले पाता है।
मां ब्रह्मचारिणी की पौराणिक और रोचक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता ने पूर्व जन्म में हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। उस समय देवर्षि नारद ने उन्हें एक महत्वपूर्ण उपदेश दिया था। नारद मुनि के उपदेशानुसार, माता ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या शुरू कर दी। इसी अत्यंत कठिन तपस्या के कारण ही उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम दिया गया।
कथा के अनुसार, माता ने एक हजार वर्ष तक केवल फल-फूल खाकर जीवन व्यतीत किया। इसके बाद, उन्होंने सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक (साग) पर निर्वाह किया। फिर कुछ दिनों तक उन्होंने कठिन उपवास रखे। माता खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के भयानक कष्ट सहती रहीं। इसके अलावा, उन्होंने तीन हजार वर्षों तक केवल टूटे हुए बिल्व पत्र खाकर भगवान शिव की आराधना की। बाद में उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी पूरी तरह छोड़ दिया। कई हजार वर्षों तक वे निर्जल और निराहार रहकर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही उनका एक नाम ‘अपर्णा’ भी पड़ गया।
अंततः माता की इस अत्यंत कठोर तपस्या से तीनों लोक पूरी तरह हाहाकार कर उठे। देवता, ऋषि, सिद्धगण और मुनि सभी ने माता की इस तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कार्य बताया। अंत में भगवान ब्रह्मा जी ने आकाशवाणी के माध्यम से माता को संबोधित किया। ब्रह्मा जी ने कहा कि आज तक किसी ने ऐसी कठोर तपस्या बिल्कुल नहीं की है। तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी। भगवान शिव तुम्हें पति रूप में अवश्य प्राप्त होंगे। इस कथा से हमें यह महान शिक्षा मिलती है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन को कभी विचलित नहीं करना चाहिए।
मां ब्रह्मचारिणी की संपूर्ण और सटीक पूजा विधि
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अत्यंत निर्मल और शांत मन से करनी चाहिए। आज सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ सफेद या पीले वस्त्र धारण करें। फिर पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। अब कलश देवता और नवग्रहों की पूजा करें। इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर को पंचामृत से स्नान कराएं। स्नान के बाद माता को रोली, अक्षत, चंदन और कुमकुम का तिलक लगाएं।
माता को लाल कमल या वटवृक्ष के फूल अत्यंत प्रिय हैं। इसलिए, माता के चरणों में ये पुष्प अर्पित करें। इसके बाद माता को पान, सुपारी, लौंग और इलायची अर्पित करें। मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर (चीनी) का भोग सबसे अधिक प्रिय है। इसलिए, आज के दिन माता को मिश्री, चीनी या पंचामृत का भोग जरूर लगाएं। मान्यता है कि शक्कर का भोग लगाने से परिवार के सभी सदस्यों की आयु लंबी होती है। इसके अलावा, अकाल मृत्यु का भय हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। धूप और दीप जलाकर माता की विधि-विधान से आरती करें। अंत में माता के चमत्कारी मंत्रों का 108 बार जाप करें।
मां ब्रह्मचारिणी के अचूक और सिद्ध मंत्र
माता को प्रसन्न करने के लिए मंत्र जाप सबसे उत्तम और सरल माध्यम है। आप रुद्राक्ष की माला से इन पवित्र मंत्रों का पूरे भक्तिभाव से जाप करें। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होंगी।
1. ध्यान मंत्र:
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
2. बीज मंत्र:
ह्रीं श्री अम्बिकायै नमः।
3. प्रार्थना मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
विद्यार्थियों के लिए माता की पूजा का विशेष महत्व
छात्रों और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विशेष फलदायी होती है। माता ज्ञान, तप और वैराग्य की साक्षात देवी हैं। जो भी विद्यार्थी एकाग्रता की कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें माता की आराधना अवश्य करनी चाहिए। माता की कृपा से मन पूरी तरह एकाग्र होता है। स्मरण शक्ति में भारी वृद्धि होती है। इसके अलावा, प्रतियोगिता परीक्षाओं में बैठने वाले युवाओं को माता ब्रह्मचारिणी का व्रत जरूर रखना चाहिए। इससे उन्हें मनचाही सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होती है।
ज्योतिषीय लाभ: मंगल ग्रह के दोष होते हैं शांत
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को पूरी तरह नियंत्रित करती हैं। इसलिए, माता की विधिवत पूजा करने से कुंडली में मंगल ग्रह के सभी बुरे प्रभाव तुरंत समाप्त हो जाते हैं। जिन जातकों की कुंडली में मांगलिक दोष है, उन्हें आज के दिन विशेष पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा, रक्त संबंधी बीमारियां और भूमि विवाद भी माता की कृपा से सुलझ जाते हैं। माता की आराधना से व्यक्ति के भीतर साहस और पराक्रम का भारी संचार होता है। वह अपने जीवन की हर बाधा को आसानी से पार कर लेता है।
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Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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