Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in I 19 Feb 2026, 1:57 pm IST
आगरा: शिक्षा किसी भी सभ्य समाज की आधारशिला होती है और यह हर बच्चे का मौलिक तथा संवैधानिक अधिकार है। भारत सरकार द्वारा लागू ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ (Right to Education – RTE Act) का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि समाज के सबसे निचले और वंचित तबके के बच्चों को भी निजी और प्रतिष्ठित स्कूलों में मुफ़्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इस कानून के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें दुर्बल और अलाभित समूह के बच्चों के लिए आरक्षित की जाती हैं। लेकिन, जमीनी हकीकत अक्सर कागजी दावों से अलग होती है। आज भी हजारों ऐसे गरीब और अशिक्षित माता-पिता हैं, जो जानकारी के अभाव, जटिल कागजी प्रक्रियाओं और ऑनलाइन फॉर्म भरने की तकनीकी अड़चनों के कारण अपने बच्चों का इस योजना के तहत दाखिला नहीं करा पाते हैं। प्रशासन की इसी कमी को दूर करने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकार की इस लाभकारी योजना को पहुँचाने का बीड़ा आगरा में ‘प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस’ (PAPA NGO) ने उठाया है।

गरीब और जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को संवारने के उद्देश्य से, पापा एनजीओ (PAPA NGO) द्वारा आगरा के विभिन्न स्लम और मलिन बस्तियों में एक वृहद जन-जागरूकता और RTE सहायतार्थ कैंप का आयोजन किया गया। यह विशेष सहायता शिविर आगरा के झूलेलाल कॉलोनी वाल्मीकि बस्ती, विजय नगर और गधापाड़ा रोड क्षेत्र में लगाया गया। इस शिविर का मुख्य फोकस उन दुर्बल और अलाभित समूह के परिवारों पर था, जो रोजमर्रा की रोजी-रोटी की जद्दोजहद में इतने उलझे रहते हैं कि उन्हें सरकारी योजनाओं की भनक तक नहीं लग पाती। शिविर में सैकड़ों की संख्या में ऐसे अभिभावक पहुँचे जिनके मन में अपने बच्चों को अच्छे अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ाने का सपना तो था, लेकिन वे यह नहीं जानते थे कि इस सपने को साकार कैसे किया जाए। पापा एनजीओ के कार्यकर्ताओं ने न केवल उनके इस सपने को एक दिशा दी, बल्कि दाखिले की पूरी प्रक्रिया को उनके लिए बेहद आसान बना दिया।
इस विशेष सहायता शिविर में अभिभावकों को RTE के तहत होने वाले दाखिले की एबीसीडी (A to Z) समझाई गई। सबसे बड़ी समस्या जो मलिन बस्तियों के लोगों के सामने आती है, वह है दस्तावेजों का सही न होना या उनका अभाव। शिविर में विशेषज्ञों और स्वयंसेवकों की टीम ने अभिभावकों के दस्तावेजों का गहन सत्यापन (Document Verification) किया। उन्हें बताया गया कि आवेदन के लिए कौन-कौन से आवश्यक कागजातों—जैसे आय प्रमाण पत्र (Income Certificate), जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate), बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate), निवास प्रमाण पत्र और आधार कार्ड—की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त, जिन अभिभावकों के पास पूरे दस्तावेज उपलब्ध थे, उनका मौके पर ही ऑनलाइन आवेदन (Online Application) कराने में तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इंटरनेट कैफे वालों द्वारा वसूले जाने वाले मनमाने शुल्क और गलत फॉर्म भरे जाने की आशंकाओं से भी इन गरीब अभिभावकों को मुक्ति मिली।
इस पूरे कार्यक्रम का बेहद कुशल और प्रभावी संयोजन पापा एनजीओ (PAPA NGO) की ओर से वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता श्री राघवेंद्र उपाध्याय द्वारा किया गया। उन्होंने एक-एक अभिभावक से व्यक्तिगत तौर पर संवाद स्थापित किया और उनकी समस्याओं को सुना। शिविर को संबोधित करते हुए श्री राघवेंद्र उपाध्याय ने अत्यंत मार्मिक और विचारणीय बात कही। उन्होंने कहा, “शिक्षा किसी वर्ग विशेष, अमीर या रसूखदार लोगों का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि यह इस देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे का संवैधानिक हक (Constitutional Right) है। आज अगर सरकारी