क्राइम डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Wednesday, 04 Feb 2026 11:45 PM IST
गाजियाबाद (Ghaziabad): दिल्ली से सटे गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित भारत सिटी सोसाइटी में तीन सगी बहनों की सामूहिक आत्महत्या (Triple Suicide) की गुत्थी जितनी सुलझने की कोशिश की जा रही है, उतनी ही उलझती जा रही है। 9वीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली इन तीन नाबालिगों की मौत के मामले में अब एक चश्मदीद गवाह सामने आया है, जिसने उस काली रात का आंखों देखा हाल बयां किया है। चश्मदीद के खुलासे, दीवार पर लिखी अंग्रेजी की लाइनें और एक रहस्यमयी डायरी ने इस केस को और भी पेचीदा बना दिया है।

चश्मदीद अरुण की जुबानी: ‘रात के 2 बजे का वो डरावना सच’
सोसाइटी में रहने वाले अरुण कुमार वह शख्स हैं, जिन्होंने अनजाने में ही सही, लेकिन मौत के उस खेल को अपनी आंखों से देखा। अरुण ने बताया कि घटना वाली रात (मंगलवार देर रात) ठीक 2 बजे उनकी नींद खुली थी।
- बालकनी की लाइट और वो परछाइयां: अरुण ने बताया, “रात के ठीक दो बजे थे। सामने वाले फ्लैट की बालकनी में लाइट जल रही थी। मेरी नजर वहीं चली गई, क्योंकि उस वक्त कोई अगर रेलिंग पर बैठा दिखे तो नॉर्मल नहीं लगता। मुझे लगा कोई कपल (Couple) है। एक आदमी जैसे पीछे की तरफ कूदने की कोशिश कर रहा था और दूसरा उसे अपनी ओर खींच रहा था, बचाने की कोशिश कर रहा था।”
- मौत का लाइव मंजर: अरुण ने रोंगटे खड़े कर देने वाला विवरण देते हुए कहा, “मुझे लगा कि पहले एक लड़की रेलिंग से नीचे उतरी, फिर दोबारा रेलिंग पर बैठ गई। तभी दूसरी बच्ची आकर उससे लिपट गई। इसके बाद तीसरी ने दोनों को अपनी ओर खींचने की कोशिश की, लेकिन उसी पल तीनों एक साथ नीचे गिर गईं।”
- गलतफहमी: अरुण को उस वक्त बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि गिरने वाली तीनों बहनें हैं। उन्हें लगा कि यह पति-पत्नी और बच्चे का मामला है। उन्होंने तुरंत एंबुलेंस और पुलिस को कॉल किया और गार्ड्स को बुलाया। जब वे नीचे पहुंचे, तब हकीकत सामने आई कि यह तो एक ही घर की तीन किशोरियां थीं।
कमरे का सन्नाटा और दीवार की चीख: ‘I AM VERY ALONE’
घटना के बाद जब पुलिस टीम उस फ्लैट के अंदर पहुंची, जहां से बच्चियों ने छलांग लगाई थी, तो वहां का मंजर किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था। कमरे में अजीब सा सन्नाटा पसरा था।
- फर्श पर बिखरी तस्वीरें: पुलिस के कदम रखते ही नजर फर्श पर पड़ी, जहां परिवार की कई तस्वीरें बिखरी पड़ी थीं। ऐसा लग रहा था मानो मरने से पहले उन्होंने अपने परिवार की यादों को जमीन पर फेंक दिया हो।
- दीवार पर लिखा दर्द: कमरे की दीवार पर अंग्रेजी में कुछ ऐसा लिखा था, जो किसी की भी रूह कंपा दे। वहां लिखा था- “I AM REALLY VERY ALONE, MY LIFE IS VERY VERY ALONE, I AM VERY VERY ALONE” (मैं वास्तव में बहुत अकेली हूं, मेरा जीवन बहुत अकेला है, मैं बहुत-बहुत अकेली हूं)। यह लाइनें सवाल खड़ा करती हैं कि भरे-पूरे परिवार, माता-पिता और भाई-बहनों के बीच रहने वाली ये बच्चियां खुद को इतना अकेला क्यों महसूस कर रही थीं?
