SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने उठाया; ममता बनर्जी, मल्लिकार्जुन खरगे और तेजस्वी यादव समेत विपक्षी नेताओं ने की मुलाकात
राष्ट्रीय डेस्क 🌐 tajnews.in | शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026, 09:20 PM IST

नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर विपक्ष ने अपना अभियान तेज कर दिया है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को INDIA गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से औपचारिक मुलाकात की और अपना विस्तृत ज्ञापन सौंपा। मुलाकात के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने ‘वोट चोरी’ और चुनावी विसंगतियों पर विपक्ष की चिंताओं को गंभीरता से सुना तथा आगे की संवैधानिक कार्रवाई के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा।
राहुल गांधी के इस बयान को राष्ट्रपति की ओर से विपक्ष के राजनीतिक आरोपों की औपचारिक पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार राहुल गांधी ने मीडिया के समक्ष यह दावा किया है, हालांकि राष्ट्रपति भवन की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान स्वतंत्र रूप से जारी नहीं हुआ है।
राष्ट्रपति के सामने क्या मुद्दे उठाए गए?
INDIA गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ी आपत्तियां दर्ज कराईं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की केंद्रीकृत व्यवस्था से नागरिकों के मताधिकार प्रभावित हो रहे हैं, जिससे निष्पक्ष चुनाव प्रणाली पर आंच आ रही है।
प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव और CPI(M) महासचिव एमए बेबी सहित कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ सांसद शामिल रहे। गठबंधन ने राष्ट्रपति से सर्वोच्च संवैधानिक संरक्षक के रूप में इस मामले में हस्तक्षेप करने और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग की।
तीन दिनों के सड़क प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति भवन पहुंचा विपक्ष
राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले विपक्षी दलों ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार तीन दिनों तक आक्रामक विरोध प्रदर्शन किया। मंगलवार को निर्वाचन आयोग के दफ्तर की ओर मार्च निकाल रहे विपक्षी नेताओं को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया था। इसके बाद बुधवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रमुख सांसदों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।
गुरुवार को विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट पर बैठकर शांतिपूर्ण धरना दिया और लोकतंत्र व मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की शपथ ली। सड़क पर तीन दिनों के निरंतर दबाव के बाद शुक्रवार को राष्ट्रपति से हुई यह मुलाकात विपक्ष के राष्ट्रव्यापी अभियान का सबसे अहम चरण साबित हुई है।
SIR और आयोग के आंतरिक मतभेदों पर तकरार
सियासी विवाद का मुख्य बिंदु मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) बना हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि इस पुनरीक्षण के तहत मनमाने नियमों और तकनीकी बदलावों के जरिए लक्षित रूप से मतदाताओं के नाम काटे गए। यह मामला तब और गरमा गया जब मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा सामने आया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों के दौरान आयोग के कई फैसलों पर कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां और असहमतियां दर्ज कराई थीं।
विपक्षी दलों ने इन असहमतियों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा मनमाने ढंग से फैसले थोपने का साक्ष्य करार दिया है। हालांकि, विधि विशेषज्ञों का मानना है कि बहु-सदस्यीय आयोग में विचारों की भिन्नता अपने आप में चुनावी अनियमितता या ‘वोट चोरी’ का पक्का प्रमाण नहीं होती। इन आरोपों की निष्पक्ष पुष्टि के लिए प्रशासनिक आदेशों और आंकड़ों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
निर्वाचन आयोग का रुख
वहीं दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने इन सभी राजनीतिक आरोपों को निराधार बताया है। आयोग का कहना है कि संस्थागत बैठकों में चुनाव आयुक्तों के बीच विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग राय आना एक स्वाभाविक और स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार सभी अंतिम आदेश मौजूदा चुनावी कानूनों और तय नियमावली के अनुरूप ही जारी किए गए हैं और मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना ही SIR का एकमात्र उद्देश्य रहा है।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से विपक्षी नेताओं की इस उच्चस्तरीय मुलाकात के बाद अब गेंद संवैधानिक प्रक्रियाओं और विपक्ष द्वारा पेश किए जाने वाले पुख्ता साक्ष्यों के पाले में है। जहां विपक्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने और SIR की न्यायिक जांच पर अड़ा है, वहीं आयोग अपने प्रशासनिक कदमों को पारदर्शी बता रहा है। आने वाले दिनों में यह टकराव संसद के गलियारों से लेकर कानूनी मंचों तक और तेज होने के पूरे आसार हैं।

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