कासगंज में BDO का कथित कमीशन मांगने वाला वीडियो वायरल, वरिष्ठ अधिकारियों तक रकम पहुंचाने के दावे की जांच

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पटियाली के संजीव कुमार से जुड़ा वीडियो चर्चा में; सरकारी कामों के बदले 10 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप, CDO ने निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए

उत्तर प्रदेश डेस्क, Taj News | 🌐 tajnews.in | गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026, 01:45:00 AM IST.

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उत्तर प्रदेश डेस्क

कासगंज, 22 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के पटियाली विकासखंड में तैनात अधिकारी संजीव कुमार से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है। वीडियो में सरकारी कार्यों के बदले कमीशन मांगने और रकम का हिस्सा वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कहे जाने का दावा किया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद मुख्य विकास अधिकारी (CDO) ने निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।

HIGHLIGHTS
  • कमीशन का कथित वीडियो वायरल: पटियाली विकासखंड में तैनात अधिकारी संजीव कुमार का सरकारी कामों में कमीशन मांगने का कथित वीडियो सामने आने से हड़कंप।
  • 10 प्रतिशत कमीशन का आरोप: वायरल क्लिप में कथित तौर पर 10% कमीशन मांगने और उसमें से 4% हिस्सा वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही गई।
  • सीडीओ ने दिए जांच के आदेश: मुख्य विकास अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने वीडियो की निष्पक्ष जांच कराकर साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
  • आधिकारिक पुष्टि का इंतजार: वीडियो की सत्यता, कथित बातचीत का समय और आरोपों की कानूनी स्थिति अभी पूरी तरह जांच के अधीन।

21 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, वायरल वीडियो में सरकारी कार्यों के लिए 10 प्रतिशत कमीशन मांगने की कथित बात सामने आई है। वीडियो में चार प्रतिशत रकम जिलाधिकारी (DM), मुख्य विकास अधिकारी (CDO) और जिला विकास अधिकारी (DDO) तक पहुंचाने का दावा भी बताया गया है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें कही गई बातों के संदर्भ की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल जांच के दायरे में मौजूद दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

वीडियो में कमीशन मांगने और धमकी देने का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में कथित तौर पर सरकारी काम कराने के लिए पूरी रकम लाने की बात कही गई है। इसमें अभद्र भाषा के इस्तेमाल और विरोध करने वालों को जेल भेजने की चेतावनी दिए जाने का दावा भी किया गया है।

यदि वीडियो और उसमें दर्ज कथित बयान प्रमाणित होते हैं, तो मामला सरकारी कार्यों में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रिकॉर्डिंग कब और किन परिस्थितियों में की गई, वीडियो पूरा है या उसका कोई हिस्सा ही प्रसारित हुआ है और कथित बातचीत का वास्तविक संदर्भ क्या था।

इन सवालों के जवाब के लिए वीडियो की प्रामाणिकता की जांच और संबंधित पक्षों का बयान महत्वपूर्ण होगा।

CDO ने दिए निष्पक्ष जांच के निर्देश

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य विकास अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कराने और तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मामले से उच्च प्रशासनिक स्तर को अवगत कराया जा रहा है।

जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो वास्तविक है या नहीं, कथित बयान किस संदर्भ में दिया गया और किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है या नहीं। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्ट में जांच के अंतिम निष्कर्ष या किसी अधिकारी के खिलाफ की गई कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है।

वरिष्ठ अधिकारियों तक कमीशन पहुंचाने के दावे की पुष्टि बाकी

वायरल वीडियो से जुड़े दावों में जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला विकास अधिकारी तक कमीशन पहुंचाने की कथित बात भी शामिल है। ये आरोप गंभीर हैं, लेकिन वीडियो में किसी पद या अधिकारी का उल्लेख होने भर से उसकी संलिप्तता साबित नहीं होती।

जांच में वीडियो की प्रामाणिकता, कथित धनराशि के लेनदेन से जुड़े साक्ष्य, सरकारी कार्यों के दस्तावेज और संबंधित अधिकारियों के बयान अहम होंगे। जांच निष्कर्ष सामने आने तक किसी अधिकारी को कथित लेनदेन में शामिल बताना उचित नहीं होगा।

फिलहाल प्रशासन की ओर से जांच के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और उनके आधार पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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ठाकुर पवन सिंह

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