‘डायरी’ में दफन है राज: ‘जो लिखा है, सब सच है’
पुलिस को कमरे से एक डायरी बरामद हुई है, जिसे अब इस केस की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है।
- सच्चाई का दस्तावेज: डायरी के शुरुआती पन्नों पर बच्चियों ने लिखा है कि “इस डायरी में जो कुछ भी दर्ज है, वह सब सच है। इसे जरूर पढ़ा जाए।”
- पुलिस की चुप्पी: जांच अधिकारी मान रहे हैं कि तीनों बच्चियों की मौत का असली सच, उनका मानसिक द्वंद्व और उस ‘टास्क’ की जानकारी इन्हीं पन्नों में छिपी हो सकती है। फिलहाल पुलिस ने डायरी के कंटेंट को सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि मामला बाहरी दिखावे से कहीं ज्यादा गहरा और मनोवैज्ञानिक है।
उलझी हुई पारिवारिक कहानी: 2 पत्नियां, 5 बच्चे और एक छत
इस केस का पारिवारिक एंगल भी बेहद चौंकाने वाला है। जांच में सामने आया है कि बच्चियों के पिता चेतन ने दो शादियां की थीं।
- रिश्तों का ताना-बाना: पहली शादी के कई साल बाद तक संतान नहीं हुई, तो उन्होंने पहली पत्नी की रजामंदी से उनकी ही छोटी बहन (अपनी साली) से दूसरी शादी कर ली।
- कौन किसकी बेटी: दूसरी शादी के बाद तीन बच्चे हुए। इसी दौरान चमत्कारिक रूप से पहली पत्नी से भी दो बच्चे हो गए। इस तरह घर में दो पत्नियां (सगी बहनें) और पांच बच्चे एक साथ रहते थे। जिन तीन लड़कियों ने सुसाइड किया, उनमें से दो दूसरी पत्नी की और एक पहली पत्नी की बेटी थी। बाहर से परिवार खुशहाल दिखता था, लेकिन अंदरूनी रिश्तों की जटिलता का असर बच्चों के दिमाग पर क्या पड़ रहा था, यह जांच का विषय है।
50 टास्क, ‘लीडर’ और आखिरी दिन
पुलिस की शुरुआती जांच में ‘ऑनलाइन टास्क’ या गेमिंग का एंगल सबसे मजबूत नजर आ रहा है।
- 50 टास्क का चक्र: जांच अधिकारियों को संकेत मिले हैं कि बच्चियां किसी ऐसे सिलसिले का हिस्सा थीं जिसमें कुल 50 टास्क थे। जिस दिन यह घटना हुई, वह उस टास्क का ‘आखिरी दिन’ था।
- लीडर की भूमिका: पुलिस को शक है कि तीनों बहनों में मंझली बहन (बीच वाली) इस पूरे खेल की ‘लीडर’ थी। वही तय करती थी कि कब क्या करना है। बाकी दोनों बहनें उसके प्रभाव में थीं और उसके निर्देशों का पालन करती थीं। तीनों का हर काम साथ करना—उठना, बैठना, खाना—एक ‘कलेक्टिव साइकोसिस’ (सामूहिक मनोविज्ञान) की ओर इशारा करता है।
डिजिटल दुनिया में कैद और स्कूल से दूरी
ये बच्चियां पिछले दो साल से स्कूल नहीं जा रही थीं। पढ़ाई में कमजोर होने का हवाला देकर उन्हें घर पर ही रखा गया था। पड़ोसियों के मुताबिक, वे बहुत शांत रहती थीं।
- डिजिटल जांच: पुलिस ने सभी मोबाइल, टैबलेट और गैजेट्स जब्त कर लिए हैं। डिजिटल फॉरेंसिक टीम यह पता लगा रही है कि क्या वे किसी ऑनलाइन ग्रुप, ‘ब्लू व्हेल’ जैसे गेम या किसी कल्ट (Cult) से जुड़ी थीं।
- कोरियन कनेक्शन: डीसीपी निमिष पाटिल, जिन्होंने खुद मौका-ए-वारदात का मुआयना किया, ने बताया कि बच्चियां कोरियन कल्चर से अत्यधिक प्रभावित थीं। डायरी और सुसाइड नोट में भी इसके संकेत मिले हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या डिजिटल दुनिया की चकाचौंध ने इन मासूमों को असली दुनिया से इतना दूर कर दिया कि उन्हें मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आया?
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