₹50 हजार के बॉन्ड और लिखित आश्वासन पर रिहा हुए सौरव दास-अशुतोष रांका, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाने पर शर्त

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SEM अदालत ने दिल्ली पुलिस की तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत की मांग खारिज की; दोनों नेताओं ने शांति बनाए रखने और संविधान के दायरे में प्रदर्शन करने का दिया भरोसा

राष्ट्रीय डेस्क, Taj News | 🌐 tajnews.in | गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026, 02:22:00 AM IST.

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राष्ट्रीय डेस्क

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और अशुतोष रांका सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद बुधवार, 21 अक्टूबर को तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने दोनों की रिहाई का आदेश उनके लिखित आश्वासन और 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत तथा जमानतदार बॉन्ड जमा कराने की शर्त पर दिया। दिल्ली पुलिस ने उनकी न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।

HIGHLIGHTS
  • तिहाड़ जेल से रिहाई: सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 50-50 हजार रुपये के निजी व जमानती बॉन्ड पर रिहा हुए सौरव दास और अशुतोष रांका।
  • पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज: SEM कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत बढ़ाने की मांग को नामंजूर किया।
  • लिखित आश्वासन और शर्त: जंतर-मंतर को कानूनन निर्धारित प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करने की दी प्रतिबद्धता।
  • अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को: अदालत ने जांच अधिकारी को जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट पेश करने और दोनों नेताओं को उपस्थित रहने का निर्देश दिया।

दोनों नेताओं ने अदालत में लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और जंतर-मंतर को कानून के तहत दोबारा निर्धारित प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। उन्होंने यह भरोसा भी दिया कि भविष्य में होने वाले प्रदर्शन संविधान के दायरे में किए जाएंगे।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं बुलाने का दिया लिखित आश्वासन

विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने दोनों नेताओं के लिखित आश्वासनों को रिकॉर्ड पर लिया। आश्वासन में उन्होंने सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा शांति भंग करने वाली गतिविधियों से दूर रहने की प्रतिबद्धता जताई।

अदालत ने व्यक्तिगत बॉन्ड और जमानतदार बॉन्ड के रूप में प्रत्येक नेता से 50 हजार रुपये के बॉन्ड जमा कराने का निर्देश दिया। ये बॉन्ड जांच पूरी होने तक प्रभावी रहेंगे। अदालत ने दोनों को मामले की प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहने और बॉन्ड की शर्तों का पालन करने का भी निर्देश दिया।

रिहाई का आदेश देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच और कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी। इसलिए रिहाई को मामले का अंतिम निपटारा नहीं माना जा सकता।

दिल्ली पुलिस ने मांगी थी तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत

दिल्ली पुलिस ने अदालत से दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने का अनुरोध किया था। पुलिस की दलील थी कि उनके कथित आचरण और पहले दिए गए शांति संबंधी आश्वासनों के उल्लंघन को देखते हुए सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका बनी हुई है।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने भी अपनी दलीलें रखीं। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी के एक सदस्य की कथित टिप्पणी को लेकर वकील ने अदालत के समक्ष माफी भी व्यक्त की और भविष्य में ऐसा आचरण न दोहराए जाने का भरोसा दिया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और लिखित आश्वासनों पर विचार करने के बाद SEM अदालत ने अतिरिक्त हिरासत की मांग के बजाय बॉन्ड और शर्तों के आधार पर रिहाई का आदेश दिया।

हाई कोर्ट से याचिका वापस लेने के बाद आगे बढ़ी कार्यवाही

रिहाई से पहले दोनों नेताओं ने अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने उन्हें पहले SEM अदालत की कार्यवाही का परिणाम देखने की सलाह दी थी।

इसके बाद सौरव दास और अशुतोष रांका के वकील ने हाई कोर्ट से याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। फिर दोनों नेताओं ने SEM अदालत में चल रही कार्यवाही का सामना किया, जहां उन्हें रिहाई की राहत मिली।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता

सौरव दास और अशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित प्रदर्शन स्थल की अधिसूचना रद्द होने के बावजूद बैरिकेड पार कर परिसर में प्रवेश किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की।

14 अक्टूबर को दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद 19 अक्टूबर को हिरासत दो दिन और बढ़ाकर 21 अक्टूबर तक कर दी गई। इसी आदेश को चुनौती देते हुए दोनों ने हाई कोर्ट का रुख किया था।

यह प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे विरोध से जुड़ा था। CJP और कुछ अन्य समूहों ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को

अदालत ने जांच अधिकारी को जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया है। दोनों नेताओं और उनके जमानतदारों को भी निर्धारित तारीख पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे तय की गई है। तब तक दोनों नेताओं को अदालत की शर्तों का पालन करना होगा और जांच की प्रक्रिया जारी रहेगी।

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