आगरा में भक्ति सुरों का महासंगम: ‘रोम-रोम में राम’ भजन पर झूम उठे श्रद्धालु, विभिन्न मतों के सुरों से सजी सनातन संगीत संध्या

खबर शेयर कीजिए

Agra Desk, tajnews.in | Tuesday, May 19, 2026, 10:45:00 AM IST

Taj News Logo
Taj News
Agra Desk | Culture, Society & Art Alerts

ताजनगरी आगरा का सिकंदरा क्षेत्र सोमवार को पूरी तरह से भक्ति, अध्यात्म और सनातन संस्कृति के अनुपम सुरों के सागर में डूब गया। पवित्र पुरुषोत्तम अधिक मास के पावन अवसर पर सिकंदरा स्थित हरिकृष्ण वृद्धजन सम्मान भवन में एक भव्य सनातन भक्ति संगीत संध्या का भव्य आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम रेस्पेक्ट एज इंटरनेशनल (अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध जन सम्मान समिति) और सुभारत संगीत निकेतन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। संगीत संध्या की इस अनोखी श्रृंखला के प्रथम सोपान में गूंजी भजनों की मधुर स्वर लहरियों ने वहां मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं को पूरी तरह से भावविभोर कर दिया। संगीत गुरुओं और युवा कलाकारों की शानदार जुगलबंदी से पूरा परिसर राम नाम के पावन जयघोष से लगातार गूंजता रहा। इस भव्य सांस्कृतिक समागम ने न केवल बुजुर्गों के जीवन में खुशियों और मानसिक शांति के नए रंग भरने का काम किया, बल्कि युवा पीढ़ी को सनातन संस्कृति की समृद्ध संगीत विरासत से भी मजबूती से जोड़ दिया।

Artists performing beautiful devotional bhajans during Sanatan Sangeet Sandhya at Harikrishna Vriddhajan Samman Bhavan Agra
आयोजन के मुख्य बिंदु
  • सनातन संगीत का महासंगम: पुरुषोत्तम अधिक मास के शुभ अवसर पर सिकंदरा में भव्य भक्ति संगीत संध्या का सफल और भव्य आयोजन संपन्न हुआ।
  • सर्वपंथ भजनों की प्रस्तुति: कार्यक्रम के दौरान हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, आर्य समाज और राधा स्वामी सत्संग सहित विभिन्न मतों के सुमधुर भजन गाए गए।
  • युवा कलाकारों ने जीता दिल: सुभारत संगीत निकेतन के जूनियर, सीनियर और प्रभाकर डिप्लोमा के प्रतिभावान छात्रों ने अपनी मनमोहक गायकी से समां बांध दिया।
  • आकाशवाणी कलाकारों की प्रस्तुति: पंडित देवाशीष गांगुली, मीता गांगुली और मंच संचालिका डॉ. वैशाली शर्मा ने पूरे वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक और रसपूर्ण बना दिया।

पुरुषोत्तम मास में अध्यात्म, सेवा और संगीत का अनूठा त्रिवेणी संगम

भारतीय सनातनी परंपरा में पुरुषोत्तम अधिक मास को आध्यात्मिक चेतना के जागरण, व्रत, नियम और परमार्थ के कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन महीने में किए जाने वाले भजन-कीर्तन और परोपकार के कार्य इंसानी मन को सांसारिक विकारों से दूर कर असीम शांति प्रदान करते हैं। इसी पावन भावना को आत्मसात करते हुए आगरा के सिकंदरा स्थित पश्चिम पुरी इलाके में कला और श्रद्धा का एक बहुत ही सुंदर ताना-बाना बुना गया। हरिकृष्ण वृद्धजन सम्मान भवन के विशाल सभागार में आयोजित इस सनातन भक्ति संगीत संध्या ने समाज के सामने सेवा और संस्कृति का एक अनूठा उदाहरण पेश किया। रेस्पेक्ट एज इंटरनेशनल और सुभारत संगीत निकेतन के संयुक्त प्रयासों से सजी यह शाम वहां रहने वाले बुजुर्गों के लिए एक वरदान की तरह साबित हुई।

