Agra News Desk, tajnews.in | 📍आगरा, उत्तर प्रदेश | Friday, April 3, 2026, 10:14:36 PM IST

आगरा: उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में शास्त्रीय संगीत की एक बहुत ही भव्य और अद्भुत शाम पूरी तरह से सजी। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, केंद्रीय हिंदी संस्थान में तीन अप्रैल की शाम बिल्कुल ऐतिहासिक और यादगार रही। गौरतलब है कि, भारतीय संगीतालय ने इस शानदार ‘गुरुवर संगीत समारोह 2026’ का बहुत ही सफल और भव्य आयोजन किया। इसलिए, देश के कई नामचीन और बड़े कलाकारों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से वहां मौजूद सभी लोगों का मन पूरी तरह मोह लिया। चूंकि इस समारोह में शहर के तमाम बड़े संगीत प्रेमियों की बहुत भारी भीड़ खुशी से उमड़ी थी। नतीजतन, पूरा सभागार तालियों की जोरदार गड़गड़ाहट से देर रात तक लगातार गूंजता रहा। इसके अलावा, यह सुरीली और पवित्र संध्या शास्त्रीय संगीत के गहरे समर्पण और हमारी प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा का एक बहुत बड़ा प्रतीक बनकर उभरी है।
- भव्य संगीत समारोह: आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान में भारतीय संगीतालय ने ‘गुरुवर संगीत समारोह 2026’ का शानदार आयोजन किया।
- पं. अर्नब का जादुई गायन: कोलकाता के प्रसिद्ध गायक पं. अर्नब चटर्जी ने राग रागेश्री और बहार से श्रोताओं को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया।
- संगतकारों की महारत: दुर्जेय भौमिक ने तबले पर और पं. टी. रविन्द्र ने हारमोनियम पर अपनी बहुत ही सुरीली और सधी हुई संगत दी।
- युवाओं का बेहतरीन प्रदर्शन: सागर जग्गी के गायन और 50 छात्र-छात्राओं की ‘सरस्वती वंदना’ ने इस कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ा दिया।

गुरुवर संगीत समारोह: पं. अर्नब चटर्जी ने मोहा सबका मन
गुरुवर संगीत समारोह में पं. अर्नब चटर्जी ने अपने जादुई गायन से एक बहुत ही अद्भुत माहौल पूरी तरह से बना दिया। गौरतलब है कि, कोलकाता से आए इस सुप्रसिद्ध गायक ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुति से श्रोताओं का दिल तुरंत जीत लिया। इसलिए, उन्होंने अपने गायन की शुरुआत राग रागेश्री से बहुत ही भावपूर्ण और गंभीर तरीके से की। चूंकि यह राग हमारी परंपरा में आध्यात्मिक ऊर्जा का एक बहुत बड़ा और मुख्य स्रोत माना जाता है। नतीजतन, उन्होंने विलम्बित एक ताल में निबद्ध अपनी रचना ‘आज मिल रघुनाथ दाता, आनंद बधावा’ को बहुत ही मधुरता से गाया। इसके बाद, उन्होंने तीन ताल मध्य लय में ‘सुन्दर नवेली नार, कर श्रृंगार’ की अपनी बहुत ही सुंदर और आकर्षक प्रस्तुति सबके सामने दी।
उन्होंने द्रुत एक ताल में भगवान कृष्ण और राधा की बरजोरी को भी बहुत ही शानदार तरीके से दर्शाया। गौरतलब है कि, उन्होंने ‘देखो श्याम गहलीनो बैया मोरी, आली’ नामक बंदिश गाकर राग रागेश्री का अत्यंत सौम्य और प्रभावशाली समापन किया। इसके अलावा, उन्होंने ऋतुओं के राजा राग बहार के माध्यम से प्रकृति में नया उल्लास पूरी तरह से भर दिया। उन्होंने ‘सकल बन फूल रहे सरसों, करसूं ले जैयो घरवा’ जैसी मनोहारी बंदिश बहुत ही खूबसूरती से गाई। इसलिए, श्रोताओं का मन इस अद्भुत और सुरीले गायन को सुनकर पूरी तरह से प्रफुल्लित हो गया। चूंकि उन्होंने अपनी प्रस्तुति के अंतिम चरण में राग खमाज की प्रसिद्ध ठुमरी ‘प्रेम अगनवा जिया जलावे’ भी बड़े ही भाव से गाई। नतीजतन, उन्होंने सभी श्रोताओं के हृदय में प्रेम और भारी अनुराग की नई तरंगें पूरी तरह से उत्पन्न कर दीं।

