नेपाल बाढ़ LIVE: जलप्रलय से बचकर लौटे भारतीयों ने सुनाई खौफनाक आपबीती, 149 सुरक्षित; सैकड़ों से अब भी संपर्क नहीं

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क, 🌐 tajnews.in | शनिवार, 29 अगस्त 2026, 04:22:15 AM IST

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tajnews.in | नेपाल/नई दिल्ली: नेपाल और चीन से जुड़े हिमालयी सीमा क्षेत्रों में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ और उससे पैदा हुई आपदा ने हजारों परिवारों को गहरा सदमा दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का अभियान लगातार जारी है।

HIGHLIGHTS
  1. नेपाल जलप्रलय: 149 भारतीय नागरिक सुरक्षित निकाले गए, तमिलनाडु के 21 यात्री सकुशल वतन लौटे।
  2. ‘सुनामी जैसा था मंजर’—बचकर लौटे यात्रियों ने सुनाई बाढ़ और मलबे के खौफनाक बहाव की आपबीती।
  3. करीब 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क साधने और उनकी खोज के लिए विदेश मंत्रालय का रेस्क्यू जारी।
  4. 30 से अधिक देशों के नागरिक आपदा से प्रभावित, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के भी नागरिक शामिल।

राहत की खबर यह है कि कई भारतीय नागरिक सुरक्षित बाहर निकल आए हैं और अपने घर लौटने के बाद उन्होंने उस भयावह मंजर की आंखों-देखी सुनाई है। वहीं, बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों से संपर्क न हो पाने के कारण उनके परिवारों की चिंता बनी हुई है।

तमिलनाडु के 21 नागरिकों को सुरक्षित निकालकर भारत लाया जा चुका है। इसके बाद भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी के अभियान में लगातार प्रगति की जानकारी सामने आई।

29 अगस्त तक उपलब्ध विदेश मंत्रालय से जुड़े अपडेट के अनुसार, 149 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से प्रभावित क्षेत्र से निकलकर नेपाल पहुंच चुके थे। वहीं, सैकड़ों भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित करने और उनकी स्थिति का पता लगाने के प्रयास जारी थे।

‘सुनामी जैसा था मंजर’, बचकर लौटे यात्रियों ने सुनाई आपबीती

आपदा प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित लौटे भारतीय यात्रियों ने बाढ़ के भयावह दृश्य को अपनी जिंदगी का सबसे खतरनाक अनुभव बताया।

तमिलनाडु लौटे यात्रियों के अनुसार पानी और मलबे का बहाव इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने का पर्याप्त समय तक नहीं मिला। कुछ यात्रियों ने अपने अनुभव में इस दृश्य को “सुनामी जैसा” बताया।

उनके अनुसार तेज बहाव के साथ कीचड़, पत्थर और भारी मलबा बहता हुआ आया। कई स्थानों पर सामान्य आवाजाही और संपर्क व्यवस्था अचानक प्रभावित हो गई।

सुरक्षित लौटे लोगों की आपबीती ने उन परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है, जिनके अपने अभी भी प्रभावित क्षेत्रों में हैं या जिनसे संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।

अब भी सैकड़ों भारतीयों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश

29 अगस्त तक उपलब्ध अपडेट के अनुसार करीब 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित नहीं हो पा रहा था।

इनमें तीर्थयात्री, पर्यटक और अन्य भारतीय नागरिक शामिल बताए गए हैं। हालांकि राहत और खोज अभियान के दौरान अलग-अलग समय पर सामने आने वाले आंकड़ों में बदलाव होता रहा है।

इससे पहले संपर्क से बाहर भारतीय नागरिकों की संख्या अलग-अलग अपडेट में 288 और 290 के आसपास भी बताई गई थी। ऐसे में प्रभावित लोगों की संख्या और उनकी स्थिति को लेकर अंतिम जानकारी राहत एवं संपर्क अभियान आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होगी।

भारतीय अधिकारियों की ओर से प्रभावित नागरिकों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।

30 से अधिक देशों के नागरिक भी आपदा से प्रभावित

यह त्रासदी केवल नेपाल और भारत तक सीमित नहीं है। प्रभावित हिमालयी क्षेत्रों में विभिन्न देशों के पर्यटक, कर्मचारी और अन्य नागरिक मौजूद थे।

रिपोर्टों के अनुसार 30 से अधिक देशों के नागरिक इस आपदा से प्रभावित हुए हैं और विभिन्न देशों के लोगों के लापता होने या संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई है।

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, चीन, ब्रिटेन, कनाडा और अन्य देशों के नागरिकों से जुड़े मामले भी सामने आए हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत और खोज अभियान जारी रहने के कारण विभिन्न देशों से जुड़े प्रभावित और लापता लोगों के आंकड़ों में भी लगातार बदलाव हो रहा है।

आखिर कितनी मौतें हुईं? आंकड़ों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं

इस भीषण आपदा में मृतकों और लापता लोगों की कुल संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।

28 अगस्त तक प्रकाशित विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 469 से लेकर 500 से अधिक तक बताई गई। वहीं, नेपाल और चीन से जुड़े प्रभावित क्षेत्रों के आंकड़ों को शामिल करने के तरीके में अंतर होने के कारण विभिन्न रिपोर्टों में संख्या अलग-अलग दिखाई दी।

इसी तरह लापता लोगों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में 1,500 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई, जबकि अन्य अपडेट में यह संख्या 2,000 से अधिक तक बताई गई।

ऐसे में मृतकों और लापता लोगों की किसी भी संख्या को फिलहाल अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता। राहत, खोज और आधिकारिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

भारतीय परिवारों की निगाहें अब भी फोन पर

भारत में अनेक परिवार अब भी अपने प्रियजनों के किसी फोन कॉल या संदेश का इंतजार कर रहे हैं।

विशेष रूप से उन परिवारों की चिंता अधिक है, जिनके सदस्य तीर्थयात्रा, पर्यटन, रोजगार या अन्य कारणों से प्रभावित हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद थे।

कई परिवारों के लिए राहत और चिंता के बीच की स्थिति बनी हुई है। जहां सुरक्षित लौटे लोगों के घरों में राहत है, वहीं संपर्क से बाहर लोगों के परिजन लगातार नई जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

भारतीय अधिकारियों द्वारा नेपाल के संबंधित प्रशासनिक तंत्र और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय कर प्रभावित भारतीय नागरिकों का पता लगाने और सुरक्षित निकासी के प्रयास किए जा रहे हैं।

राहत और बचाव अभियान के सामने कठिन चुनौती

प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान के सामने दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

खराब मौसम, भूस्खलन, क्षतिग्रस्त मार्ग और कई इलाकों का संपर्क व्यवस्था से कट जाना राहतकर्मियों के काम को कठिन बना रहा है।

इसके बावजूद बचाव दल प्रभावित लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

भारत की ओर से भी प्रभावित लोगों की सहायता के लिए राहत एवं समन्वय के प्रयास जारी हैं।

अभी अंतिम आंकड़ों का इंतजार

इस भयावह आपदा में सुरक्षित बाहर निकले भारतीय नागरिकों की खबर उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।

हालांकि, बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश अभी जारी है। इसके अलावा विभिन्न देशों के अनेक प्रभावित लोगों की स्थिति को लेकर भी अंतिम जानकारी सामने आना बाकी है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि राहत, खोज और निकासी अभियान जारी है तथा मृतकों, लापता लोगों और सुरक्षित निकाले गए नागरिकों के आंकड़े नए आधिकारिक अपडेट के साथ बदल सकते हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय, नेपाल के संबंधित अधिकारियों और अन्य आधिकारिक एजेंसियों से आने वाले नए अपडेट के आधार पर प्रभावित भारतीय नागरिकों की संख्या और उनकी स्थिति में बदलाव संभव है।

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