देश डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Tuesday, 13 Jan 2026 07:45 PM IST
सिर्सी/आगरा: भारत की नदियों को संवैधानिक सुरक्षा कवच प्रदान करने और आगरा की जीवनरेखा यमुना को पुनर्जीवित करने के लिए छिड़ा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। जहाँ कर्नाटक के सिर्सी से केंद्र सरकार को नदियों के लिए नया कानून बनाने का अल्टीमेटम दिया गया है, वहीं आगरा में प्रस्तावित ‘यमुना बैराज प्रोजेक्ट’ की फाइलों पर धूल जमने से पर्यावरण प्रेमियों में गहरा आक्रोश है। आइए जानते हैं क्या है इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत और सिर्सी रैली द्वारा भेजे गए ज्ञापन की बड़ी बातें।

यमुना बैराज: आगरा की प्यास और ताज की सुरक्षा का सवाल
आगरा के ‘रिवर कनेक्ट कैंपेन’ के अनुसार, ताजमहल के पार्श्व में पानी की कमी न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि ताज की लकड़ी की नींव (Ebony Wood Base) के लिए भी घातक है, जिसे नमी की आवश्यकता होती है।
प्रोजेक्ट की प्रस्तावित लागत और तकनीकी पक्ष:
- अनुमानित बजट: विभिन्न सर्वेक्षणों के अनुसार, यमुना बैराज के निर्माण और उसके आसपास के सौंदर्यीकरण पर लगभग ₹450 से ₹500 करोड़ की लागत आने का अनुमान है।
- बैराज का स्थान: यह बैराज ताजमहल के लगभग 1.5 किलोमीटर डाउनस्ट्रीम में प्रस्तावित है।
- मुख्य उद्देश्य: बैराज बनने से यमुना में साल भर पानी का ठहराव रहेगा, जिससे भूगर्भ जल स्तर (Groundwater Level) सुधरेगा और शहर की पेयजल किल्लत दूर होगी। साथ ही, नदी में पानी रहने से ताजमहल के पीछे ‘रिवर फ्रंट’ विकसित किया जा सकेगा।
सिर्सी रैली का 5-सूत्रीय ज्ञापन: केंद्र को भेजी गई मांगें
सिर्सी में आयोजित विशाल रैली के बाद आयोजकों ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इसकी मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- संवैधानिक दर्जा: नदियों को भारत के संविधान के तहत एक ‘जीवित कानूनी व्यक्ति’ (Living Legal Entity) घोषित किया जाए।
- नदी संरक्षक की नियुक्ति: प्रत्येक प्रमुख नदी के लिए सरकार एक स्वतंत्र ‘लोक संरक्षक’ नियुक्त करे, जो नदी की ओर से कोर्ट में मुकदमा लड़ सके।
- शून्य प्रदूषण नीति: नदियों में सीधे गिरने वाले सीवर और औद्योगिक कचरे पर पूर्ण प्रतिबंध हो और दोषी अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा चले।
- प्राकृतिक प्रवाह (Aviral Dhara): बिजली परियोजनाओं या बांधों के नाम पर नदियों के प्राकृतिक बहाव को 15% से अधिक न रोका जाए।
- नदी अदालत का गठन: नदियों से जुड़े विवादों और उनके अधिकारों के हनन की सुनवाई के लिए विशेष ‘रिवर प्रोटेक्शन ट्रिब्यूनल’ बनाया जाए।
एक्टिविस्ट्स की हुंकार: अब वादों का समय खत्म
आगरा के पर्यावरणविद् ब्रज खंडेलवाल और डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य का कहना है कि आगरा में दशकों से केवल घोषणाएं हुई हैं। 2014 के चुनावों के दौरान भी यमुना बैराज एक प्रमुख मुद्दा था, लेकिन 12 साल बाद भी स्थिति जस की तस है। एक्टिविस्ट्स ने चेतावनी दी है कि यदि इस वर्ष यमुना बैराज पर धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ, तो एत्मादुद्दौला से शुरू हुई यह यमुना आरती एक उग्र आंदोलन का रूप ले लेगी।
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