रिमझिम बारिश में कीर्तन और परिक्रमा के बीच हुआ लोकार्पण; हर धर्म-वर्ग के लिए खुले रहेंगे गुरुद्वारे के द्वार, बढ़ती संगत के लिए दोगुना होगा लंगर हॉल
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | रविवार, 6 सितंबर 2026, 01:53:12 PM IST

tajnews.in | आगरा। ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु का ताल में दो वर्ष से चल रही कार सेवा रविवार को एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंची। लंबे समय से चल रहे निर्माण कार्य के बाद गुरुद्वारे की भव्य दर्शन ड्योढ़ी तैयार हो गई। रिमझिम बारिश के बीच कीर्तन करते हुए निकली परिक्रमा जब दर्शन ड्योढ़ी पर पहुंची तो कीर्तन और अरदास के बाद इसे संगत को समर्पित किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने नए प्रवेश द्वार से गुरुद्वारा परिसर में प्रवेश किया।
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह की अगुवाई में हुए आयोजन में बड़ी संख्या में संगत शामिल हुई। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। कीर्तन और परिक्रमा के साथ नए द्वार को संगत के लिए खोलना दो वर्ष से चल रही कार सेवा के पूर्ण होने का अवसर भी बना।
दो साल की कार सेवा के बाद पूरा हुआ निर्माण
दर्शन ड्योढ़ी के निर्माण की कार सेवा पिछले दो वर्षों से चल रही थी। रविवार, 6 सितंबर को निशान साहिब के सानिध्य में कीर्तन के साथ प्रभात फेरी और परिक्रमा निकाली गई। संगत जब नए प्रवेश द्वार पर पहुंची तो वहां कीर्तन के बाद अरदास हुई। अरदास पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं ने दर्शन ड्योढ़ी से गुरुद्वारा परिसर में प्रवेश किया।
गुरु तेग बहादुर साहिब के ऐतिहासिक स्थान की भव्यता में जुड़ा नया अध्याय
गुरुद्वारा गुरु का ताल सिख इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां आने वाली संगत के लिए दर्शन ड्योढ़ी मुख्य प्रवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुरुद्वारा प्रबंधन के अनुसार नए प्रवेश द्वार को धार्मिक और ऐतिहासिक गरिमा के अनुरूप भव्य स्वरूप दिया गया है।
मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह के अनुसार श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के ऐतिहासिक स्थान गुरुद्वारा गुरु का ताल की भव्यता में यह विशाल प्रवेश द्वार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाली संगत इसी द्वार से गुरुद्वारा परिसर में प्रवेश करेगी।
दर्शन ड्योढ़ी पर नहीं लगाया गया दरवाजा
नए प्रवेश द्वार की खास बात यह है कि दर्शन ड्योढ़ी पर कोई दरवाजा नहीं लगाया गया है। गुरुद्वारा परिसर के भीतर मुख्य सीढ़ियों पर बने प्रवेश द्वार पर भी दरवाजा नहीं लगाया गया।
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह ने बताया कि मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह की भावना है कि गुरुद्वारे के द्वार हर धर्म, जाति और वर्ग के लोगों के लिए हर समय खुले रहें। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए प्रवेश द्वारों पर दरवाजा नहीं लगाया गया है।
24 घंटे लंगर की सेवा, कोरोना काल में भी जारी रहा भोजन
गुरुद्वारा गुरु का ताल की सेवा परंपरा में लंगर का विशेष महत्व है। जसबीर सिंह के अनुसार कोरोना काल जैसे कठिन दौर में भी गुरुद्वारा साहिब को एक दिन के लिए बंद नहीं किया गया था। जरूरतमंदों और दूसरे शहरों से पैदल गुजर रही संगत के लिए भोजन सेवा जारी रही।
गुरुद्वारा प्रबंधन के अनुसार यहां 24 घंटे लंगर चलता है और इसमें धर्म, जाति या वर्ग का भेद नहीं किया जाता। कठिन परिस्थितियों में भी भोजन सेवा जारी रखने की परंपरा गुरुद्वारे की सेवा भावना को रेखांकित करती है।
