
Published: Wednesday, 07 January 2026, 06:15 AM IST | New Delhi
‘इंसानों से ज्यादा कुत्तों की फिक्र?’ (More concern for dogs than humans?) यह सवाल खुद देश की सबसे बड़ी अदालत के जहन में है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में दायर याचिकाओं की बाढ़ पर गहरी हैरानी जताई है। सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता (Justice Sandeep Mehta) ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि इंसानों से जुड़े मामलों में भी आमतौर पर इतनी बड़ी संख्या में याचिकाएं नहीं आतीं, जितनी कुत्तों के लिए आ रही हैं।

‘इंसानों से ज्यादा कुत्तों की फिक्र’: बुधवार को होगा बड़ा फैसला
यह पूरा वाकया तब हुआ जब जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच सुनवाई कर रही थी। वकीलों ने जैसे ही आवारा कुत्तों का मुद्दा उठाया, जजों ने अर्जियों की संख्या पर आश्चर्य जताया। हालांकि, कोर्ट ने आश्वासन दिया है कि इस मुद्दे पर बुधवार को विस्तार से सुनवाई होगी। इसके लिए एक विशेष बेंच तैयार की गई है, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया शामिल होंगे। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ‘इंसानों से ज्यादा कुत्तों की फिक्र?’ जैसे सवालों के बीच सभी पक्षों को धैर्यपूर्वक सुना जाएगा।
स्कूल-अस्पतालों से कुत्तों को हटाने का था आदेश
सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती बेवजह नहीं है। पिछले साल 7 नवंबर 2025 को कोर्ट ने सख्त आदेश दिया था कि स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम भेजा जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें वापस उसी जगह न छोड़ा जाए। दिल्ली में बच्चों में फैलते रेबीज और प्रशासनिक लापरवाही को देखते हुए कोर्ट इस मामले में बेहद गंभीर है। अब सबकी निगाहें बुधवार की सुनवाई पर हैं, जहां ‘इंसानों से ज्यादा कुत्तों की फिक्र?’ वाली बहस पर कोर्ट का रुख साफ होगा।
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