Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in I 20 Feb 2026, 9:15 pm IST
आगरा: ताजनगरी आगरा के चिकित्सा जगत से एक बेहद शानदार और गर्व करने वाली खबर सामने आई है। आगरा के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज (S.N. Medical College) के कार्डियोलॉजी विभाग ने वह कर दिखाया है, जो पूरे क्षेत्र के चिकित्सा इतिहास में एक मील का पत्थर बन गया है। कॉलेज के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हिमांशु यादव और उनकी टीम ने एक 17 वर्षीय किशोर की हृदय की मुख्य धमनी (Aorta) में आई अत्यंत गंभीर और जानलेवा रुकावट को बिना किसी ओपन-हार्ट सर्जरी के, केवल स्टेंटिंग (Stenting) के जरिए सफलतापूर्वक ठीक कर दिया है।

चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस गंभीर और दुर्लभ बीमारी को ‘कोआर्कटेशन ऑफ एओर्टा’ (Coarctation of Aorta) कहा जाता है। आगरा और इसके आसपास के समूचे क्षेत्र में इस तरह की जटिल स्टेंटिंग का यह पहला सफल केस है। इस ऐतिहासिक सर्जरी ने न सिर्फ एक होनहार युवक की जान बचाई है, बल्कि सरकारी अस्पतालों की कार्यक्षमता और वहां मौजूद अत्याधुनिक सुविधाओं पर आम जनता के भरोसे को भी कई गुना बढ़ा दिया है।
क्या थी मरीज की गंभीर स्थिति? 17 की उम्र में हो चुका था ब्रेन हैमरेज जानकारी के अनुसार, यह 17 वर्षीय मरीज पिछले काफी लंबे समय से ‘रेसिस्टेंट हाइपरटेंशन’ (Resistant Hypertension) यानी अनियंत्रित और बेहद खतरनाक हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित था। इस उम्र के बच्चों में अमूमन ब्लड प्रेशर की शिकायत नहीं होती है, लेकिन इस किशोर की स्थिति इतनी भयावह थी कि उसके शरीर के ऊपरी हिस्से (हाथों और सिर) में ब्लड प्रेशर (BP) का स्तर 240/120 तक पहुंच जाता था। वहीं, इसके बिल्कुल विपरीत, उसके पैरों में ब्लड प्रेशर इतना कम था कि मशीन उसे रिकॉर्ड ही नहीं कर पाती थी।
ब्लड प्रेशर के इस जानलेवा उतार-चढ़ाव और दिमाग की नसों पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव के कारण, महज 17 साल की कच्ची उम्र में उसे 3 महीने पहले एक गंभीर ‘ब्रेन हैमरेज’ (इन्ट्रारेब्रल हैमरेज – Intracerebral Hemorrhage) का भी सामना करना पड़ा था। परिवार वाले बच्चे की इस हालत को देखकर पूरी तरह से टूट चुके थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर इतनी कम उम्र में उनके बेटे को कौन सी लाइलाज बीमारी लग गई है।
बाल के बराबर पतली रह गई थी मुख्य धमनी: ऐसे हुआ डायग्नोसिस मरीज को गंभीर हालत में एस.एन. मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया। यहां मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. शिवांग शर्मा और डॉ. हरि सिंह ने मरीज की गहनता से जांच शुरू की। तमाम आधुनिक पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांचों के बाद जो सच सामने आया, उसने डॉक्टरों को भी चौंका दिया।
मरीज ‘कोआर्कटेशन ऑफ एओर्टा’ नामक जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित पाया गया। इस बीमारी में दिल से पूरे शरीर में शुद्ध खून ले जाने वाली सबसे बड़ी और मुख्य धमनी (Aorta) सिकुड़ जाती है। इस 17 वर्षीय किशोर के मामले में यह सिकुड़न इतनी ज्यादा थी कि मुख्य धमनी में लगभग 99% तक रुकावट आ चुकी थी और वह सिकुड़कर सिर्फ एक इंसानी ‘बाल’ के बराबर पतली रह गई थी। इसी रुकावट के कारण खून शरीर के निचले हिस्से (पैरों) तक नहीं पहुंच पा रहा था और सारा दबाव वापस लौटकर दिमाग और शरीर के ऊपरी हिस्से पर पड़ रहा था, जिसने उसे ब्रेन हैमरेज का शिकार बना दिया था।