गुरुवर संगीत समारोह: संगतकारों ने दिखाया अपना शानदार हुनर
गुरुवर संगीत समारोह में संगतकार कलाकारों ने भी अपनी महान कला का बहुत ही बेहतरीन और शानदार प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि, दिल्ली से आए मशहूर और ख्याति प्राप्त तबला वादक दुर्जेय भौमिक ने गायन में बहुत ही गंभीर संगत की। इसलिए, उनके सटीक और अति संतुलित तबला वादन ने राग की पूरी गहराई को और भी ज्यादा बढ़ा दिया। चूंकि उन्होंने हर ताल और कठिन लय को बहुत ही बारीकी से और खूबसूरती के साथ पूरी तरह संभाला। नतीजतन, श्रोताओं ने उनके इस अद्भुत और लयबद्ध वादन की बहुत ही ज्यादा और खुलकर अपनी तारीफ की।
इसके अलावा, पंडित टी. रविन्द्र ने भी संवादिनी (हारमोनियम) पर अपनी बहुत ही मधुर और सुरीली संगत लगातार दी। उन्होंने हारमोनियम के सुरों पर पानी की बूंदों जैसी अपनी अत्यंत चंचल और तेज उंगलियां बहुत ही महारत से चलाईं। इसलिए, उनके इस शानदार वादन ने श्रोताओं के कानों में एक अत्यंत मधुर रसावृष्टि पूरी तरह से कर दी। चूंकि मुख्य गायक और संगतकारों के बीच का तालमेल बहुत ही ज्यादा सटीक और बेमिसाल था। नतीजतन, यह जुगलबंदी इस पूरी सुरीली शाम का सबसे बड़ा और प्रमुख आकर्षण आसानी से बन गई।
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गुरुवर संगीत समारोह: युवा प्रतिभाओं ने भी बिखेरा अपना जलवा
गुरुवर संगीत समारोह में युवा और उभरते हुए कलाकारों ने भी अपना एक बहुत ही शानदार और अनोखा जलवा पूरी तरह बिखेरा। गौरतलब है कि, स्थानीय युवा गायक सागर जग्गी ने अपने शास्त्रीय गायन से सभी को बहुत गहराई से प्रभावित किया। इसलिए, उन्होंने राग शुद्ध कल्याण में अपनी बहुत ही सुरीली और मधुर आवाज का जादू पूरे सभागार में चलाया। चूंकि उनकी इस शानदार प्रस्तुति ने सभी श्रोताओं के दिलों पर अपना एक बहुत गहरा और स्थायी असर छोड़ा। नतीजतन, पूरा सभागार उनके इस बेहतरीन गायन पर पूरी तरह से मंत्रमुग्ध होकर देर तक झूमने लगा।
इसके अलावा, हरिओम माहौर ने तबले पर और डॉ. राहुल निवेरिया ने संवादिनी पर उनका बहुत ही सफल और बेहतरीन साथ दिया। कार्यक्रम की भव्य शुरुआत भारतीय संगीतालय के लगभग 50 छात्र-छात्राओं ने बहुत ही सुंदर तरीके से की। गौरतलब है कि, इन सभी बच्चों ने राग हेमंत में स्वरबद्ध एक बहुत ही मधुर ‘सरस्वती वंदना’ प्रस्तुत की। इसलिए, इस पवित्र वंदना ने पूरे वातावरण को बहुत ही ज्यादा शुद्ध और पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। चूंकि डॉ. भानु प्रताप सिंह ने इस वंदना में तबले पर अपनी बहुत ही शानदार संगत की। नतीजतन, डॉ. वंदना वरुण ने भी हारमोनियम पर उनका पूरा साथ देकर इस शुभारंभ को बहुत ही भव्य बना दिया।
गुरुवर संगीत समारोह: संगीत के दिग्गजों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
गुरुवर संगीत समारोह भारतीय संगीतालय के महान और दिग्गज संस्थापकों को पूरी तरह से समर्पित रहा। गौरतलब है कि, इस ऐतिहासिक संस्था ने साल 1944 से शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार का एक बहुत बड़ा जिम्मा उठाया है। इसलिए, संस्था ने पं. गोपाल लक्ष्मण गुणे, पं. पुरुषोत्तम माधव पालखे और पं. सीताराम व्यवहारे को दिल से याद किया। चूंकि इन सभी महान गुरुजनों ने संगीत की दुनिया में अपना एक बहुत ही बड़ा और अमूल्य योगदान हमेशा दिया है।
