दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्रशासनिक भवन के गेट पर ताला लगाने पर नोकझोंक; अतिरिक्त नियंता से धक्का-मुक्की, दारोगा का वीडियो वायरल होने पर अखिलेश यादव ने भी साधा निशाना
गोरखपुर डेस्क, 🌐 tajnews.in | बुधवार, 9 सितंबर 2026, 01:23:45 PM IST

tajnews.in | गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रों के आंदोलन के दौरान मंगलवार को प्रशासनिक भवन परिसर में हंगामा हो गया। छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच नोकझोंक और धक्का-मुक्की के बाद एक दारोगा का कथित धमकी भरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में दारोगा छात्रों से कहते सुनाई दे रहे हैं- “इतनी फोर्स लगाऊंगा कि ठंडा कर दूंगा… जान नहीं रहे हो, ये गोरखपुर पुलिस है।” वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस के रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन का आरोप है कि आंदोलनकारी छात्रों ने अतिरिक्त नियंता डॉ. वेद प्रकाश राय को घेरकर उनके साथ धक्का-मुक्की की और उन्हें वहां से निकलने में परेशानी हुई।
25 अगस्त से चल रहा था धरना, 5 सितंबर से भूख हड़ताल
गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र नेताओं का आंदोलन 25 अगस्त से प्रशासनिक भवन के सामने धरने के रूप में चल रहा था। मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए छात्रों ने 5 सितंबर से इसे भूख हड़ताल में बदल दिया।
आंदोलन का नेतृत्व छात्र नेता सतीश प्रजापति और उज्ज्वल सिंह समेत अन्य छात्र कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में निष्कासित विद्यार्थियों की बहाली, छात्रसंघ चुनाव कराने और छात्रसंघ चुनाव न होने के बावजूद छात्रों से लिए जा रहे छात्रसंघ शुल्क से जुड़े सवाल शामिल हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासनिक भवन के दोनों गेट पर लगा दिया ताला
मंगलवार को आंदोलनकारी छात्रों ने प्रशासनिक भवन के दोनों मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। इससे भवन के भीतर मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों के बाहर निकलने तथा आवागमन में परेशानी हुई।
सूचना मिलने पर अतिरिक्त नियंता डॉ. वेद प्रकाश राय छात्रों से बातचीत करने और गेट खुलवाने पहुंचे। उन्होंने छात्रों से आंदोलन खत्म करने और गेट खोलने को कहा, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। बातचीत के दौरान मामला गरमा गया और नोकझोंक की स्थिति बन गई।
प्रॉक्टर को घेरने के बाद सुरक्षा घेरे में निकाला गया
रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर कुछ छात्रों ने डॉ. वेद प्रकाश राय को घेर लिया। स्थिति बिगड़ने पर विश्वविद्यालय के सुरक्षा गार्डों ने हस्तक्षेप किया। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और अधिकारी को सुरक्षा घेरे में वहां से बाहर निकाला गया।
वायरल वीडियो से पहले का यह घटनाक्रम भी जांच का अहम हिस्सा है, क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रों पर अधिकारी के साथ अभद्रता और हाथापाई के प्रयास का आरोप लगाया गया है। दूसरी ओर छात्र अपने आंदोलन को अपनी मांगों के लिए जारी विरोध बता रहे हैं।
हंगामे के बीच सामने आया दारोगा का वीडियो
इसी घटनाक्रम के दौरान किसी ने पुलिसकर्मी का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वायरल वीडियो में दारोगा छात्रों से सख्त लहजे में बात करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उनके कथित शब्द हैं- “इतनी फोर्स लगाऊंगा कि ठंडा कर दूंगा… जान नहीं रहे हो, ये गोरखपुर पुलिस है।”
वीडियो में दारोगा छात्रों के आंदोलन के तरीके पर भी सवाल उठाते सुनाई दे रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वह यह कहते नजर आते हैं कि यदि आंदोलन शांतिपूर्ण है तो अधिकारी या पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ने जैसी स्थिति क्यों बनी। इसके बाद उन्होंने अतिरिक्त फोर्स बुलाने की चेतावनी दी।
वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और उसमें पुलिसकर्मी की पहचान की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इसलिए वायरल वीडियो में कही गई बातों को फिलहाल कथित बयान के तौर पर ही देखा जा रहा है।
छात्रों का आरोप, प्रशासन नहीं सुन रहा मांगें
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि वे कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिला। सोमवार को छात्र नेता सतीश प्रजापति ने कार्यवाहक कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी से भी मुलाकात की थी। अनशन समाप्त कराने को लेकर बातचीत हुई, लेकिन उन्हें तत्काल कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।
इसके बाद मंगलवार को भी आंदोलन जारी रहा और मामला प्रशासनिक भवन के गेट तक पहुंच गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर भी होगी कार्रवाई
अतिरिक्त नियंता डॉ. वेद प्रकाश राय की ओर से कैंट थाने में तहरीर दिए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, तहरीर में सतीश प्रजापति, सत्यम गोस्वामी, उज्ज्वल सिंह, विश्ववर्धन प्रताप सागर और उत्कर्ष पांडेय समेत छह नामजद तथा अन्य अज्ञात के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने और अन्य आरोपों में कार्रवाई की मांग की गई है।
पुलिस अब तहरीर, मौके के वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर सकती है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई पुलिस की भूमिका पर बहस
मामला केवल छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच विवाद तक सीमित नहीं रहा। दारोगा का कथित बयान सामने आने के बाद पुलिस की भूमिका भी चर्चा में आ गई है।
कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत और कार्रवाई के दौरान पुलिस की भाषा और तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, यदि आंदोलन के दौरान सरकारी काम में बाधा, अधिकारी से धक्का-मुक्की या हिंसा के आरोप सही पाए जाते हैं तो उस पर भी कानून के अनुसार कार्रवाई जरूरी होगी।
अखिलेश यादव ने भी वीडियो पर प्रतिक्रिया दी
वायरल वीडियो पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि आंदोलनकारी छात्रों के साथ संयम और सौम्यता बरती जानी चाहिए और वे अपराधी नहीं हैं। उनका बयान सामने आने के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है।
हालांकि, इस राजनीतिक प्रतिक्रिया से अलग पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से घटना के तथ्यों और जिम्मेदारी को लेकर आधिकारिक जांच का निष्कर्ष अभी सामने आना बाकी है।
अब दोनों पक्षों की भूमिका जांच के घेरे में
इस पूरे मामले में फिलहाल दो अलग-अलग तस्वीरें सामने हैं। छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें सुन नहीं रहा। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन का आरोप है कि आंदोलन के दौरान प्रशासनिक भवन के गेट पर ताला लगाया गया और अधिकारी के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति बनाई गई।
वहीं वायरल वीडियो ने पुलिस के व्यवहार पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच के लिए तीन बातें महत्वपूर्ण होंगी—प्रशासनिक भवन में वास्तव में क्या हुआ, अधिकारी के साथ छात्रों का व्यवहार क्या था और वायरल वीडियो में दारोगा की कही बात किस संदर्भ में तथा किस परिस्थिति में कही गई।
फिलहाल जांच और आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो के आधार पर संबंधित दारोगा के खिलाफ किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है। इसी तरह छात्रों के खिलाफ तहरीर में लगाए गए आरोप भी जांच का विषय हैं।
इस मामले में वायरल वीडियो को अंतिम प्रमाण मानने के बजाय पूरे घटनाक्रम के सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच जरूरी होगी। विश्वविद्यालय में आंदोलन जारी रहने के बीच अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि छात्रों की मांगों पर संवाद का रास्ता निकले और परिसर में कानून-व्यवस्था भी बनी रहे।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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