Fri, 28 Nov 2025 04:18 PM IST, Pithoragarh, Uttarakhand.
पतंजलि आयुर्वेद एक बार फिर विवाद में है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में पतंजलि के गाय के घी का सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल मिला है। 2020 में लिए गए इस सैंपल की रिपोर्ट पर लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब कोर्ट ने फैसला सुनाया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, पतंजलि घी की लैब जांच तीन स्तरों पर कराई गई—प्रदेश स्तर पर रुद्रपुर, और राष्ट्रीय स्तर पर गाजियाबाद। दोनों जांचों में सैंपल मानकों पर खरा नहीं पाया गया। अदालत ने पतंजलि आयुर्वेद पर 1 लाख रुपये का जुर्माना, डिस्ट्रीब्यूटर ब्रह्म एजेंसीज पर 25 हजार रुपये, और विक्रेता करण जनरल स्टोर पर 15 हजार रुपये का दंड लगाया है।

मामला 2020 से चल रहा, रिपोर्ट 2021 और 2022 में भी हुई पुष्टि
खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन के मुताबिक 20 अक्टूबर 2020 को कासनी स्थित एक जनरल स्टोर से पतंजलि गाय के घी का सैंपल लिया गया था।
पहली जांच में घी मानकों से नीचे पाया गया।
2021 में पतंजलि की ओर से पुनः परीक्षण की अपील की गई और सैंपल को गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया।
26 नवंबर 2021 को आई रिपोर्ट में भी घी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पाया।
इसके बाद विभाग ने केस कोर्ट में पेश किया। लगभग 1348 दिनों की प्रक्रिया के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
अधिकारियों का बयान: “मानक पूरे न होने पर स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है”
खाद्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि
- जांच में नमूने को फिट फॉर कंसम्पशन नहीं पाया गया
- गुणवत्ता मानकों से विचलन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है
अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि रिपोर्ट वैज्ञानिक परीक्षणों पर आधारित है और उसी के आधार पर कार्रवाई की गई है।
पतंजलि पर इससे पहले भी सवाल उठे हैं
जांच और गुणवत्ता से जुड़े मामले पतंजलि कंपनी को पहले भी विवादों में डालते रहे हैं।
कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने पटंजलि को “भ्रामक विज्ञापनों” के मामले में फटकार भी लगाई थी।
देशभर में पतंजलि के हजारों स्टोर और बड़ी ग्राहक संख्या को देखते हुए यह ताज़ा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
लंबी देरी क्यों हुई? यहां समझिए पूरा क्रम
- 2020: सैंपल लिया गया
- 2021: राज्य लैब में फेल, पतंजलि की अपील पर राष्ट्रीय लैब भेजा गया
- नवंबर 2021: राष्ट्रीय लैब की रिपोर्ट भी फेल
- 2022: केस कोर्ट में गया
- 2025: कोर्ट का अंतिम निर्णय, तीनों पर जुर्माना
यह देरी प्रशासनिक प्रक्रिया, लैब रिपोर्टों और न्यायिक प्रक्रिया के कारण बताई जा रही है।
उपभोक्ताओं में चिंता: “आयुर्वेदिक होने के नाम पर भरोसा तोड़ने वाली बात”
कई उपभोक्ताओं का कहना है कि
- पतंजलि अपनी पहचान आयुर्वेद और प्राकृतिक उत्पादों पर बनाती है
- ऐसे में गुणवत्ता रिपोर्ट का फेल होना चिंता का कारण है
- भरोसा बनाए रखना कंपनी की जिम्मेदारी है
आगे क्या? विभाग निगरानी बढ़ाने की तैयारी में
खाद्य विभाग ने संकेत दिया है कि
- बाजार में बिक रहे घी और अन्य डेयरी उत्पादों की जांच तेज की जाएगी
- जिन ब्रांडों की रिपोर्ट संदिग्ध मिलेगी, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी
संपादन: ठाकुर पवन सिंह | ताज न्यूज – आईना सच का
ईमेल: pawansingh@tajnews.in
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