नतीजतन, वर्तमान कलाकारों ने उनकी इस महान विरासत को आज भी बहुत ही सुरक्षित तरीके से सहेज कर रखा है। इसके अलावा, कार्यक्रम की शुरुआत में संस्था के संरक्षक स्व. कुंवर चन्द भूषण सिंह को भी सभी ने अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। संस्था के सभी सदस्यों ने उनके सांगीतिक योगदान को बहुत ही गर्व के साथ याद किया। इसलिए, यह पूरा समारोह केवल एक संगीत सभा नहीं, बल्कि पुरखों को याद करने का एक पवित्र अनुष्ठान बन गया।

गुरुवर संगीत समारोह: अतिथियों और श्रोताओं की रही भारी मौजूदगी
समारोह में शहर के कई बड़े और प्रतिष्ठित अतिथियों ने अपनी बहुत ही गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। गौरतलब है कि, वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल वर्मा ने इस शानदार कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की अपनी अहम भूमिका निभाई। इसलिए, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बबीता साहू ने इस पूरे भव्य समारोह की बहुत ही शानदार और गरिमामयी अध्यक्षता की। चूंकि वरिष्ठ संगीतज्ञ पं. नरेश मल्होत्रा ने समाज के सुनिर्माण में शास्त्रीय संगीत की भारी महत्ता पर अपना पूरा प्रकाश डाला।
नतीजतन, उन्होंने युवा पीढ़ी को इस प्राचीन कला से जुड़ने का एक बहुत ही सीधा और स्पष्ट संदेश मंच से दिया। इसके अलावा, कार्यक्रम में बैकुंठी देवी डिग्री कॉलेज की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अमिता त्रिपाठी ने बहुत ही गहरी दिलचस्पी दिखाई। डॉ. गिरधर शर्मा और संस्कार भारती के राज बहादुर राज ने भी इस सफल आयोजन की जमकर अपनी तारीफ की। ललित कला अकादमी की सदस्या आभा सिंह गुप्ता ने इसे शहर का सबसे बेहतरीन और बड़ा कलात्मक आयोजन बताया।
गुरुवर संगीत समारोह: भविष्य की योजनाओं पर हुआ बड़ा मंथन
संस्था के सचिव अशोक राव करमरकर ने भविष्य की सांगीतिक कार्य योजनाओं की अपनी पूरी और विस्तृत जानकारी दी। गौरतलब है कि, उन्होंने शास्त्रीय संगीत के प्रति अपने गहरे प्रेम को और भी ज्यादा मजबूत करने का कड़ा संकल्प लिया। इसलिए, उन्होंने युवा कलाकारों को मंच देने के लिए आगे भी ऐसे बड़े समारोह आयोजित करने की घोषणा की। चूंकि प्रधानाचार्य गजेंद्र सिंह चौहान ने अपने शानदार स्वागत भाषण से सभी खास मेहमानों का दिल पूरी तरह से जीत लिया।
नतीजतन, पूरा माहौल बहुत ही ज्यादा सकारात्मक और ऊर्जा से पूरी तरह भर गया। इसके अलावा, लीना परमार ने इस पूरे कार्यक्रम का बहुत ही शानदार और सफल मंच संचालन किया। सह संयोजिका संजीवनी ने अंत में सभी अतिथियों और कलाकारों का बहुत ही दिल से अपना आभार व्यक्त किया। चूंकि मीडिया समन्वयक डॉ. महेश धाकड़ ने इस सफल आयोजन की पूरी जानकारी मीडिया कर्मियों को विस्तार से दी। नतीजतन, रितु-रजनीश खण्डेलवाल, विजय पाल सिंह, दिलीप रघुवंशी और पं. देवाशीष चक्रवर्ती जैसे दर्जनों गणमान्य नागरिक इस ऐतिहासिक शाम के अहम गवाह बने।
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Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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