Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 26 Feb 2026, 08:45 pm IST
Taj News Health & City Desk
आगरा की बड़ी खबरें और स्वास्थ्य जगत की उपलब्धियां
आगरा (Agra): ताजनगरी आगरा के स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र से एक बेहद सुखद और गर्व करने वाली खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित एस एन मेडिकल कॉलेज आगरा (S.N. Medical College Agra) के न्यूरोसर्जरी विभाग ने अपनी काबलियत का लोहा मनवाते हुए चिकित्सा जगत में एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने एक 9 वर्षीय मासूम बच्चे के दिमाग में पनप रहे बेहद जटिल और दुर्लभ ब्रेन ट्यूमर का सफल ऑपरेशन कर उसकी जान बचा ली है। एस एन मेडिकल कॉलेज आगरा में हुई इस सफल सर्जरी ने यह साबित कर दिया है कि अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं और अत्यंत जटिल ऑपरेशनों को अंजाम देने की पूरी क्षमता मौजूद है। बच्चे के मस्तिष्क में मौजूद इस ‘क्रैनियोफैरिंजियोमा’ (Craniopharyngioma) नामक ट्यूमर को आधुनिक ‘स्कल बेस सर्जरी’ (Skull Base Surgery) तकनीक के माध्यम से सफलतापूर्वक निकाल दिया गया है।
क्या है क्रैनियोफैरिंजियोमा (Craniopharyngioma) ट्यूमर?
▲ एस एन मेडिकल कॉलेज आगरा की विशेषज्ञ टीम द्वारा मासूम की सफल सर्जरी।
इस ऑपरेशन की जटिलता को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि यह ट्यूमर आखिर होता क्या है। एस एन मेडिकल कॉलेज आगरा के न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. गौरव धाकरे (Neurosurgeon Dr. Gaurav Dhakre) ने इस दुर्लभ बीमारी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जानकारी दी कि क्रैनियोफैरिंजियोमा मस्तिष्क (Brain) के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण ट्यूमर में से एक माना जाता है। यह आमतौर पर पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary Gland) के पास विकसित होता है, जो शरीर के कई महत्वपूर्ण हार्मोन्स को नियंत्रित करती है।
डॉ. धाकरे के अनुसार, “इस प्रकार के ट्यूमर की सर्जरी तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है, विशेषकर जब मरीज की उम्र बहुत कम (9 वर्ष) हो। यह ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन दिमाग के उस हिस्से में होता है जहां से आंखों की रोशनी (Optic Nerves) और हार्मोनल संतुलन नियंत्रित होता है। जरा सी भी चूक बच्चे की आंखों की रोशनी छीन सकती थी या उसे जीवन भर के लिए हार्मोनल बीमारियों का शिकार बना सकती थी।”
एस एन मेडिकल कॉलेज आगरा के डॉक्टरों ने कैसे किया यह चमत्कार?
इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम देना किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं थी। एस एन मेडिकल कॉलेज आगरा के न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. मयंक अग्रवाल ने ऑपरेशन की बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि यह ट्यूमर मस्तिष्क की सबसे महत्वपूर्ण रक्त नलिकाओं (Blood Vessels) और नसों से अत्यधिक चिपका हुआ था। इसे अलग करने के लिए माइक्रोस्कोपिक विजन और अत्यधिक ‘सूक्ष्म तकनीक’ (Microsurgical Techniques) की आवश्यकता पड़ी। घंटों चली इस स्कल बेस सर्जरी में डॉक्टरों ने बेहद सावधानी से नसों को बिना नुकसान पहुंचाए ट्यूमर को बाहर निकाला।
वहीं, विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. तरुणेश शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकार के ट्यूमर के सफल उपचार के लिए सिर्फ ऑपरेशन टेबल पर ही नहीं, बल्कि ऑपरेशन से पहले (Pre-operative) और ऑपरेशन के बाद (Post-operative) का प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि यह सफलता एस एन मेडिकल कॉलेज आगरा की पूरी टीम के मजबूत ‘टीम वर्क’ का ही परिणाम है। इस विशेषज्ञ टीम में डॉ. राहुल सिंह और डॉ. ललित कुमार ने भी अपनी अहम और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एनेस्थीसिया और एंडोक्रिनोलॉजी विभाग का शानदार योगदान
ब्रेन सर्जरी में मरीज को बेहोश करना और उसके मस्तिष्क के दबाव को नियंत्रित रखना सबसे जोखिम भरा काम होता है। इस सर्जरी के दौरान एस एन मेडिकल कॉलेज आगरा के एनेस्थीसिया (Anesthesia) विभाग की टीम ने अपना शानदार योगदान दिया। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. मिहिर गुप्ता, डॉ. लवप्रिया तथा डॉ. प्रभा ने ऑपरेशन के दौरान मासूम मरीज का कुशलतापूर्वक एनेस्थेटिक प्रबंधन किया, जिससे न्यूरोसर्जन्स को बिना किसी बाधा के अपना काम करने में मदद मिली।
चूंकि यह ट्यूमर हार्मोन ग्रंथि के पास था, इसलिए सर्जरी के बाद शरीर में हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance) का खतरा बना रहता है। इस जटिलता को संभालने की जिम्मेदारी एंडोक्रिनोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. धर्मेंद्र तिवारी ने उठाई और उन्होंने इसका सफल प्रबंधन किया। ऑपरेशन के पश्चात बच्चे को एस एन मेडिकल कॉलेज आगरा के अति-आधुनिक ‘SS ICU’ में शिफ्ट किया गया। यहाँ SS ICU के इंचार्ज डॉ. अतिहर्ष अग्रवाल के कुशल नेतृत्व में 24 घंटे सतत निगरानी और गहन चिकित्सा (Intensive Care) देखभाल की गई, जिसके चलते बच्चे ने तेजी से रिकवरी की।
सरकारी अस्पतालों में विश्वस्तरीय सुविधाएं: प्रिंसिपल डॉ. प्रशांत गुप्ता
इस बड़ी सफलता पर खुशी जताते हुए एस एन मेडिकल कॉलेज आगरा के प्रिंसिपल एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हमारे संस्थान की बढ़ती आधुनिक सुविधाओं, अत्यंत अनुभवी चिकित्सकों और एक बेहतरीन समन्वित टीम वर्क (Coordinated Teamwork) का जीता-जागता प्रमाण है। उन्होंने यह भी बताया कि अब गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को ऐसी महंगी और जटिल न्यूरोसर्जरी के लिए दिल्ली या बड़े प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है; यह सब एस एन मेडिकल कॉलेज आगरा में उपलब्ध है।
सर्जरी के बाद अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से हंसते-खेलते हुए छुट्टी दे दी गई है। हालांकि, भविष्य में किसी भी जोखिम से बचने और नियमित फॉलो-अप के लिए बच्चे को कॉलेज के रेडियोथेरेपी (Radiotherapy) विभाग में रेफर किया गया है, ताकि उसका आगे का उपचार सुनिश्चित किया जा सके। मेडिकल कॉलेज की इस मीडिया सेल रिपोर्ट ने पूरे आगरा शहर में डॉक्टरों के प्रति सम्मान और बढ़ा दिया है।
Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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