बारिश के बीच सत्य निकेतन में भरभराकर गिरी इमारत, हॉस्टल के छात्रों के दबे होने की आशंका

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40-50 छात्रों के मौजूद होने की जानकारी; कई लोगों को मलबे से निकाला गया, NDRF समेत कई एजेंसियां रेस्क्यू में जुटीं, आसपास की इमारतें भी खाली कराई गईं

राष्ट्रीय डेस्क, 🌐 tajnews.in | रविवार, 6 सितंबर 2026, 03:29:15 PM IST

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tajnews.in | नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में लगातार बारिश के बीच रविवार दोपहर दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के बाद मलबे में कई लोगों, खासकर छात्रों के दबे होने की आशंका जताई गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इमारत में हॉस्टल या पीजी संचालित हो रहा था और हादसे के समय वहां करीब 40 से 50 छात्रों के मौजूद होने की बात सामने आई है। हालांकि मलबे में वास्तव में कितने लोग फंसे हैं, इसकी आधिकारिक संख्या तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी।

हादसा मोती बाग स्थित शिव मंदिर के पास सत्य निकेतन में दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। इमारत गिरते ही आसपास अफरातफरी मच गई। सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस और अन्य राहत-बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे में फंसे लोगों को तलाशने का अभियान शुरू किया।

HIGHLIGHTS
  • दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में भरभराकर गिरी बहुमंजिला इमारत।
  • इमारत में चल रहा था हॉस्टल, हादसे के वक्त 40-50 छात्रों के मौजूद होने की आशंका।
  • NDRF, डीडीएमए और फायर सर्विस ने संभाला मोर्चा, कई को सुरक्षित निकाला गया।
  • लगातार बारिश के बीच एहतियातन आसपास की अन्य इमारतों को भी कराया गया खाली।

मलबे से छात्रों को निकालने में जुटीं टीमें

भारी मलबे के बीच राहतकर्मी बेहद सावधानी से बचाव अभियान चला रहे हैं। शुरुआती जानकारी में एक से अधिक छात्रों को मलबे से सुरक्षित निकाल लिए जाने की बात सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मलबे के नीचे से लोगों के मदद के लिए पुकारने की आवाजें भी सुनाई दीं।

रेस्क्यू टीमों का प्रयास है कि मलबा हटाते समय अंदर फंसे लोगों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। इसके लिए संभावित रूप से लोगों के दबे होने वाले हिस्सों की पहचान कर सावधानी से मलबा हटाया जा रहा है।

40-50 छात्रों के मौजूद होने की सूचना

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिस इमारत में हॉस्टल या पीजी चल रहा था, उसमें हादसे के समय करीब 40 से 50 छात्र मौजूद हो सकते थे। हालांकि यह संख्या प्रारंभिक सूचना पर आधारित है और प्रशासन ने अभी तक मलबे में फंसे लोगों की अंतिम संख्या की पुष्टि नहीं की है।

इमारत के अचानक गिरने से कई लोग मलबे में दब गए। ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य पहले यह पता लगाना है कि अंदर कितने लोग फंसे हैं और उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जाए।

आसपास की इमारतें भी खाली कराई गईं

इमारत गिरने और लगातार बारिश के बीच प्रशासन ने आसपास की इमारतों को भी एहतियातन खाली कराया। अधिकारियों की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को निकालने के साथ घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

मौके पर लोगों की भीड़ जुटने के कारण पुलिस ने आसपास के क्षेत्र को नियंत्रित करने की कोशिश की, ताकि राहत-बचाव अभियान में बाधा न आए।

NDRF समेत कई एजेंसियां मैदान में

हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें राहत-बचाव अभियान में जुटी हैं।

अतिरिक्त उपकरण भी मौके पर भेजे गए हैं। बचाव दल मलबे के भीतर फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और हर संभावित हिस्से की जांच की जा रही है।

सीएम रेखा गुप्ता ने युद्धस्तर पर बचाव के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित एजेंसियां युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार DDMA, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें समन्वय के साथ काम कर रही हैं। आसपास की इमारतों को एहतियातन खाली कराया गया है। उन्होंने फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने की बात कही।

बारिश के बीच हादसा, वजह अभी साफ नहीं

इमारत गिरने की घटना ऐसे समय हुई है जब दिल्ली में लगातार बारिश हो रही है। हालांकि इमारत गिरने की वास्तविक वजह अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं हुई है। कुछ रिपोर्टों में निर्माण कार्य से जुड़े पहलुओं का उल्लेख है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल प्रशासन और राहत एजेंसियों का पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। इमारत की स्थिति, निर्माण से जुड़े पहलुओं और हादसे के वास्तविक कारणों की जांच बाद में की जाएगी।

रेस्क्यू पूरा होने तक तस्वीर साफ नहीं

सत्य निकेतन की घटना में फिलहाल सबसे बड़ी चिंता मलबे में फंसे लोगों की संख्या और उनकी स्थिति को लेकर है। 40-50 छात्रों के मौजूद होने की प्रारंभिक सूचना ने चिंता बढ़ा दी है, लेकिन वास्तविक आंकड़ा राहत-बचाव अभियान पूरा होने और प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट होगा।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और मलबे से लोगों को निकालने के लिए टीमें लगातार काम कर रही हैं।

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Pawan Kumar Singh Editor in Chief Taj News

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