योजना की व्यवस्था या प्रक्रिया जटिल है, तो यह हम जैसे जागरूक समाज और संस्थाओं का दायित्व है कि हम उस कठिन मार्ग को गरीब जनता के लिए सरल बनाएं।” उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा, “हमारा और हमारी संस्था का यह अथक प्रयास है कि इस शहर का कोई भी होनहार बच्चा केवल जानकारी के अभाव, जटिल कागजी कार्रवाई या संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा रूपी रोशनी से वंचित न रह जाए। जब अभिभावक स्वयं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होते हैं, तभी सरकार की कोई भी कल्याणकारी योजना फाइलों से निकलकर असल में ज़मीन पर उतरती है।”
इस अवसर पर पापा एनजीओ (PAPA NGO) के संस्थापक और शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से संघर्षरत श्री दीपक सिंह सरीन ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने शिक्षा के अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी तय की। श्री सरीन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आरटीई (RTE) कानून केवल कागज़ों की शोभा बढ़ाने या सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह सुनिश्चित करना अकेले सरकार का नहीं, बल्कि पूरे समाज और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त जिम्मेदारी है। हम मानते हैं कि समाज में शिक्षा के समान अवसर ही वास्तविक ‘सामाजिक न्याय’ (Social Justice) की सबसे मजबूत आधारशिला हैं। जब तक एक गरीब का बच्चा और एक अमीर का बच्चा एक ही छत के नीचे बैठकर समान शिक्षा प्राप्त नहीं करेगा, तब तक एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है।”
संस्थापक दीपक सिंह सरीन ने पापा एनजीओ के भविष्य के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि उनकी संस्था का यह अभियान किसी एक बस्ती या एक दिन के शिविर तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “हम आगरा के प्रत्येक वार्ड, प्रत्येक मलिन बस्ती और हर उस जरूरतमंद परिवार तक पहुँचने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं, जिन्हें हमारी आवश्यकता है। जब तक समाज की अंतिम पंक्ति में खड़ा आखिरी बच्चा स्कूल की दहलीज को पार नहीं कर लेता और उसके हाथों में किताबें नहीं आ जातीं, तब तक हमारा यह शिक्षा-जागरूकता अभियान अनवरत जारी रहेगा।”
किसी भी सामाजिक अभियान की सफलता स्थानीय लोगों की भागीदारी के बिना अधूरी होती है। पापा एनजीओ के इस भागीरथ प्रयास में झूलेलाल कॉलोनी, वाल्मीकि बस्ती और विजय नगर क्षेत्र के स्थानीय युवाओं और जागरूक नागरिकों ने बढ़-चढ़कर अपना सक्रिय सहयोग दिया। स्थानीय स्तर पर व्यवस्था संभालने, भीड़ को नियंत्रित करने और अनपढ़ अभिभावकों को फॉर्म समझाने में इन युवाओं का योगदान सराहनीय रहा। मुख्य रूप से स्थानीय निवासी छोटू वाल्मीकि, इमरान खान, रवीना, सावित्री देवी, अनुज, कांची, रिंकू कुमार वरुण, विजय, शेर सिंह, अनुज कुमार, विक्की और गौरव सहित अनेक युवाओं ने पूरे दिन खड़े रहकर संस्था के स्वयंसेवकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। इन युवाओं की सक्रियता यह दर्शाती है कि यदि समाज को सही दिशा दिखाई जाए, तो बदलाव की बयार बस्तियों के भीतर से ही उठती है।
अंत में, यह शिविर इस बात का जीवंत प्रमाण बन गया कि यदि गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और स्थानीय समुदाय मिलकर काम करें, तो सरकारी योजनाओं का लाभ उन लोगों तक पहुँचाया जा सकता है, जो इसके वास्तविक हकदार हैं। पापा एनजीओ का यह ‘RTE सहायतार्थ कैंप’ न केवल एक एडमिशन ड्राइव था, बल्कि यह समाज के उस दबे-कुचले वर्ग के लिए उम्मीद की एक नई किरण था, जो अपने बच्चों को गरीबी के उस दुष्चक्र से बाहर निकालना चाहते हैं। शिक्षा ही वह एकमात्र अचूक हथियार है जो पीढ़ियों की गरीबी को एक झटके में खत्म कर सकता है, और पापा एनजीओ आगरा में उसी हथियार को हर गरीब बच्चे के हाथों में सौंपने का पुनीत कार्य कर रहा है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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