दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड: बहू शालू के बाद बेटे के कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस; 21 दिन में नौकर विशाल से 330 कॉल, 49 डिलीट व्हाट्सएप मैसेज और डुप्लीकेट चाबी बनी अहम सुराग
कानपुर डेस्क, 🌐 tajnews.in | बुधवार, 9 सितंबर 2026, 01:52:18 PM IST

tajnews.in | कानपुर। दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच में अब कहानी सिर्फ बहू शालू और दो हमलावरों तक सीमित नहीं रह गई है। शालू की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके पति और मृतक के बेटे सुब्रत की भूमिका भी खंगाल रही है। जांच में सामने आया है कि हत्या से पहले के 21 दिनों में सुब्रत और शालू का पुराने कर्मचारी विशाल गौतम से करीब 330 बार फोन संपर्क हुआ। पुलिस अब इन कॉल की टाइमिंग, अवधि और पैटर्न को खंगाल रही है। हालांकि 330 कॉल का आंकड़ा सामने आने के बावजूद यह अभी साबित नहीं करता कि सभी बातचीत हत्या की साजिश से जुड़ी थीं।
मामले में डुप्लीकेट चाबी, सुरक्षा गार्ड से संपर्क, सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों के बयान और कथित डिलीट व्हाट्सऐप संदेश जांच की अहम कड़ियां बन गए हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि वारदात की रात बेटे-बहू का पार्टी में जाना महज संयोग था या इसके पीछे पहले से कोई योजना थी।
10 मिनट में फ्लैट में पहुंच गए थे आरोपी
पुलिस जांच के मुताबिक, 5 सितंबर की रात करीब 9:36 बजे विनीत मिनोचा के बेटे सुब्रत, बहू शालू और उनका छह वर्षीय बेटा पार्टी के लिए फ्लैट से निकले थे। उनके निकलने के करीब 10 मिनट बाद रात 9:46 बजे दो संदिग्ध फ्लैट की ओर जाते सीसीटीवी में दिखाई दिए।
पुलिस के अनुसार, दोनों डुप्लीकेट चाबी की मदद से फ्लैट में दाखिल हुए और करीब 72 से 75 मिनट तक अंदर छिपे रहे। रात 10:58 बजे विनीत मिनोचा फ्लैट में लौटे। इसके बाद दोनों हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। रात करीब 11:28 बजे दोनों संदिग्ध फ्लैट से बाहर निकलते दिखाई दिए।
इस तरह आरोपियों के फ्लैट में दाखिल होने से लेकर उनके निकलने तक का पूरा घटनाक्रम करीब 102 मिनट का रहा, जबकि परिवार के निकलने से आरोपियों के फ्लैट से बाहर निकलने तक की पूरी टाइमलाइन करीब 112 मिनट बताई जा रही है।
पहले सड़क हादसे में हत्या की योजना का दावा
पुलिस पूछताछ में एक और अहम बात सामने आने की बात कही गई है। डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, शुरुआत में विनीत मिनोचा की हत्या को सड़क हादसे का रूप देने की योजना बनाई गई थी।
हालांकि व्यस्त यातायात और पकड़े जाने के डर से यह योजना बदल दी गई। इसके बाद फ्लैट के भीतर हत्या करने का कथित प्लान बनाया गया।
डुप्लीकेट चाबी ने खोली साजिश की एक कड़ी
जांच में फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक बनकर सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, विशाल को घर में आने-जाने की जानकारी थी और डुप्लीकेट चाबी के जरिए वह अपने साथी राजकिशोर के साथ फ्लैट में दाखिल हुआ।
पुलिस यह भी जांच रही है कि चाबी कब और कैसे तैयार कराई गई और वह आरोपियों तक कैसे पहुंची। इसी कड़ी को शालू की कथित भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है।
26 से ज्यादा वार, करीब आधे घंटे में हत्या
विनीत मिनोचा की हत्या बेहद निर्मम तरीके से की गई। उपलब्ध पुलिस जांच और रिपोर्टों के अनुसार, उनके शरीर पर 26 से अधिक चाकू के वार किए गए थे।
पुलिस के मुताबिक, दोनों हमलावर पहले से फ्लैट के भीतर मौजूद थे और विनीत के लौटने का इंतजार कर रहे थे। उनके लौटने के बाद दोनों ने कथित तौर पर हमला किया और करीब आधे घंटे के भीतर फ्लैट से निकल गए।
सुबह चार बजे लौटा परिवार, तब खुला राज
पुलिस जांच के मुताबिक, सुब्रत, शालू और उनका बच्चा देर रात पार्टी से लौटे। करीब चार बजे के आसपास घर पहुंचने के बाद शालू ने कमरे के बाहर खून देखा। अंदर जाने पर विनीत का शव पड़ा मिला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
शुरुआत में मामला फ्लैट में घुसकर की गई हत्या का लग रहा था, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिए संदिग्धों की पहचान पुराने कर्मचारी विशाल गौतम के रूप में होने के बाद जांच की दिशा बदल गई।
पुराना कर्मचारी था विशाल, परिवार से संपर्क बना रहा
विशाल गौतम पहले विनीत मिनोचा के यहां काम कर चुका था। पुलिस के मुताबिक, उसे करीब छह साल पहले रुपये चोरी करने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था। इसके बावजूद उसका परिवार से संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था और वह कभी-कभी घर आता-जाता था।
पुलिस का मानना है कि घर की व्यवस्था और अंदर-बाहर आने-जाने की जानकारी होने के कारण वह कथित साजिश में उपयोगी साबित हुआ।
21 दिन में 330 कॉल ने बढ़ाया शक
जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड अब एक बड़ी कड़ी बनकर सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, हत्या से पहले के 21 दिनों में शालू और उसके पति सुब्रत का विशाल के साथ करीब 330 बार फोन संपर्क हुआ। कुछ रिपोर्टों में शालू की ओर से करीब 30 और सुब्रत की ओर से करीब 300 कॉल बताए गए हैं।
हालांकि इन कॉल की संख्या को सीधे हत्या की साजिश का प्रमाण नहीं माना जा सकता। सुब्रत की ओर से पुलिस को यह बताया गया है कि विशाल परिवार के छोटे-मोटे काम करता था और इसी वजह से उससे फोन पर बातचीत होती थी। अब पुलिस कॉल के समय, अवधि और वारदात के आसपास के संपर्कों का मिलान कर रही है।
शालू और विशाल के 49 डिलीट मैसेज भी जांच में
जांच में शालू और विशाल के मोबाइल से 49 डिलीट व्हाट्सऐप संदेश मिलने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस इन संदेशों को रिकवर कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि इनमें किस तरह की बातचीत हुई थी।
यदि इन संदेशों से हत्या की योजना, समय, प्रवेश की व्यवस्था या कथित भुगतान से जुड़ी जानकारी मिलती है तो जांच को महत्वपूर्ण दिशा मिल सकती है। फिलहाल डिलीट संदेशों की पूरी सामग्री सार्वजनिक नहीं हुई है।
छह लाख रुपये की कथित सुपारी का एंगल
पुलिस जांच में छह लाख रुपये की कथित सुपारी का एंगल भी सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, हत्या के बदले रकम तय किए जाने और भुगतान की शर्तों की जांच की जा रही है।
हालांकि रकम से जुड़े दावे मुख्य रूप से पुलिस पूछताछ और आरोपियों के कथित बयानों पर आधारित हैं। इस संबंध में बरामदगी और अन्य स्वतंत्र साक्ष्यों का इंतजार है।
पार्टी की टाइमलाइन भी जांच के घेरे में
पुलिस ने उस पार्टी की टाइमलाइन भी खंगालनी शुरू कर दी है, जिसमें हत्या की रात सुब्रत और शालू के शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस टीम तिलकनगर स्थित कॉस्मोजिन लाउंज पहुंची और वहां जानकारी जुटाई।
बताया गया है कि लाउंज में रिकॉर्डिंग सुरक्षित नहीं रहती और कैमरे लाइव निगरानी के लिए इस्तेमाल होते हैं। ऐसे में पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों से यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सुब्रत और शालू कब वहां पहुंचे और कब निकले।
यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस यह स्पष्ट करना चाहती है कि परिवार की मौजूदगी घर से बाहर होना पहले से तय कार्यक्रम था या हत्या की कथित योजना में इसका कोई इस्तेमाल किया गया।
सुब्रत की भूमिका अभी सवालों के घेरे में
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, शालू और सुब्रत दोनों के विशाल से संपर्क के साक्ष्य मिले हैं। इसी वजह से सुब्रत से जुड़े कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर सुब्रत की भूमिका अभी जांच के दायरे में है। केवल विशाल से लगातार फोन संपर्क होना अपराध में उसकी संलिप्तता का अंतिम प्रमाण नहीं है। पुलिस यह देख रही है कि इन संपर्कों का हत्या की तैयारी से कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।
फ्लैट में लगे कैमरे भी जांच का अहम हिस्सा
विनीत मिनोचा के फ्लैट और अपार्टमेंट परिसर में कई सीसीटीवी कैमरे लगे थे। मुख्य गेट, डाइनिंग एरिया और किचन समेत कई हिस्सों में कैमरों की मौजूदगी की जानकारी सामने आई है।
पुलिस बाहरी कैमरों के साथ-साथ घर के अंदर उपलब्ध फुटेज को भी घटनाक्रम से जोड़ रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आरोपी किस रास्ते से अंदर आए, कहां छिपे और हत्या के बाद किस रास्ते से बाहर निकले।
लूट नहीं हुई, इसलिए हत्या की साजिश का शक गहराया
जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद घर से नकदी, जेवर या अन्य सामान लूटे जाने की बात सामने नहीं आई। इससे पुलिस का शुरुआती शक लूट के बजाय किसी सुनियोजित हत्या की ओर गया।
इसके बाद सीसीटीवी, पुराने कर्मचारी की पहचान, डुप्लीकेट चाबी और परिवार के सदस्यों के मोबाइल संपर्क की कड़ियों को जोड़ा गया।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल
विनीत मिनोचा हत्याकांड की शुरुआती तस्वीर एक बाहरी हमले की थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ मामला परिवार के भीतर संभावित साजिश तक पहुंच गया है।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि हत्या की योजना वास्तव में कब बनी, इसमें कितने लोग शामिल थे और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका क्या थी। शालू गिरफ्तार हो चुकी है, विशाल गौतम और राजकिशोर भी पुलिस की गिरफ्त में हैं, जबकि सुब्रत की भूमिका की जांच जारी है।
आखिरकार इस मामले में अदालत के सामने वही तथ्य निर्णायक होंगे जिन्हें पुलिस स्वतंत्र साक्ष्यों से साबित कर सकेगी। फिलहाल सीसीटीवी, कॉल डिटेल, डिलीट चैट, डुप्लीकेट चाबी, सुरक्षा गार्ड के बयान और पार्टी की टाइमलाइन—इन सभी कड़ियों को जोड़कर पुलिस हत्या की पूरी साजिश की तस्वीर तैयार करने में जुटी है।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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