Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Thursday, April 09, 2026, 12:45:30 PM IST

नोएडा: गगनचुंबी इमारतों और तेज रफ्तार जिंदगी वाले शहर नोएडा से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। जिस उम्र में युवा अपने सुनहरे भविष्य के ताने-बाने बुनते हैं, उसी उम्र में एक होनहार छात्र लापरवाही और मौत के एक गहरे गड्ढे का शिकार हो गया। बुधवार की दोपहर अमिटी यूनिवर्सिटी के 21 वर्षीय छात्र हर्षित भट्ट की सेक्टर 94 स्थित एक परित्यक्त निर्माण स्थल पर पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। हर्षित अपनी अंतिम वर्ष की परीक्षा खत्म होने की खुशी में अपने तीन अन्य दोस्तों के साथ वहां पिकनिक मनाने गया था। दोस्तों की आंखों के सामने यह जश्न चंद पलों में मातम में बदल गया। उसे बचाने के प्रयास में उसके तीनों दोस्त भी गहरे पानी में समाने लगे थे, जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर नोएडा में खुले पड़े निर्माण स्थलों की घोर लापरवाही और प्रशासन की अनदेखी पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

परीक्षा खत्म होने की खुशी और पिकनिक का वह मनहूस फैसला
गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके का रहने वाला 21 वर्षीय हर्षित भट्ट, अमिटी यूनिवर्सिटी के ‘अमिटी स्कूल ऑफ फिजिकल एजुकेशन’ में अंतिम वर्ष का छात्र था। बुधवार का दिन उसके और उसके दोस्तों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया था, क्योंकि उनकी परीक्षाएं समाप्त हो गई थीं। पढ़ाई के बोझ से मिली इस आजादी का जश्न मनाने के लिए चारों दोस्तों ने कॉलेज कैंपस से बाहर जाकर कुछ वक्त साथ बिताने की योजना बनाई। युवाओं का यह हुजूम घूमते-फिरते सेक्टर-126 थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सेक्टर 94 में स्थित सुपरनोवा इमारत के पास पहुंच गया। वहां एक बहुत पुराना और परित्यक्त निर्माण स्थल था, जिसमें पिछले दिनों हुई बारिश का पानी भारी मात्रा में जमा हो गया था।
बाहर से देखने पर यह पानी का गड्ढा किसी छोटी झील या तालाब जैसा प्रतीत हो रहा था। युवाओं के मन में अक्सर खतरों से खेलने का जो उफान होता है, वही उफान हर्षित को उस पानी की तरफ खींच ले गया। चिलचिलाती धूप और पिकनिक के खुशनुमा माहौल के बीच हर्षित ने उस पानी में नहाने का मन बनाया। वह बेफिक्र होकर पानी में उतर गया, लेकिन सतह के नीचे छिपी मौत की गहराई का उसे जरा भी इल्म नहीं था। कुछ ही कदम आगे बढ़ने पर अचानक उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई और वह गहरे पानी में गोते खाने लगा। बाहर खड़े उसके दोस्तों ने जब उसे डूबते और छटपटाते हुए देखा, तो उनके होश उड़ गए।
दोस्ती की खातिर मौत से जंग: बचाने कूदे तीन दोस्त भी लगे डूबने
अपनी आंखों के सामने अपने सबसे अच्छे दोस्त को मौत के मुंह में जाता देख बाकी तीनों युवा किनारे पर खड़े नहीं रह सके। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत उस गहरे और दलदली पानी में छलांग लगा दी। लेकिन वह एक साधारण तालाब नहीं था, बल्कि एक निर्माण स्थल का खोदा गया बेहद गहरा गड्ढा था जिसकी तली में कीचड़ और मलबा जमा था। हर्षित को बचाने के प्रयास में तीनों दोस्त भी उस दलदल में फंसने लगे और उनकी भी सांसें उखड़ने लगीं। घटनास्थल पर अचानक चीख-पुकार और मौत का खौफनाक मंजर पैदा हो गया।

