इंटरनेट और एआई के दौर में भी पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं : डॉ. पी. बी. झा

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21 साल बाद आगरा में लगा राष्ट्रीय पुस्तक मेला, 14 सितंबर तक चलेगा आयोजन

आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | शनिवार, 5 सितंबर 2026, 11:12:51 PM IST

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tajnews.in | आगरा। इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में सूचनाएं भले ही कुछ सेकंड में उपलब्ध हो जाती हों, लेकिन पुस्तकों का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। पुस्तकें केवल जानकारी नहीं देतीं, बल्कि व्यक्ति की सोच, तर्क क्षमता और कल्पनाशक्ति को विकसित करती हैं। युवाओं को पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ नियमित रूप से अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए।

आगरा कॉलेज में राष्ट्रीय पुस्तक मेले का उद्घाटन

यह बात आगरा कॉलेज के उप प्राचार्य डॉ. पी. बी. झा ने शनिवार को आगरा कॉलेज परिसर स्थित सप्रू हॉस्टल में 10 दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले के उद्घाटन के अवसर पर कही। उन्होंने युवाओं से प्रतिदिन कम से कम 15 पृष्ठ ऐसी पुस्तकों के पढ़ने का आग्रह किया, जो उनके पाठ्यक्रम का हिस्सा न हों।

HIGHLIGHTS
  • 21 साल बाद आगरा में 10 दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले का हुआ भव्य आगाज।
  • इंटरनेट और एआई के दौर में भी पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं: डॉ. पी. बी. झा।
  • ‘बुके नहीं, बुक दीजिए’ के तहत अतिथियों को भेंट की गईं संविधान की प्रतियां।
  • समय इंडिया ट्रस्ट और पुस्तक मेला समिति द्वारा 14 सितंबर तक होगा आयोजन।

21 साल बाद आगरा में राष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन

पुस्तक मेले के मंच पर उपस्थित अतिथिगण

सप्रू हॉस्टल परिसर में आयोजित यह राष्ट्रीय पुस्तक मेला 5 से 14 सितंबर तक चलेगा। आयोजकों के अनुसार, आगरा में करीब 21 साल बाद इस स्तर का पुस्तक मेला आयोजित किया जा रहा है। मेले में विभिन्न विषयों और रुचियों से संबंधित पुस्तकों को पाठकों के लिए उपलब्ध कराया गया है।

555 पुस्तक मेले आयोजित कर चुका है समय इंडिया ट्रस्ट

अतिथियों को संविधान की प्रति भेंट करते हुए

राष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन नई दिल्ली के समय इंडिया ट्रस्ट और पुस्तक मेला समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी चंद्र भूषण ने बताया कि समय इंडिया ट्रस्ट अब तक देश के 15 राज्यों में 555 पुस्तक मेलों का आयोजन कर चुका है। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले का उद्देश्य लोगों, विशेषकर युवाओं में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना और पुस्तकों को आम पाठक तक पहुंचाना है।

‘बुके नहीं, बुक दीजिए’ का संदेश

आगरा कॉलेज राष्ट्रीय पुस्तक मेला स्टॉल

कार्यक्रम में ‘बुके नहीं, बुक दीजिए’ पहल के तहत अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ की जगह संविधान की प्रतियां भेंट कर किया गया। चंद्र भूषण ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संविधान और अच्छी पुस्तकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों के पास डंडे और हथियारों के साथ संविधान और अच्छी पुस्तकें भी होनी चाहिए, क्योंकि पुस्तकें नागरिक चेतना और लोकतांत्रिक समझ को मजबूत करती हैं।

पुस्तक मेले में होंगे साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

पुस्तक मेले में पाठकों और साहित्यकारों की उपस्थिति

पुस्तक मेले के दौरान पुस्तक प्रदर्शनी के साथ साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। रविवार 6 सितंबर को शाम 4:30 बजे लोकगीत एवं देशभक्ति गीत प्रतियोगिता होगी। इसके बाद शाम 6 बजे स्थानीय कवियों का काव्य पाठ आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम का संचालन कवयित्री डॉ. मनीषा गिरी ने किया। इस अवसर पर शिक्षा, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोग मौजूद रहे।

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Pawan Kumar Singh Editor in Chief Taj News

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