इस अनूठे समारोह का मुख्य उद्देश्य वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों को मानसिक संबल देना, उनके अकेलेपन को दूर करना और उन्हें यह अहसास कराना था कि वे समाज का एक अत्यंत सम्मानित हिस्सा हैं। संगीत में वह दिव्य और चमत्कारी शक्ति होती है जो हर प्रकार के शारीरिक कष्ट और मानसिक तनाव को पूरी तरह भुला देती है। यही वजह रही कि इस भक्ति संध्या में वृद्धजन सम्मान भवन के आवासियों ने बहुत ही उत्साह और बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भजनों की शुरुआत होते ही पूरा वातावरण एकदम शांत, निर्मल और पवित्र हो गया। सुरों की गूंज से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात ईश्वर उस पावन परिसर में अवतरित हो गए हों। भजनों के भावों को सुनकर श्रोताओं की आंखों से भक्ति के आंसू छलक पड़े और पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से लगातार गूंजता रहा।

मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ भव्य सांस्कृतिक शुभारंभ

इस गरिमामयी और राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ बेहद गरिमापूर्ण और पारंपरिक तरीके से किया गया। वृद्धजन सम्मान समिति के कर्मठ संस्थापक एवं सेवा प्रमुख डॉ. गिरीश सी. गुप्ता ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों और कलाकारों का स्वागत किया। उनके साथ सुभारत संगीत निकेतन के संस्थापक पंडित देवाशीष गांगुली भी मंच पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. बी. डी. अग्रवाल, मन्जू गुप्ता, मीता गांगुली, देवाशीष रत्ना चैटर्जी और समृद्धि सिंह ने संयुक्त रूप से ज्ञान और बुद्धि की अधिष्ठात्री मां सरस्वती के दिव्य चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन किया। सभी प्रबुद्ध अतिथियों ने वीणा वादिनी मां शारदे को माल्यार्पण करके उनका आशीर्वाद लिया और कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।

इसके तुरंत बाद सुभारत संगीत निकेतन की छात्राओं ने बहुत ही सधे हुए और शास्त्रीय सुरों में मधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। वंदना की समाप्ति के बाद डॉ. गिरीश सी. गुप्ता ने कहा कि समाज के असहाय और वृद्धजनों की सेवा करना ही ईश्वर की सबसे सच्ची और बड़ी पूजा है। संगीत के माध्यम से हम इन बुजुर्गों के चेहरों पर सच्ची मुस्कान लाने का एक छोटा सा प्रयास कर रहे हैं। मुख्य अतिथि डॉ. बी. डी. अग्रवाल ने इस सुंदर और मानवीय आयोजन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के इस भौतिकवादी युग में ऐसे कार्यक्रम समाज के भीतर नैतिक मूल्यों, आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने का एक बहुत ही सशक्त माध्यम बनते हैं।

सर्वपंथ भजनों की गूंज से दिखा अखंड सनातनी संस्कृति का विराट स्वरूप

इस सनातन भक्ति संगीत संध्या की सबसे बड़ी और अहम विशेषता इसकी सर्वसमावेशी और पंथ-निरपेक्ष विचारधारा रही। सुभारत संगीत निकेतन के संस्थापक पंडित देवाशीष गांगुली “संगीतेश” के कुशल और योग्य निर्देशन में मंच से एक बहुत ही सुंदर और ऐतिहासिक प्रयोग किया गया। मंच से केवल किसी एक संप्रदाय के नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन संस्कृति के अंतर्गत आने वाले सभी मतों के भजनों की श्रृंखलाबद्ध प्रस्तुतियां दी गईं। इसमें हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, आर्य समाज और राधा स्वामी सत्संग सहित विभिन्न पंथों के सुमधुर भजनों को शामिल किया गया था। इस अनूठे और व्यापक प्रयोग ने सभागार में मौजूद हर विचारधारा के व्यक्ति को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर दिया।

जब मंच से संकेत पाकर कलाकारों ने पूरी तन्मयता के साथ यह प्रसिद्ध भजन गाना शुरू किया कि “तेरे मन में राम, तन में राम, रोम-रोम में राम रे, राम सुमिर ले ध्यान लगा रे, छोड़ जगत के काम रे…!” तो पूरा सभागार एक सुर में झूम उठा। क्या युवा और क्या बुजुर्ग, सभी लोग अपनी सुध-बुध भूलकर दोनों हाथ उठाकर राम नाम के महामंत्र में पूरी तरह मग्न हो गए। भजनों की यह प्रस्तुति इतनी ज्यादा प्रभावशाली थी कि लोग काफी देर तक अपनी सीटों पर खड़े होकर झूमते रहे। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, इस भजन ने पूरे कार्यक्रम को एक अलग ही आध्यात्मिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया। इसने साबित किया कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती और यह आत्मा को सीधे परमात्मा से जोड़ने का काम करता है।