गनीमत यह रही कि इस चीख-पुकार को आसपास से गुजर रहे कुछ स्थानीय लोगों ने सुन लिया। उन्होंने बिना एक पल भी गंवाए डायल 112 पर पुलिस कंट्रोल रूम को आपातकालीन सूचना दी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें सायरन बजाती हुई घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ीं। बचाव दलों ने मौके पर पहुंचते ही तुरंत रस्सियों और गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। पानी में छटपटा रहे हर्षित के तीनों दोस्तों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाल लिया गया। वे पूरी तरह से दहशत में थे और उनकी हालत बेहद नाजुक थी। लेकिन दुर्भाग्य से, जब तक गोताखोर हर्षित तक पहुंच पाते, तब तक वह बहुत गहरे पानी में जा चुका था।
अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित, परिवार में पसरा मातम
गोताखोरों ने जब हर्षित को पानी से बाहर निकाला, तो उसकी सांसें थम चुकी थीं। एंबुलेंस के जरिए उसे तुरंत पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। उधर, जैसे ही यह मनहूस खबर इंदिरापुरम में हर्षित के परिवार तक पहुंची, उनके घर में कोहराम मच गया। जिस बेटे को सुबह उन्होंने परीक्षा देने के लिए हंसते हुए घर से विदा किया था, शाम को उसकी मौत की खबर ने परिवार के सारे सपने चकनाचूर कर दिए। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।
इस पूरी घटना पर नोएडा के डीसीपी साद मियां खान ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस मामले के हर एक पहलू की बहुत ही गहनता से जांच कर रही है। डीसीपी ने कहा, “शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और परिवार वालों को पूरी जानकारी दे दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह एक दर्दनाक हादसा प्रतीत होता है, लेकिन हम इस बात की भी कानूनी जांच कर रहे हैं कि इतने गहरे गड्ढे को खुला क्यों छोड़ा गया था और इसके लिए कौन सी निर्माण एजेंसी जिम्मेदार है।” जिन तीन छात्रों को बचाया गया है, उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है, लेकिन वे इस सदमे से बुरी तरह टूट चुके हैं।
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अमिटी यूनिवर्सिटी ने जताया गहरा दुख, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस हृदयविदारक घटना पर अमिटी यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने भी अपना गहरा शोक व्यक्त किया है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि हर्षित ने घटना वाले दिन परीक्षा देने के बाद पूरी तरह से सामान्य रूप से कैंपस छोड़ दिया था। बयान में कहा गया, “हमें पुलिस के माध्यम से अपने एक होनहार छात्र की दुखद मौत की सूचना मिली। यह हमारे संस्थान और उसके परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है। पुलिस इस पूरे मामले के कारणों की जांच कर रही है और विश्वविद्यालय प्रशासन उनके साथ हर कदम पर पूरा सहयोग कर रहा है। हम इस मुश्किल घड़ी में शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी और हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करते हैं।”

इस हादसे ने एक बार फिर से नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की घोर लापरवाही को बेनकाब कर दिया है। यह कोई पहला मामला नहीं है जब शहर में इस तरह की जानलेवा घटनाएं सामने आई हों। याद दिला दें कि इसी साल जनवरी 2026 में नोएडा के ही सेक्टर 150 में एक बेहद खौफनाक हादसा हुआ था। वहां एक 27 वर्षीय युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार एक ऐसे ही पानी से भरे विशाल गड्ढे में गिर गई थी, जिससे डूबकर उसकी तड़प-तड़प कर जान चली गई थी। उस घटना के बाद भी प्रशासन ने बड़े-बड़े वादे किए थे कि शहर में मौजूद सभी खुले निर्माण स्थलों और गहरे गड्ढों को सुरक्षित किया जाएगा, लेकिन हर्षित की मौत ने यह साबित कर दिया है कि वे वादे सिर्फ कागजों तक ही सीमित थे।
बिल्डरों और प्राधिकरण की यह आपराधिक अनदेखी आखिर और कितने मासूम युवाओं की बलि लेगी? खुले पड़े ये बेसमेंट और निर्माण स्थल बारिश के दिनों में मौत के तालाब बन जाते हैं, जिनके चारों तरफ न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया जाता है और न ही कोई मजबूत बाड़ या बैरिकेडिंग की जाती है। आम जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं में इस घटना को लेकर भारी रोष है। उनकी सख्त मांग है कि सिर्फ घटना का पंचनामा कर लेना ही काफी नहीं है, बल्कि जिस भी बिल्डर या सरकारी विभाग की लापरवाही से यह गड्ढा ऐसे ही खुला छोड़ा गया था, उसके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का कड़ा मुकदमा दर्ज होना चाहिए। जब तक इस तरह के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान नहीं होगा, तब तक इस कंक्रीट के जंगल में ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं। एक हंसता-खेलता परिवार आज अपनी जिंदगी भर की पूंजी खो चुका है, और इसका जवाब सिस्टम को जरूर देना होगा।

Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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