Karnataka Assembly Election 2026 political scenario and economic growth analysis

आगरा डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Tuesday, 13 January 2026, 11:45 AM IST

2026 की शुरुआत में कर्नाटक एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर सत्ता के भीतर नेतृत्व संघर्ष, गुटबाज़ी और संतुलन की राजनीति सरकार को लगातार असहज बनाए हुए है, तो दूसरी ओर राज्य की अर्थव्यवस्था पूरे वेग से आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच ठंडी लेकिन स्थायी तनातनी राजनीतिक माहौल को अस्थिर रखे हुए है, बावजूद इसके विकास की गाड़ी थमी नहीं है।

चहुंओर विकास, भीतर उलझी राजनीति: कर्नाटक 2026 की दहलीज़ पर

बृज खंडेलवाल
बैंगलोर,

2026 की शुरुआत में कर्नाटक एक अजीब विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर राज्य की राजनीति कांग्रेस के भीतर नेतृत्व संघर्ष, गुटबाज़ी और सत्ता-संतुलन की रस्साकशी में उलझी है, तो दूसरी ओर अर्थव्यवस्था पूरे वेग से आगे बढ़ रही है। सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच ठंडी लेकिन लगातार बनी रहने वाली तनातनी ने राजनीतिक माहौल को अस्थिर बना रखा है, फिर भी विकास की गाड़ी रुकी नहीं है।
कर्नाटक की औद्योगिक तस्वीर बदल चुकी है। नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2025–30 के तहत राज्य ने ₹7.5 लाख करोड़ निवेश और 20 लाख रोजगार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। खास बात यह है कि 70 प्रतिशत से अधिक निवेश अब “बियॉन्ड बेंगलुरु” क्षेत्रों में जा रहा है।


टुमकुरु में इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी, विजयपुरा में फूड व सोलर पार्क, चित्रदुर्ग में ड्रोन पार्क और चिक्कबल्लापुर–धारवाड़ में इलेक्ट्रिक व्हीकल क्लस्टर, ये सब संकेत हैं कि कर्नाटक अब एक शहर की अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ रहा है। मैसूर और ननजंगुड़ जैसे शहर भी औद्योगिक नक्शे पर उभर रहे हैं।
राज्य की वित्तीय सेहत फिलहाल मजबूत दिखती है। अप्रैल–नवंबर 2025–26 के दौरान कर्नाटक का अपना टैक्स रेवेन्यू 20.97 प्रतिशत बढ़कर ₹1,34,109 करोड़ तक पहुंच गया, जो देश में सबसे अधिक वृद्धि दर है। कुल राजस्व प्राप्तियां 2026 में ₹2.92 ट्रिलियन तक अनुमानित हैं।

