Fri, 28 Nov 2025 08:22 PM IST, Delhi, India.
दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुँचती दिखाई दे रही है। जांच एजेंसियों ने फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी के परिसर में बने डॉ. शाहीन के फ्लैट से बड़ी मात्रा में नकदी, सोना और विदेशी मुद्रा बरामद की है। एजेंसियों के अनुसार, बरामदगी के बाद यह साफ होता है कि डॉ. शाहीन न सिर्फ आतंकियों के संपर्क में थीं, बल्कि उस नेटवर्क को आगे बढ़ाने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही थीं।

सऊदी अरब से लौटने के बाद संदिग्ध संपर्कों में आई बदलाव 🌍
जांच सूत्रों के अनुसार, डॉ. शाहीन 2014 से 2018 तक सऊदी अरब के एक मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर थीं। भारत लौटने के बाद 2018 से 2021 तक तीन वर्ष वह बिना काम के घर पर रहीं। इसी दौरान उनके विभिन्न संदिग्ध तत्वों से संपर्क बढ़े और वे आतंकी गतिविधियों से जुड़ गईं। एजेंसियों का दावा है कि इसी समय उन्हें टेरर फंडिंग के रूप में धन भी मिला।

2021 में यूनिवर्सिटी ज्वॉइन कर बढ़ाया नेटवर्क
2021 में जब उन्होंने अल फलाह यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के रूप में कार्यभार संभाला, तो उन्होंने कथित तौर पर “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” के तहत अन्य डॉक्टरों और कर्मचारियों से संपर्क बढ़ाना शुरू किया। इसी दौरान उनकी नजदीकियां डॉ. मुजम्मिल से बढ़ीं, जिनसे उनका रिश्ता प्यार और शादी की बात तक पहुंच गया। इसके पीछे भी नेटवर्क विस्तार की मंशा बताई जा रही है।

डिजिटल लॉकर खुलते ही चौक गई जांच टीम 🔐
जम्मू-कश्मीर पुलिस और दिल्ली स्पेशल सेल पहले ही डॉ. शाहीन के फ्लैट की तलाशी ले चुकी थी, लेकिन एक डिजिटल लॉकर नहीं खोल पाई थी। गुरुवार रात एनआईए टीम उन्हें मौके पर लेकर गई और लॉकर खुलवाया।
लॉकर के खुलते ही एजेंसियों को पैकेट्स के ढेर मिले, जिन पर खाकी रंग की टेप लगी थी।

18.5 लाख नकद, 300 ग्राम सोना और विदेशी करेंसी बरामद 💰
जैसे-जैसे पैकेट खोले गए, टीम को उनमें 500-500 रुपये के नोट मिले। कुल मिलाकर 18.50 लाख रुपये बरामद हुए।
इसके अलावा:
- दो सोने के बिस्किट
- कुल 300 ग्राम जूलरी
- सऊदी अरब की करेंसी
भी लॉकर से मिली।
एजेंसियाँ मान रही हैं कि बरामद रकम और सोना टेरर फंडिंग से जुड़े होने की संभावना को मजबूत करता है।
जांच अब किस दिशा में?
एनआईए, दिल्ली स्पेशल सेल और जम्मू-कश्मीर पुलिस इस मामले में संयुक्त रूप से आगे की जांच कर रही हैं। एजेंसियों का फोकस अब इस बात की पुष्टि पर है कि यह फंडिंग किस स्तर तक पहुँची, इसमें कौन-कौन शामिल था और क्या नेटवर्क दिल्ली से बाहर भी फैला है।
✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह | ताज न्यूज़ – आईना सच का | www.tajnews.in
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