Dignitaries and guests lighting the lamp in front of Goddess Saraswati portrait at Harikrishna Vriddhajan Samman Bhavan

यह भी पढ़ें (आगरा शहर की अन्य बड़ी खबरें)

जूनियर वर्ग के बाल कलाकारों की सुरीली आवाज ने जीता सबका दिल

कार्यक्रम के अगले महत्वपूर्ण चरण में सुभारत संगीत निकेतन के जूनियर डिप्लोमा वर्ग के नन्हे और युवा छात्र-कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए मंच पर आए। इन नवोदित कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत और सुगम संगीत के कठिन नियमों का पालन करते हुए बहुत ही सुंदर और सधी हुई प्रस्तुतियां दीं। जूनियर वर्ग के कलाकारों में सविना खान और राजेश कुमार ने अपनी मधुर और सुरीली आवाज से सभी श्रोताओं को पूरी तरह से अचंभित कर दिया। इसके बाद महेंद्र प्रताप सिंह, रागिनी जैन और प्रतीक्षा जैन ने भी बहुत ही सधे हुए सुरों में अपने-अपने भजनों को प्रस्तुत किया। इन बच्चों की मासूमियत और गायकी के प्रति उनके गहरे समर्पण ने हर किसी का दिल पूरी तरह से जीत लिया।

इसके बाद निशा गोस्वामी, निखिल कुलश्रेष्ठ, करीना गोयल और सरदार अमनदीप सिंह ने एक के बाद एक मंच संभाला। सरदार अमनदीप सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया सिख शबद कीर्तन इतना शांत और गंभीर था कि पूरा माहौल गुरुवाणी के पवित्र रंग में पूरी तरह से रंग गया। वैभव शर्मा, भव्यांश गोयल, कपिल सागर, शांभवी ठाकुर और उत्कर्ष तिवारी ने भी अपनी बेहतरीन गायकी से कार्यक्रम की निरंतरता को बहुत खूबसूरती से बनाए रखा। इन सभी नन्हे कलाकारों को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए वरिष्ठ अतिथियों द्वारा खूब आशीर्वाद और शाबाशी हुई। पंडाल में बैठे अभिभावकों का चेहरा भी अपने बच्चों की इस बड़ी सफलता को देखकर गर्व से पूरी तरह खिल उठा था।

सीनियर और प्रभाकर वर्ग के छात्रों ने बिखेरी सुरों की शास्त्रीय छटा

जूनियर कलाकारों के शानदार प्रदर्शन के बाद संगीत डिप्लोमा के सीनियर वर्ग के विद्यार्थियों ने मंच पर कदम रखा। इनके पास संगीत का थोड़ा ज्यादा अनुभव था, जो उनकी परिपक्व गायकी में साफ तौर पर झलक रहा था। सीनियर वर्ग की होनहार कलाकार चित्रा गोयल और अयान खां ने जुगलबंदी के साथ एक बहुत ही कठिन शास्त्रीय भजन प्रस्तुत किया। उनकी इस बेहतरीन प्रस्तुति पर शास्त्रीय संगीत के पारखियों ने खूब तालियां बजाईं। इसके बाद विदिशा शांत, प्रशांत परिहार, महिमा सत्संगी और अमिता शांत ने भी सुरों की ऐसी अद्भुत छटा बिखेरी कि पूरा सभागार मंत्रमुग्ध हो गया। इन कलाकारों ने अपनी गायकी से यह साबित किया कि वे भविष्य के बहुत बड़े कलाकार बनने की पूरी क्षमता रखते हैं।

इसके तुरंत बाद संगीत प्रभाकर डिप्लोमा के अंतिम वर्ष के वरिष्ठ छात्रों ने अपनी कला का प्रदर्शन शुरू किया। इस वर्ग की समृद्धि सिंह (कोषाध्यक्ष) ने अपनी प्रभावशाली और सुरीली आवाज से पूरे कार्यक्रम को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया। आदित्य सिंह राणा (सह सचिव) ने भी उनका बहुत ही शानदार साथ दिया। अरमा कुमारी और पूजा अग्रहरि की प्रस्तुतियों ने भी श्रोताओं को बहुत देर तक बांधे रखा। इन वरिष्ठ छात्रों ने रागों के साथ-साथ भजनों के भावों को जिस तरह से जनता के सामने व्यक्त किया, वह वाकई में बहुत ही ज्यादा सराहनीय था। कार्यक्रम के इस हिस्से ने शास्त्रीय संगीत के महत्व को एक बार फिर से रेखांकित करने का काम किया है।

आकाशवाणी के वरिष्ठ कलाकारों और नर्सिंग छात्राओं का विशेष गायन

इस सनातन संगीत संध्या का सबसे बड़ा आकर्षण मुख्य और अनुभवी कलाकारों की विशेष प्रस्तुतियां रहीं। सुभारत संगीत निकेतन के संस्थापक और देश के जाने-माने संगीतज्ञ पंडित देवाशीष गांगुली ने स्वयं हारमोनियम पर बैठकर अपनी जादुई आवाज का जादू बिखेरा। उनके साथ आकाशवाणी की प्रतिष्ठित कलाकार एवं संस्था की सह-संस्थापिका मीता गांगुली ने अपनी दिव्य प्रस्तुति दी। मीता गांगुली की सुरीली आवाज ने हवा में एक अलग ही पवित्र मिठास पूरी तरह से घोल दी। उन्होंने जब राग आधारित भक्ति गीत गाए, तो पूरा हॉल एकदम शांत होकर उनके सुरों में लीन हो गया।

इस पूरे भव्य कार्यक्रम का कुशल और सफल मंच संचालन आकाशवाणी की मशहूर उद्घोषिका डॉ. वैशाली शर्मा द्वारा किया गया। डॉ. वैशाली शर्मा ने अपनी बेहतरीन कविता, शुद्ध हिंदी शब्दों और सधी हुई एंकरिंग से पूरे कार्यक्रम की गरिमा को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया। उन्होंने प्रत्येक कलाकार का परिचय बहुत ही सुंदर और सम्मानजनक तरीके से कराया। इसके अलावा, पुष्पांजली नर्सिंग स्कूल की युवा छात्राओं और होनहार कलाकार शिवानी द्वारा प्रस्तुत किए गए भजनों को भी दर्शकों ने खूब सराहा। नर्सिंग स्कूल की छात्राओं ने सामूहिक रूप से एक बहुत ही सुंदर लोक भजन प्रस्तुत किया था, जिसने कार्यक्रम में एक नया रंग भर दिया।

शहर के गणमान्य नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग की रही गरिमामयी उपस्थिति

इस राष्ट्रीय स्तर के भक्ति समागम में आगरा शहर के कई नामचीन और प्रतिष्ठित लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से वरिष्ठ पत्रकार डॉ. महेश धाकड़ मौजूद रहे, जिन्होंने इस सांस्कृतिक आयोजन की मीडिया कवरेज और इसके सामाजिक महत्व पर अपने विचार रखे। उनके साथ ही शहर के प्रमुख प्रबुद्ध नागरिक राजेश गुप्ता, जेपी शर्मा, तरुण राज, एसके गुप्ता, रामेंद्र शर्मा, मनोज कुमार, कमलदीप और विजय पाठक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। विभिन्न सामाजिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम का पूरा आनंद लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

वृद्धजन सम्मान भवन के सभी बुजुर्ग आवासी इस कार्यक्रम से सबसे ज्यादा खुश नजर आ रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में ऐसे सांस्कृतिक आयोजन एक नई ऊर्जा और जीने की नई उम्मीद भर देते हैं। वे भजनों के सुरों के साथ खुद को बहुत ही हल्का और आनंदित महसूस कर रहे थे। कई बुजुर्गों ने कलाकारों को अपने हाथों से आशीर्वाद भी दिया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी सहयोगी संस्थाओं, कलाकारों और आए हुए मेहमानों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने संकल्प लिया कि वे सनातन संस्कृति, शास्त्रीय संगीत और बुजुर्गों के सम्मान के लिए ऐसे आयोजनों की श्रृंखला को भविष्य में भी लगातार जारी रखेंगे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ बहुत ही गौरवपूर्ण तरीके से किया गया।

Trending Tags

Sanatan Sangeet Sandhya, Agra Cultural News, Sikandra Agra Event, Pandit Devashish Ganguly, Respect Age International, Taj News Culture, Devotional Bhajans Agra, Harikrishna Vriddhajan Samman
Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Chief Editor, Taj News


खबर शेयर कीजिए

Leave a Comment