बृज खंडेलवाल

निर्यात भी तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025 में कर्नाटक का निर्यात ₹2,31,888 करोड़ (27.15 अरब डॉलर) रहा। इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, एयरोस्पेस और इंजीनियरिंग उत्पाद राज्य की ताकत बने हुए हैं। यही वजह है कि युवा उद्यमी और पारंपरिक उद्योग घराने नए यूनिट्स लगाने में रुचि दिखा रहे हैं।
इस आर्थिक रफ्तार के उलट, राजनीति एक व्यस्त चौराहे जैसी हो गई है, जहां हर गुट को लगता है कि रास्ता उसी का है। कांग्रेस कागजों पर मजबूत है; 224 सदस्यीय विधानसभा में उसके 136 विधायक हैं। 2023 की जीत ने जनादेश दिया था, लेकिन आंतरिक कलह ने सरकार की ऊर्जा को बांट दिया है।
सिद्धारमैया अनुभव और सामाजिक समीकरणों के दम पर सत्ता में हैं। समर्थक उन्हें AHINDA (अल्पसंख्यक–पिछड़ा–दलित) राजनीति का प्रतीक मानते हैं, तो आलोचक उनकी कुर्सी को “लीज पर ली हुई” बताते हैं। डी.के. शिवकुमार संगठन के मजबूत स्तंभ हैं, लेकिन ढाई-ढाई साल के सत्ता-साझे का सवाल अधर में लटका है। दिल्ली दरबार के चक्कर, नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहें और संभावित कैबिनेट फेरबदल शासन को अनिश्चित बना रहे हैं, विपक्ष, खासतौर पर जेडी यू, ताक लगाए बैठे हैं, कब सरकार लड़खड़ाए और वो शिकार करें।
कर्नाटक की राजनीति में जाति आज भी निर्णायक डोर है। सरकार का ₹3.71 लाख करोड़ का बजट और ‘गारंटी योजनाएं’, जैसे गृह ज्योति, जिसके तहत दो करोड़ घरों को मुफ्त बिजली, AHINDA राजनीति का विस्तार हैं। विपक्ष इसे विभाजनकारी कहता है, लेकिन खुद भी जातिगत गणित से बाहर नहीं निकल पाता। नतीजा यह कि विकास से ज्यादा पहचान का शोर सुनाई देता है।
बैंगलोर में विधान सौधा से बाहर तस्वीर उतनी चमकदार नहीं। बेंगलुरु राज्य की आय का 38 प्रतिशत देता है और देश के 40 प्रतिशत यूनिकॉर्न यहीं हैं, लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था पिछड़ रही है। खेती 55 प्रतिशत लोगों को रोजगार देती है, पर विकास दर सीमित है। 2025 में 1200 से अधिक किसान आत्महत्याएं इस असंतुलन की गवाही देती हैं।
गारंटी योजनाएं लोकप्रिय हैं, पर महंगी भी। राज्य का कर्ज 4.2 लाख करोड़ तक पहुंच गया है और राजस्व अधिशेष घाटे में बदलकर लगभग ₹25,000 करोड़ हो चुका है। जीएसटी चोरी और खर्च बढ़ाने की राजनीति वित्तीय दबाव बढ़ा रही है।
बेंगलुरु आज अवसरों के साथ-साथ थकान की कहानी भी है। ट्रैफिक जाम से सालाना ₹19,000 करोड़ का नुकसान, पानी की भारी किल्लत और अनियंत्रित शहरी फैलाव निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर रहा है। पर्यटन भी झटका खा रहा है, बंदीपुर क्षेत्र में 2025 की घटनाओं के बाद बुकिंग्स में भारी गिरावट आई।
स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक हैं। कर्नाटक को अब गुटबाज़ी कम और शासन अधिक चाहिए। जातिगत नारों से ऊपर उठकर आर्थिक सपनों, रोजगार, टिकाऊ शहरों और संतुलित विकास पर फोकस जरूरी है।
कर्नाटक की असली परीक्षा यही है, क्या वह तेज़ आर्थिक रफ्तार को राजनीतिक स्थिरता और समावेशी विकास में बदल पाएगा, या फिर शोर भरी राजनीति विकास की आवाज़ को दबा देगी?

also 📖: संगमरमर में बसी मोहब्बत, मोबाइल पर पनपता इश्क़: ताज की छाया में बदलती प्रेम कथाएँ

वैश्विक हिंदी दिवस: नागपुर से विश्वपटल तक हिंदी की सांस्कृतिक, बौद्धिक और मानवीय यात्रा

#Karnataka2026 #KarnatakaElection #KarnatakaPolitics #Siddaramaiah #DKShivakumar #CongressKarnataka #Bengaluru #SouthIndiaPolitics #IndianPolitics

✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
📧 pawansingh@tajnews.in
📱 अपनी खबर सीधे WhatsApp पर भेजें: 7579990777
👉 TajNews WhatsApp Channel
👉 Join WhatsApp Group
🐦 Follow on X
🌐 tajnews.in

By Thakur Pawan Singh

✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह 📧 pawansingh@tajnews.in 📱 अपनी खबर सीधे WhatsApp पर भेजें: 7579990777 👉 Taj News WhatsApp Channel

3 thoughts on “चहुंओर विकास, भीतर उलझी राजनीति: कर्नाटक 2026 की दहलीज़ परतेज़ आर्थिक रफ्तार बनाम सत्ता-संतुलन की राजनीति, किस ओर जाएगा राज्य?”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *