नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के पीछे चीन का हाथ? बाढ़ विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार ने लगाए गंभीर आरोप

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तिब्बत में नदियों और जल संसाधनों में हस्तक्षेप की जताई आशंका, नेपाल और भारत के लिए संभावित जोखिमों की वैज्ञानिक जांच की मांग

अंतरराष्ट्रीय डेस्क, 🌐 tajnews.in | शुक्रवार, 28 अगस्त 2026, 09:12:30 AM IST

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tajnews.in | भागलपुर/नई दिल्ली: नेपाल में हाल के दिनों में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं को लेकर एक गंभीर दावा सामने आया है। बाढ़ विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार ने दावा किया है कि तिब्बत में ग्लेशियर टूटने की घटना को केवल प्राकृतिक आपदा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, चीन ने तिब्बत में नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में हस्तक्षेप कर जल संसाधनों पर अपना नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की है, जिसके दूरगामी परिणाम नेपाल और भारत के लिए भी गंभीर हो सकते हैं।

HIGHLIGHTS
  1. नेपाल में आई भीषण बाढ़ व भूस्खलन के पीछे चीन के हस्तक्षेप का दावा, डॉ. विजय कुमार ने उठाए सवाल।
  2. तिब्बत में नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को मोड़ने और जल संसाधनों पर नियंत्रण की जताई गई आशंका।
  3. हिमालयी पर्यावरण से छेड़छाड़ को भारत और नेपाल दोनों देशों के लिए बताया गया बड़ा रणनीतिक व पर्यावरणीय खतरा।
  4. भारत सरकार से चीन से स्पष्टता मांगने और सीमा पार जल परियोजनाओं पर वैज्ञानिक निगरानी रखने की मांग।

डॉ. विजय कुमार का कहना है कि नेपाल में हाल में आई बाढ़ के पीछे केवल प्राकृतिक कारणों को जिम्मेदार मान लेना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन तिब्बत क्षेत्र में नदियों के प्रवाह को नियंत्रित करने और जल संसाधनों का उपयोग अपनी रणनीतिक जरूरतों के अनुसार करने की दिशा में काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता हिमालयी क्षेत्र की नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप है। उनके मुताबिक, यदि किसी नदी के प्राकृतिक प्रवाह को रोका या मोड़ा जाता है तो उसका असर केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। नदी के बहाव में बदलाव से जल का दबाव बढ़ सकता है और आगे चलकर अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

डॉ. विजय कुमार ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को समझने के लिए केवल मौसम या प्राकृतिक आपदा के सामान्य कारणों पर ध्यान देना काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि नेपाल में बाढ़ के पीछे किसी बड़े और सुनियोजित हस्तक्षेप की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता और इसकी गंभीर जांच की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि ग्लेशियर टूटने की घटनाएं तब अधिक खतरनाक हो जाती हैं, जब प्राकृतिक परिस्थितियों के साथ अत्यधिक दबाव या मानवीय हस्तक्षेप जुड़ जाता है। उनका कहना है कि हिमालयी क्षेत्र के संवेदनशील पर्यावरण में नदियों के प्रवाह और जल संसाधनों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

बाढ़ विशेषज्ञ ने भारत में नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत में कई स्थानों पर नदियों के प्राकृतिक बहाव को बदलने, रोकने या उनके मार्ग में निर्माण कार्य करने से जल निकासी की प्राकृतिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। इससे कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ की समस्या बढ़ने की आशंका रहती है।

उन्होंने गंगा के प्राकृतिक प्रवाह में बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप का उल्लेख करते हुए कहा कि नदियों के मूल स्वरूप और उनके प्राकृतिक मार्ग को समझे बिना किए गए निर्माण कार्य भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नदी के प्रवाह, तलछट और सहायक नदियों की प्राकृतिक व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ का प्रभाव कई वर्षों बाद बड़े संकट के रूप में सामने आ सकता है।

डॉ. विजय कुमार ने कहा कि नेपाल में बाढ़ और तिब्बत क्षेत्र की हाल की घटनाओं के बाद भारत को पूरे हिमालयी क्षेत्र में जल संसाधनों से जुड़े बदलावों पर गंभीर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और नदी तंत्र में हो रहे परिवर्तनों पर वैज्ञानिक अध्ययन के साथ-साथ रणनीतिक दृष्टि से भी निगरानी जरूरी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चीन तिब्बत के जल संसाधनों को अपने नियंत्रण में लेने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। उनके अनुसार, हिमालयी क्षेत्र की नदियां भारत सहित दक्षिण एशिया के कई देशों के लिए जीवनरेखा हैं और इनके प्राकृतिक प्रवाह में किसी भी बड़े बदलाव का असर सीमा पार तक पड़ सकता है।

डॉ. विजय कुमार ने भारत सरकार से चीन से इस मुद्दे पर स्पष्टता मांगने और तिब्बत क्षेत्र में हो रहे पर्यावरणीय एवं जल संसाधन संबंधी बदलावों की गंभीर निगरानी करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत को केवल तत्काल बाढ़ की स्थिति पर प्रतिक्रिया देने के बजाय हिमालयी नदियों और ग्लेशियरों से जुड़े संभावित दीर्घकालिक खतरों को भी समझना होगा।

उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जल संसाधनों पर नियंत्रण भविष्य की बड़ी भू-राजनीतिक चुनौती बन सकता है। ऐसे में भारत और नेपाल जैसे देशों के लिए नदियों के प्राकृतिक प्रवाह, ग्लेशियरों की स्थिति और सीमा पार जल परियोजनाओं पर लगातार वैज्ञानिक एवं रणनीतिक निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है।

गौरतलब है कि हिमालयी क्षेत्र में बाढ़, ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं ने पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ-साथ सीमा पार जल संसाधनों के प्रबंधन को भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना दिया है। हालांकि डॉ. विजय कुमार के चीन द्वारा हस्तक्षेप संबंधी दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

नेपाल में आई हालिया बाढ़ के कारणों और हिमालयी क्षेत्र में जल संसाधनों से जुड़े बदलावों पर वैज्ञानिक एवं आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जांच की आवश्यकता बनी हुई है।

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Pawan Kumar Singh Editor in Chief Taj News

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Chief Editor, Taj News


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