ईरान युद्ध के बीच भारत का बड़ा कदम: रूस को छोड़ तेल के लिए इस अफ्रीकी देश को बनाया नया साथी

International Desk, tajnews.in | 📍नई दिल्ली, भारत | Friday, April 3, 2026, 11:05:22 PM IST

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नई दिल्ली: वैश्विक उथल-पुथल और भयंकर तनाव के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक ताकत का एक बहुत बड़ा प्रदर्शन किया है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, ईरान युद्ध और रूस-यूक्रेन संकट के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट बहुत गहरा गया है। गौरतलब है कि, पश्चिमी देशों के भारी दबाव के बीच भारत ने अपनी तेल खरीद रणनीति में एक बहुत ही अहम और बड़ा बदलाव किया है। इसलिए, भारत अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए सिर्फ एक देश पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं रहना चाहता है। चूंकि रूस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगातार कड़े हो रहे हैं। नतीजतन, भारत ने अब कच्चे तेल की खरीद के लिए अफ्रीकी देश अंगोला को अपना एक नया और प्रमुख साथी बना लिया है। इसके अलावा, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने अंगोला से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है।

HIGHLIGHTS
  • रणनीतिक बदलाव: भारत ने रूस पर अपनी भारी निर्भरता कम करने के लिए अफ्रीकी देशों से कच्चे तेल की खरीद बहुत तेज कर दी है।
  • अंगोला से बड़ी डील: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने हाल ही में अंगोला से करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल सफलतापूर्वक खरीदा है।
  • बेहतरीन क्रूड ऑयल: इस डील में 10 लाख बैरल हुंगो और 10 लाख बैरल क्लोव क्रूड ग्रेड पूरी तरह से शामिल हैं।
  • विविधता पर जोर: भारत अब ऊर्जा सुरक्षा के लिए ब्राज़ील और अबू धाबी जैसे कई अन्य देशों से भी लगातार तेल खरीद रहा है।

भारत का कूटनीतिक कदम: ईरान युद्ध और वैश्विक संकट का असर

दुनिया इस समय एक बहुत ही खतरनाक और गहरे ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ी है। दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भयंकर युद्ध ने मध्य पूर्व की पूरी शांति को पूरी तरह से भंग कर दिया है। गौरतलब है कि, खाड़ी देशों से आने वाले तेल के मुख्य रास्तों पर अब हमले का बहुत भारी खतरा लगातार मंडरा रहा है। इसलिए, भारत सरकार ने समय रहते अपनी ऊर्जा नीतियों की बहुत ही बारीकी से समीक्षा की है। चूंकि भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से ही आयात करता है।

नतीजतन, किसी भी एक क्षेत्र पर बहुत ज्यादा निर्भरता भारत की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इसके अलावा, रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे युद्ध ने भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह तोड़ दिया है। पश्चिमी देशों ने रूस पर कई कड़े और गंभीर आर्थिक प्रतिबंध तुरंत लगा दिए हैं। इसलिए, भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूस से लगातार और सस्ता तेल खरीदना अब काफी ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है।

भारत का कूटनीतिक कदम: अंगोला बना भारत का नया ऊर्जा साथी

इस भारी संकट के बीच भारत ने बहुत ही सूझबूझ और चालाकी से अफ्रीका का रुख किया है। गौरतलब है कि, भारत ने अफ्रीका के दूसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक देश अंगोला के साथ एक बहुत बड़ी डील पक्की की है। इसलिए, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने अंगोला से लगभग 2 मिलियन (20 लाख) बैरल कच्चे तेल की तुरंत खरीद कर ली है। चूंकि यह एक बहुत ही बड़ा और अहम रणनीतिक सौदा माना जा रहा है।

नतीजतन, इस ऐतिहासिक डील को मशहूर वैश्विक कंपनी एक्सॉनमोबिल (ExxonMobil) के सीधे सहयोग से सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इसके अलावा, अंगोला के पास तेल का एक बहुत ही विशाल और बड़ा खजाना मौजूद है। बता दें कि, अंगोला में कच्चे तेल का दैनिक उत्पादन लगभग 1.1 मिलियन बैरल के पार पहुंच चुका है। उनके पास कुल 7.78 बिलियन बैरल का एक बहुत ही भारी और प्रमाणित तेल भंडार भी पूरी तरह सुरक्षित है।

