Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Thursday, 2 July 2026, 09:55:10 PM IST

आगरा: पशुपालन विभाग में कथित 25 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता और क्रय प्रक्रिया में धांधली का मामला अब पूरी तरह तूल पकड़ता जा रहा है। अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद सामाजिक संगठन ‘दीवा’ ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन के अध्यक्ष डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ने उत्तर प्रदेश शासन को विस्तृत प्रत्यावेदन भेजकर मामले में लिप्त संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से निलंबन, कड़ी विभागीय कार्रवाई और भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की पुरजोर मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सरकारी जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण वित्तीय अभिलेख और खरीद से संबंधित मूल पत्रावलियां जानबूझकर छिपा ली गईं।
संगठन के अध्यक्ष डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ने अपर मुख्य सचिव (पशुधन, मत्स्य एवं दुग्ध विकास), निदेशक (प्रशासन एवं विकास) तथा पशुपालन विभाग के वित्त नियंत्रक को भेजे गए पत्र में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मंडलायुक्त आगरा के आदेश और जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी द्वारा इस वित्तीय गड़बड़ी की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इस समिति में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) अध्यक्ष थे, जबकि उपायुक्त (स्वरोजगार) और सहायक लेखाधिकारी को सदस्य नियुक्त किया गया था। जांच समिति ने साक्ष्यों के आधार पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी आगरा और निदेशक पशुपालन विभाग को कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दी है। इस सिलसिले में शिकायतकर्ता ने 30 जून 2026 को जिलाधिकारी से मुलाकात की थी, जिन्होंने रिपोर्ट शासन को भेजे जाने की पुष्टि की है।
भेजे गए प्रत्यावेदन के अनुसार, जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. जयन्त यादव तथा तत्कालीन सहायक लेखाकार स्वर्गीय ज्ञानेन्द्र भारद्वाज को इस कथित 25 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी ठहराया है। इसके साथ ही वर्तमान मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. पाण्डे के कार्यप्रणाली के संबंध में भी रिपोर्ट में गंभीर और प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज की गई हैं। उपलब्ध कैशबुक के परीक्षण से साफ हुआ है कि लगभग 25 लाख रुपये के संदिग्ध भुगतान डॉ. डी.के. पाण्डे के कार्यभार ग्रहण करने के बाद किए गए थे, जिससे तत्कालीन भुगतान प्रक्रिया की पूरी जानकारी उनके संज्ञान में होने की बात स्पष्ट रूप से प्रमाणित होती है।
शिकायतकर्ता ने वर्तमान मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. पाण्डे तथा वर्तमान सहायक लेखाकार राजेश कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन दोनों कर्मचारियों ने सोची-समझी रणनीति के तहत जांच समिति के समक्ष क्रय प्रक्रिया से जुड़े मूल सरकारी अभिलेख, पत्रावलियां और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। यह कृत्य सीधे तौर पर सरकारी आदेशों की अवहेलना, महत्वपूर्ण साक्ष्य छिपाने की साजिश और उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली का खुला उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2024-25, 2025-26 तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 के जून माह तक जिला क्रय समिति का विधिवत गठन ही नहीं किया गया, जबकि इस पूरी अवधि में विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर क्रय प्रक्रिया जारी रखी गई, जो कि पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है।
‘दीवा’ संगठन ने सूबे के मुखिया और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के सुसंगत नियमों के तहत डॉ. डी.के. पाण्डे, डॉ. जयन्त यादव और दोषी सहायक लेखाकार के विरुद्ध तत्काल निलंबन की कार्रवाई करते हुए चरणबद्ध विभागीय जांच बैठाई जाए। साथ ही, सरकारी धन के गबन के इस गंभीर मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के अंतर्गत प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कर विधिक आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी और जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत पशुपालन विभाग में पूर्ण पारदर्शिता और जनविश्वास बहाल किया जा सके।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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