सड़क हादसे में दाहिने हाथ की कार्यक्षमता प्रभावित होने के बाद 21 वर्षीय युवक का माइक्रोसर्जिकल उपचार; सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक
आगरा डेस्क | 🌐 tajnews.in | 6 अक्टूबर 2026 | 17:09 बजे

आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी से पीड़ित 21 वर्षीय युवक में जटिल नर्व ट्रांसफर सर्जरी की। माइक्रोसर्जिकल प्रक्रिया का उद्देश्य मरीज के कंधे और हाथ की गतिविधि को बहाल करने में मदद करना है।
मरीज तुलाराम करीब दो माह पहले सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए थे। हादसे के बाद उनके दाहिने हाथ की कार्यक्षमता प्रभावित हो गई थी। चिकित्सीय जांच में दाहिने ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी की पुष्टि होने के बाद प्लास्टिक सर्जरी विभाग की टीम ने नर्व ट्रांसफर तकनीक के माध्यम से कंधे की गतिविधि को बहाल करने की योजना बनाई।
विभाग के अनुसार इस माइक्रोसर्जिकल प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य मरीज के कंधे से हाथ को बाहर की ओर उठाने की क्षमता को पुनः प्राप्त करने में मदद करना है। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक बताई गई है।
- 21 वर्षीय युवक में ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी की पुष्टि हुई थी
- सड़क हादसे के करीब दो माह बाद नर्व ट्रांसफर सर्जरी की गई
- सर्जरी का उद्देश्य कंधे और हाथ की गतिविधि बहाल करने में मदद करना है
- प्लास्टिक सर्जरी और एनेस्थीसिया टीम ने संयुक्त रूप से प्रक्रिया में सहयोग किया
- सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक बताई गई
प्लास्टिक सर्जरी विभाग की टीम ने की जटिल प्रक्रिया
सर्जरी प्लास्टिक सर्जरी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रीप्रिया पीपी एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रणय सिंह चकोटिया के नेतृत्व में की गई। प्रक्रिया में रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. अर्पिता और डॉ. मोहित ने सहयोग किया।
एनेस्थीसिया टीम ने भी किया सहयोग
सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अमृता गुप्ता, डॉ. दीपिका चौबे और डॉ. विनिता लिप्टन शामिल रहीं। विभिन्न विशेषज्ञों और चिकित्सा कर्मियों के समन्वय से यह जटिल माइक्रोसर्जिकल प्रक्रिया पूरी की गई।
उन्नत चिकित्सीय सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध: डॉ. प्रशांत गुप्ता
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा, “हमारी मेडिकल कॉलेज की टीम लगातार मरीजों को उन्नत एवं उच्च स्तरीय चिकित्सीय सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति पूर्णतः संतोषजनक बताई गई है। विभाग की टीम के अनुसार इस प्रक्रिया का लक्ष्य दुर्घटना के कारण प्रभावित हाथ और कंधे की कार्यक्षमता में सुधार लाना है।





