वित्त मंत्रालय से बातचीत में PLI पर कार्रवाई का दावा; 28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर भी जताई चिंता
बैंकिंग डेस्क, 🌐 tajnews.in | रविवार, 20 सितंबर 2026, 02:22:15 AM IST

नई दिल्ली/आगरा, 19 सितंबर 2026। देशभर में 11 सितंबर 2026 को हुई बैंक कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को लेकर भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। BMS के अखिल भारतीय सचिव एवं बैंकिंग तथा वित्तीय क्षेत्र के प्रभारी गिरीश चंद्र आरजी ने ‘ताज न्यूज़’ के प्रतिनिधि जावेद खान और सादिया से विशेष बातचीत में आरोप लगाया कि 11 सितंबर की हड़ताल कर्मचारियों की वास्तविक समस्याओं से अधिक राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित थी।

हालांकि, बैंक यूनियनों के संयुक्त मंच United Forum of Bank Unions (UFBU) ने हड़ताल के लिए पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था, Performance Linked Incentive (PLI) और अन्य लंबित सेवा संबंधी मुद्दों को प्रमुख कारण बताया था। 11 सितंबर की हड़ताल से खास तौर पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में कामकाज प्रभावित हुआ।
BRICS बैठक के दौरान हड़ताल पर BMS का सवाल
गिरीश चंद्र आरजी ने आरोप लगाया कि 11 सितंबर को भारत में BRICS से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठक के दौरान बैंक हड़ताल का आह्वान किया गया। उनका दावा है कि वामपंथी और कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े बैंक यूनियनों ने जानबूझकर यह तारीख चुनी, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बैंकिंग व्यवस्था में व्यवधान का संदेश जाए।

यह BMS नेता का आरोप है। उपलब्ध दस्तावेजों से यह जरूर स्पष्ट है कि 11 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल को टालने के लिए सरकारी पक्ष ने BRICS बैठक का हवाला दिया था। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेज यह स्थापित नहीं करते कि हड़ताल की तारीख भारत की छवि प्रभावित करने के उद्देश्य से जानबूझकर चुनी गई थी।
दूसरी ओर, UFBU की ओर से हड़ताल के प्रमुख मुद्दों में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था, PLI और अन्य लंबित कर्मचारी संबंधी मांगों को रखा गया था।
7 सितंबर को PLI पर क्या हुआ?
गिरीश चंद्र आरजी के अनुसार, 7 सितंबर को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से हुई बैठक में बैंक कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई और PLI को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय हुआ।
वित्त मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 7 सितंबर को BMS के नेतृत्व में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने PLI की मौजूदा संरचना की समीक्षा समेत कई मुद्दे उठाए। इसके बाद FY 2025-26 के लिए 19 नवंबर 2024 के PLI सर्कुलर के तहत योजना के क्रियान्वयन को फिलहाल ‘केप्ट इन एबेयंस’ यानी स्थगित रखने और इस मुद्दे को चल रही Bipartite Settlement/Joint Note वार्ता में उठाने का निर्णय लिया गया।
इसके बावजूद 11 सितंबर की हड़ताल जारी रहने पर BMS ने सवाल उठाया। वहीं UFBU का कहना था कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था पर कोई ठोस समयसीमा या सकारात्मक आश्वासन नहीं मिलने के कारण हड़ताल वापस लेने का आधार नहीं बना।
पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था पर गतिरोध
बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में Five-Day Banking लंबे समय से शामिल है। UFBU का कहना है कि 8 मार्च 2024 के 12वें Bipartite Settlement/9वें Joint Note में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था से संबंधित समझ बनी थी और अब उसके कार्यान्वयन की मांग की जा रही है।
वहीं, BMS का कहना है कि पांच दिवसीय बैंकिंग का मुद्दा सरकार के विचाराधीन है और इसका समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए। इस मुद्दे पर सरकार और बैंक यूनियनों के बीच मतभेद बना हुआ है। सरकारी पक्ष ने वार्ता जारी रहने की बात कही है, जबकि UFBU ठोस निर्णय या समयसीमा की मांग कर रहा है।
28 से 30 सितंबर की हड़ताल को लेकर BMS की चिंता
11 सितंबर की हड़ताल के बाद UFBU ने 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का कार्यक्रम घोषित किया है। इसके अलावा मांगों का समाधान नहीं होने की स्थिति में 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान भी किया गया है।
BMS के राष्ट्रीय सचिव ब्रह्मदत्त पांडे और गिरीश चंद्र आरजी ने सितंबर के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह अवधि बैंकों के Half-Yearly Closing से जुड़ी महत्वपूर्ण अवधि है। ऐसे समय लगातार बैंकिंग सेवाओं के प्रभावित होने से ग्राहकों, कारोबारियों और बैंकिंग व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
BMS का आकलन है कि लंबे समय तक शाखाओं के बंद रहने से बैंकिंग कारोबार का कुछ हिस्सा निजी बैंकों और अन्य माध्यमों की ओर स्थानांतरित हो सकता है। संगठन का कहना है कि इसका असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर पड़ सकता है। यह BMS का आकलन है और इसे संभावित प्रभाव के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
BMS ने बातचीत से समाधान की अपील की
BMS पदाधिकारियों ने बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों से अपील की कि वे हड़ताल के बजाय बातचीत और द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से लंबित समस्याओं के समाधान पर जोर दें।
BMS का कहना है कि वह सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए सरकार तथा बैंक प्रबंधन के साथ संवाद जारी रखने के पक्ष में है।
दूसरी ओर, UFBU से जुड़े संगठनों का कहना है कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था, PLI और अन्य लंबित मुद्दों पर ठोस समाधान नहीं मिलने के कारण आंदोलन जारी रखना जरूरी है। इस तरह बैंकिंग क्षेत्र में फिलहाल सरकार, बैंक प्रबंधन और विभिन्न कर्मचारी संगठनों के बीच वार्ता और आंदोलन दोनों समानांतर रूप से चल रहे हैं।

Javed Khan
Reported by: Javed Khan | Taj News
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