बढ़ती संगत के लिए दोगुना होगा लंगर हॉल
दर्शन ड्योढ़ी के निर्माण के साथ गुरुद्वारा प्रबंधन ने अब अगली बड़ी सुविधा के विस्तार की तैयारी शुरू कर दी है। पिछले कुछ वर्षों में दूसरे प्रदेशों से आने वाली संगत और धार्मिक पर्यटकों की संख्या बढ़ने के कारण लंगर व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा है। गुरु पर्व और अन्य प्रमुख आयोजनों में स्थानीय स्तर पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इसी जरूरत को देखते हुए लंगर हॉल की क्षमता दोगुनी करने की योजना तैयार की गई है। इससे अधिक संख्या में संगत को एक साथ लंगर की सुविधा मिल सकेगी और प्रतीक्षा का समय कम करने में मदद मिलेगी।
भाप से लंगर तैयार करने की आधुनिक रसोई की योजना
लंगर हॉल के विस्तार के साथ अत्याधुनिक रसोई बनाने की भी योजना है। गुरुद्वारा प्रबंधन के अनुसार इसमें आधुनिक तकनीक आधारित मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। गैस के बजाय भाप से लंगर तैयार करने की आधुनिक तकनीक अपनाने की योजना है।
प्रबंधन के मुताबिक लंगर हॉल और आधुनिक रसोई दोनों परियोजनाओं पर जल्द निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य बढ़ती संगत के अनुरूप भोजन तैयार करने और परोसने की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
बारिश में भी जारी रहा कीर्तन और परिक्रमा
दर्शन ड्योढ़ी के लोकार्पण का कार्यक्रम रिमझिम बारिश के बीच हुआ। सुबह निशान साहिब के सानिध्य में संगत ने कीर्तन करते हुए प्रभात फेरी और परिक्रमा निकाली। बारिश के बावजूद श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ इसमें शामिल रहे।
परिक्रमा के दर्शन ड्योढ़ी तक पहुंचने के बाद कीर्तन और अरदास हुई। इसके बाद संगत ने नए प्रवेश द्वार से गुरुद्वारा परिसर में प्रवेश किया। बारिश, कीर्तन और संगत की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष बना दिया।
सेवा, संगत और सुविधाओं के विस्तार की ओर बढ़ता गुरु का ताल
दो वर्ष की कार सेवा के बाद तैयार हुई दर्शन ड्योढ़ी को केवल एक नए प्रवेश द्वार के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह बढ़ती संगत के स्वागत और गुरुद्वारा परिसर में प्रवेश व्यवस्था के विस्तार का भी हिस्सा है। इसके साथ लंगर हॉल की क्षमता दोगुनी करने और आधुनिक रसोई तैयार करने की योजना बताती है कि गुरु का ताल आने वाले समय में बढ़ती संगत के लिए अपनी सेवा व्यवस्था का भी विस्तार करने जा रहा है।
संतों और प्रमुख पदाधिकारियों की मौजूदगी
दर्शन ड्योढ़ी के लोकार्पण और अरदास के अवसर पर गुरुद्वारा गुरु का ताल के जत्थेदार राजेंद्र सिंह इंदौरिया, बाबा अमरीक सिंह, ग्रंथि हरबंस सिंह, अजायब सिंह टीटू, महंत हरपाल सिंह, जोगा सिंह, ज्ञानी केवल सिंह, श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान कवलजीत सिंह, गुरुद्वारा माईथान के हेड ग्रंथी ज्ञानी कुलविंदर सिंह, दलजीत सिंह सेतिया, श्याम भोजवानी, वीर महेंद्र पाल सिंह, अवनीत कौर, गुरमीत सिंह सेठी और लकी सेतिया सहित अनेक गणमान्य मौजूद रहे।
दो वर्ष की कार सेवा के बाद खुली दर्शन ड्योढ़ी अब गुरु का ताल आने वाली संगत के लिए नया स्वागत द्वार है। इसके साथ लंगर हॉल के विस्तार और अत्याधुनिक रसोई की तैयारी यह संकेत देती है कि ऐतिहासिक गुरुद्वारा आने वाले समय में बढ़ती संगत के लिए अपनी सेवा व्यवस्था को भी बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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