असम में घुसपैठिया विवाद, राजनीति और लोकतंत्र पर असर

घुसपैठिया मंत्र जपता भस्मासुर: असम से देश तक फैलता ज़हर और लोकतंत्र पर खतरा

Political Desk, Taj News | Updated: Sunday, 08 February 2026, 07:39 PM IST लेखक: बादल सरोज — भारत में आम तौर से तीन दिन कुछ विशेष माने जाते हैं और ये सभी भारतीयों के होते हैं; 26 जनवरी, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर जैसे अवसरों पर देश मेल-मिलाप, शांति, एकजुटता और संविधान की ताकत की […]

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भारत में चुनाव आयोग, मतदाता सूची और लोकतंत्र पर संकट

जनतंत्र की खोखली होती नींव: चुनाव, संस्थाएं और तानाशाही की बढ़त

Political Desk, Taj News | Updated: Thursday, 22 January 2026, 06:35 PM IST आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर उठते गंभीर सवालों को लेखक राजेंद्र शर्मा अपने इस आलेख में सघन मतदाता पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग की निष्पक्षता और सत्ता के चुनावी दुरुपयोग के संदर्भ में सामने रखते […]

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बंगाल राजनीति में ईडी सीबीआई छापेमारी और ध्रुवीकरण

बंगाल की राजनीति को ध्रुवीकृत करने का तमाशा: चुनाव, एजेंसियां और असली मुद्दों से भटकाव

Political Desk, Taj News | Updated: Wednesday, 21 January 2026, 07:15 PM IST चुनाव नज़दीक आते ही केंद्रीय जांच एजेंसियों की अचानक सक्रियता को लेखक मोहम्मद सलीम अपने इस आलेख में महज़ भ्रष्टाचार-रोधी कार्रवाई नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति को जानबूझकर ध्रुवीकृत करने की रणनीति बताते हैं, जहाँ ईडी और सीबीआई की छापेमार कार्रवाइयाँ बार-बार […]

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दिल्ली स्वर्ग व्यंग्य लेख, ट्रेन देरी पर सत्ता और आस्था पर कटाक्ष

दिल्ली ही स्वर्ग है? ट्रेन देरी के बहाने सत्ता, आस्था और व्यवस्था पर व्यंग्य

Political Desk, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Sunday, 18 January 2026, 04:10 PM IST देश में जब भी कोई ट्रेन बीच रास्ते रुकती है, मामला केवल तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह राजनीति, आस्था और सत्ता की सामूहिक कथा में बदल जाता है—इसी संदर्भ में व्यंग्यकार संजय पराते […]

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"India development challenges and promises"

दलदली जमीन पर आसमान छूते वादे: तेज़ रफ़्तार विकास के बीच छूटते छोटे सपने 🚉⚡

Fri, 28 Nov 2025 08:22 PM IST, Agra, Uttar Pradesh. भारत इन दिनों दो विपरीत दिशाओं के बीच खड़ा है—एक तरफ़ आसमान छूते विकास के वादे, और दूसरी तरफ़ रोज़मर्रा की ज़िंदगी की हकीकत। तेज़ी से बदलते भारत के बीच गाँव-कस्बों का आम नागरिक एक ऐसे चौराहे पर खड़ा दिखाई देता है, जहाँ हर कदम […]

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