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भारत का कूटनीतिक कदम: हुंगो और क्लोव क्रूड ऑयल की खासियत

अंगोला से खरीदे गए इस तेल की गुणवत्ता भारतीय रिफाइनरियों के लिए बहुत ही ज्यादा अनुकूल है। गौरतलब है कि, भारत ने इस बड़ी डील में 10 लाख बैरल हुंगो (Hungo) क्रूड ग्रेड की भारी खरीद की है। इसके अलावा, 10 लाख बैरल क्लोव (Clov) क्रूड ग्रेड भी इस अहम समझौते में पूरी तरह से शामिल है। इसलिए, ये दोनों ही प्रकार के कच्चे तेल एशियाई रिफाइनरियों के लिए एकदम बेहतरीन और उपयुक्त माने जाते हैं।

चूंकि इन दोनों ग्रेड के तेल को रिफाइन करने पर पेट्रोल और डीजल की मात्रा बहुत ज्यादा निकलती है। नतीजतन, भारतीय कंपनियों को इस तेल से बहुत ही भारी मुनाफा आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा, भारत में पेट्रोल और डीजल की मांग हर साल बहुत ही तेजी से बढ़ रही है। इसलिए, अंगोला का यह उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा तेल भारत की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।

भारत का कूटनीतिक कदम: रूस पर निर्भरता कम करने की बड़ी रणनीति

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ही भारत ने रूसी तेल का बहुत ही भारी मात्रा में फायदा उठाया है। दरअसल, साल 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने भारत को बहुत भारी डिस्काउंट पर अपना तेल बेचा था। गौरतलब है कि, उस समय रूस अचानक से भारत का सबसे बड़ा और मुख्य तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था। इसलिए, भारत ने इस सस्ते तेल से अपनी अर्थव्यवस्था को काफी ज्यादा और सीधा फायदा पहुंचाया था।

चूंकि अब पश्चिमी देशों ने रूस के वित्तीय लेन-देन पर कई बहुत कड़े और मजबूत प्रतिबंध लगा दिए हैं। नतीजतन, बैंकों के जरिए रूसी तेल का सीधा भुगतान करना अब बहुत ज्यादा जटिल और पेचीदा हो गया है। इसके अलावा, रूस ने अपने तेल पर मिलने वाले भारी डिस्काउंट को भी अब काफी हद तक कम कर दिया है। इसलिए, भारत ने अब अपनी इस जोखिम भरी निर्भरता को कम करने का एक बहुत ही कड़ा और स्पष्ट फैसला कर लिया है।

भारत का कूटनीतिक कदम: ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत का मास्टर प्लान

भारत सरकार ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए कई बहुत बड़े और अहम कदम उठाए हैं। गौरतलब है कि, अंगोला के अलावा भारत अब दुनिया के कई अन्य बड़े देशों के साथ भी तेल के अहम समझौते कर रहा है। इसलिए, भारतीय कंपनियों ने शेल (Shell) कंपनी से अबू धाबी का प्रसिद्ध मुर्बन क्रूड भारी मात्रा में खरीदा है। चूंकि मर्कुरिया ग्रुप से अपर ज़कुम क्रूड की भी बहुत बड़ी और सफल खरीद की गई है।

नतीजतन, भारत अपनी तेल बास्केट को लगातार बहुत ही ज्यादा विविधतापूर्ण और सुरक्षित बना रहा है। इसके अलावा, भारत ने दक्षिण अमेरिका का रुख करते हुए पेट्रोब्रास से ब्राज़ील का बुज़ियोस क्रूड भी पूरी तरह खरीदा है। इसलिए, इन सभी कड़े और बड़े उपायों के जरिए भारत दुनिया की किसी भी भारी भू-राजनीतिक चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। अंततः, ताज न्यूज़ देश की इन अहम और बड़ी आर्थिक नीतियों की हर अपडेट आप तक पूरी गहराई से पहुंचाता रहेगा।

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Pawan Singh

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Chief Editor, Taj News

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