दो सप्ताह की प्लानिंग और डॉ. हिमांशु यादव का ऐतिहासिक ऑपरेशन बीमारी का सटीक पता चलने के बाद मामला कार्डियोलॉजी विभाग को सौंपा गया। एस.एन. मेडिकल कॉलेज के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हिमांशु यादव ने इस चुनौती को स्वीकार किया। यह कोई सामान्य एंजियोप्लास्टी नहीं थी। मुख्य धमनी (एओर्टा) में स्टेंट डालना एक अत्यंत जटिल और जोखिम भरा काम होता है, जिसमें जरा सी चूक मरीज की जान ले सकती है।
डॉ. हिमांशु यादव और उनकी टीम ने इस ऑपरेशन के लिए लगातार दो सप्ताह तक विस्तृत योजना (Homework and Planning) बनाई। इसके बाद, बिना किसी बाहरी विशेषज्ञ (Outside Expert) की मदद के, डॉ. यादव ने स्वयं इस जटिल स्टेंटिंग प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। अत्याधुनिक कैथ लैब (Cath Lab) में किए गए इस ऑपरेशन के दौरान सिकुड़ी हुई धमनी को गुब्बारे (Ballooning) की मदद से फुलाया गया और फिर वहां एक विशेष स्टेंट (Stent) लगा दिया गया ताकि वह दोबारा न सिकुड़े।
ऑपरेशन के तुरंत बाद ही चमत्कारिक परिणाम देखने को मिले। धमनी में रक्त का प्रवाह पूरी तरह सामान्य हो गया है। मरीज के पैरों में अब खून की सप्लाई सुचारू रूप से पहुंच रही है और उसका जानलेवा हाई ब्लड प्रेशर भी अब बिल्कुल नॉर्मल रेंज में आ गया है। मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है और नई जिंदगी पाकर उसके परिवार वालों की आंखों में खुशी के आंसू हैं।
‘असाध्य रोग योजना’ बनी गरीब परिवार के लिए वरदान इस पूरे प्रकरण में सबसे सुकून देने वाली बात यह रही कि इस अत्यंत महंगी और जटिल सर्जरी के लिए मरीज के परिवार को एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ा। मरीज की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। यदि वे किसी बड़े निजी अस्पताल (Private Hospital) या कॉरपोरेट मल्टीस्पेशलिटी सेंटर में यह ऑपरेशन कराते, तो स्टेंट, दवाइयों और सर्जरी के खर्च को मिलाकर इस पूरी प्रक्रिया की लागत 5 लाख रुपये से अधिक आती।
लेकिन, एस.एन. मेडिकल कॉलेज में यह पूरा ऑपरेशन उत्तर प्रदेश सरकार की ‘असाध्य रोग योजना’ (Asadhya Rog Yojana) के तहत पूरी तरह से निःशुल्क (Free of cost) किया गया। इस योजना ने एक गरीब पिता को उसके बेटे की जिंदगी वापस लौटाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।
प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने दी टीम को बधाई इस ऐतिहासिक सफलता पर एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने डॉ. हिमांशु यादव, डॉ. शिवांग शर्मा, डॉ. हरि सिंह और उनकी पूरी टीम को हार्दिक बधाई दी है।
अपने संदेश में डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा, “यह सिर्फ आगरा के लिए ही नहीं, बल्कि हमारे पूरे मेडिकल कॉलेज के लिए एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व उपलब्धि है। हमारे डॉक्टरों ने अपनी योग्यता से यह साबित कर दिया है कि वे बिना किसी बाहरी सहयोग के भी जटिल से जटिल चिकित्सीय चुनौती से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमारे संस्थान का एकमात्र लक्ष्य यही है कि अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं समाज के अंतिम छोर पर खड़े गरीब से गरीब व्यक्ति तक आसानी से पहुंचें। शासन की योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत और असाध्य रोग योजना) के माध्यम से हम भविष्य में भी ऐसे दुर्लभ और जीवन रक्षक ऑपरेशन निःशुल्क करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की इस शानदार टीम वर्क और समर्पण की अब पूरे आगरा शहर और चिकित्सा जगत में जमकर सराहना हो रही है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि सरकारी अस्पतालों में बेहतर संसाधन और इच्छाशक्ति हो, तो वहां भी प्राइवेट अस्पतालों से बेहतर और जीवन रक्षक इलाज संभव है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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