🕒 बुधवार, 8 अक्टूबर 2025 | Updated at: दोपहर 02:20 बजे IST | रायबरेली, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में दलित युवक की हत्या ने एक बार फिर जातीय हिंसा और सामाजिक असमानता के मुद्दे को उजागर कर दिया है। 38 वर्षीय हरिओम की मौत के बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी पर गैंगस्टर एक्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगाया जाएगा।

Raebareli Dalit Murder Case: गैंगस्टर एक्ट और NSA की कार्रवाई शुरू
फतेहपुर के तारावती गांव के रहने वाले हरिओम बीते बुधवार रात अपने ससुराल ऊंचाहार जा रहे थे। रास्ते में गदागंज थाना क्षेत्र के पास एक ढाबे के नजदीक उन्हें ग्रामीणों ने संदिग्ध समझकर रोक लिया। इसके बाद भीड़ ने उन्हें बेरहमी से पीटा, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि पहले पांच आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, और मंगलवार देर रात चार और गिरफ्तार किए गए। इनमें मुख्य आरोपी सुख सागर अग्रहरि, शिवम, उनके रिश्तेदार और लल्ली पासी शामिल हैं। लल्ली पासी के साथ रहने वाले एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जांच का दायरा बढ़ा, 15 संदिग्धों की पहचान
पुलिस की जांच टीम ने अब तक घटना से जुड़े करीब 10 से 15 अन्य संदिग्धों की पहचान कर ली है। एसपी ने स्पष्ट किया कि इस घटना में शामिल सभी आरोपियों को कानून के तहत सख्त सजा दी जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशासन ने ऊंचाहार और गदागंज क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है ताकि कोई तनाव न फैले। दलित संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है।
हरिओम कौन थे?
हरिओम एक मेहनती और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, जो अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए दिन-रात मेहनत करते थे। उनके रिश्तेदारों के अनुसार, वे किसी से विवाद नहीं करते थे और समाज में सम्मानित जीवन जीते थे। उनकी हत्या ने न सिर्फ उनके परिवार को, बल्कि पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है।
उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चों के सामने अब जीवन की कठिन चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। स्थानीय प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की बात कही है, लेकिन सामाजिक न्याय की मांग अब और तेज हो गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सामाजिक आक्रोश
इस घटना के बाद कई राजनीतिक दलों ने प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि दलितों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन विफल रहा है। वहीं सत्ताधारी दल ने त्वरित कार्रवाई को अपनी प्रतिबद्धता बताया है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि जातीय मानसिकता की गहराई को दर्शाती है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दी जाए।
सोशल मीडिया पर #JusticeForHariom
सोशल मीडिया पर #JusticeForHariom ट्रेंड कर रहा है। लोग इस घटना को लेकर गुस्सा जाहिर कर रहे हैं और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं। कई यूज़र्स ने लिखा, “जातीय हिंसा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” कुछ ने यह भी कहा कि “हरिओम की मौत ने समाज की असली तस्वीर दिखा दी है।”
कानून की धाराएँ और प्रशासनिक सख्ती
गैंगस्टर एक्ट और NSA जैसे सख्त कानूनों का इस्तेमाल इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोपियों की संपत्ति जब्त की जा सकती है और NSA के तहत बिना मुकदमे के लंबी अवधि तक हिरासत में रखा जा सकता है।
पुलिस ने यह भी कहा है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की राजनीतिक या सामाजिक दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा और निष्पक्ष जांच की जाएगी।
हरिओम की हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की परीक्षा है। यह घटना दर्शाती है कि आज भी समाज में जातीय भेदभाव मौजूद है और कमजोर वर्गों को निशाना बनाया जाता है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली न्याय तभी होगा जब दोषियों को त्वरित सजा मिले और पीड़ित परिवार को सम्मानजनक मुआवजा और सुरक्षा दी जाए।
यह मामला सिर्फ रायबरेली का नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है — कि अगर हम सामाजिक समरसता नहीं बनाएंगे, तो ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती रहेंगी।
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संपादन: ठाकुर पवन सिंह | pawansingh@tajnews.in
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👉 Amnesty International on caste violence






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